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Sunday, May 25, 2025

गुरु नानक देव जी का प्रवास: एक आध्यात्मिक और मानवता की ओर यात्रा- साक्षी पाल Arthur Foot Academy

 

"Parvaas" हमें एक आध्यात्मिक यात्रा पर ले जाता है — ऐसी यात्रा जो केवल रास्तों और स्थानों की नहीं, बल्कि आत्मा की गहराइयों की होती है।

अमरदीप सिंह ने गुरु नानक देव जी की यात्राओं को केवल ऐतिहासिक घटनाओं के रूप में नहीं, बल्कि मानवता, समानता और प्रेम के संदेश के रूप में प्रस्तुत किया है। यह allegory हमें सिखाती है कि सच्चा धर्म कोई सीमा नहीं मानता — न भाषा की, न जाति की, न धर्म की।

गुरु नानक देव जी ने जीवन भर यात्राएं कीं — वे भारत से बाहर अफगानिस्तान, तिब्बत, अरब देशों और श्रीलंका तक गए। पर ये यात्राएं केवल स्थानों की नहीं थीं, बल्कि सोच, विश्वास और आत्मज्ञान की थीं। वे जहां भी गए, उन्होंने एक ही बात कही —
"न कोई हिन्दू, न मुसलमान — सब इंसान हैं।"

उन्होंने इंसान के भीतर बसने वाले ईश्वर की पहचान करवाई। उनकी यात्राओं का उद्देश्य किसी धर्म विशेष का प्रचार नहीं, बल्कि सच्चे धर्म की पहचान कराना था — जो प्रेम, करुणा और सेवा में बसता है।

"Parvaas" में अमरदीप सिंह ने इन यात्राओं को एक Tapestry — यानी चित्रों और प्रतीकों की चादर — के रूप में पिरोया है। इस चादर में हर धागा, हर रंग एक विचार है — कहीं सामाजिक कुरीतियों पर चोट, कहीं स्त्री सम्मान की बात, कहीं जातिवाद का विरोध, तो कहीं एकता और भाईचारे का मंत्र।

लेखक ने allegory के माध्यम से दिखाया है कि गुरु नानक देव जी का हर कदम एक संदेश था, और हर मुलाकात एक क्रांति।

अतः अमरदीप सिंह की यह कृति हमें प्रेरित करती है कि हम भी जीवन को एक पवित्र यात्रा समझें — जहां हर कदम पर सीख हो, और हर मोड़ पर सेवा का संकल्प।

साक्षी पाल

Wednesday, May 6, 2020

ईमानदारी और सम्मान: राजेश्वरी राठौड़

ईमानदारी एक बहुत ही मानवीय अभिवृत्ति है। यह गुण किसी भी व्यक्ति की आत्मा को सत्य, विश्वास और शुद्धता के भाव से परिपूर्ण कर देता है। साधारण अर्थ में ईमानदारी झूठ नहीं  बोलना  और सत्यता पूर्ण जीवन जीना होता है। एक शिक्षक के रूप में यह आवश्यक है कि हम महत्वपूर्ण गुणों का छात्रों में बीजारोपण करें, उन्हें पल्लवित करें लेकिन  कई बार देखने में आता है कि कुछ छात्रों द्वारा बारंबार असत्य  बोला जाता है जो कि स्पष्ट रूप  से उस डर का द्योतक  है  कि उनमें सत्य का सामना करने का साहस उत्पन्न नहीं हुआ। यह साहस छात्रों से परस्पर वार्तालाप करके और प्रोत्साहित करके कभी-कभी छात्रों के सामने अपने  द्वारा की गई किसी त्रुटि को स्वीकार करके, उनमें सत्य बोलने का साहस पैदा कर सकते है।

सम्मान वह गुण है जिसमें एक व्यक्ति किसी के प्रति आदर पूर्वक व्यवहार करता है जिसमें उसके प्रति श्रद्धा होती है। किसी के प्रति मन में सम्मान तब उत्पन्न होता है जब वह उसके प्रति समर्पित हो जाते हैं ।यह उसमें दयालुता, उत्तरदायित्व और आध्यात्मिकता की भावना भी उतपन्न करता है । जैसा कि एक भक्त का भगवान के प्रति, एक शिष्य का गुरु के प्रति होता है । सम्मान ऐसा भाव है जो समानुपाती रूप से कार्य करता है। जितना अधिक आप दूसरों को सम्मान देते हैं, उतना ही अधिक सम्मान आप प्राप्त करते हैं

यदि हम किसी की भावनाओं, विचारों और भिन्न धार्मिक मत का आदर करते हैं तो हमें भी दूसरों द्वारा सम्मान स्वत ही प्राप्त हो जाता है । हमें पर्यावरण के प्रति श्रद्धा रखनी चाहिए क्योंकि यह हमें जीवन प्रदान करता है। सम्मान की यह शृंखला हमें समाज और समुदाय से जुड़ने में सहायता करती है जो कि उत्तरोत्तर एक अटूट संबध में बदल जाती है
Rajeshwari Rathod
The Fabindia School, Bali

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