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Sunday, May 17, 2020

धैर्य और साहस: राजेश्वरी राठौड़


धैर्य एक ऐसा गुण है जो कि अन्य महत्वपूर्ण गुणों को अपने आप में समाहित रखता है। जैसा कि सहनशीलता ,दयालुता समझने की शक्ति और सबसे अधिक महत्वपूर्ण किसी व्यक्ति की बात को सुनना चाहिए वह अपने विचारों के विपरीत ही क्यों ना हो। यह वह  शक्ति जो आपको अपने  संवेगो पर  नियंत्रण रखना सिखाती है। उदाहरण स्वरूप यदि आप अपना मत किसी बहस में रखना चाहते हैं और आप अत्यंत व्यग्र हो रहे हैं तब यदि आपने अपना धैर्य रखा तो आपकी बात को भी ध्यान पूर्वक सुना जाएगा।  धैर्य से समाज में  शांति सौहार्द  का भी विकास होता है साथ ही स्वयं के  मस्तिष्क  मे भी  शांति का अनुभव होता है। अत्यंत धीर, गंभीर व्यक्ति का सदियों से सम्मान होता आया है।

साहस  भय, दुखनिराशा में शक्ति का दूसरा रूप हैं।  एक साहसिक अभिवृत्ति व्यक्ति विशेष को आत्म गौरव से भर देती है। अतः एक शिक्षक के रूप में हमारे लिए यह अति आवश्यक है कि हमें हमारे विद्यार्थियों में साहस रूपी आत्मविश्वास  को उत्पन्न करें। यह विद्यार्थियों के लिए भी आवश्यक है कि वे भय का सामना करना सत्य बोलना सीखें। साहस से ही किसी व्यक्ति दूसरी कई  गुण उत्पन्न होते है इससे व्यक्ति में उत्साह बना रहता है और वह कर्म करने को प्रेरित रहता है। यह विद्यार्थी को मानसिक रूप से  भी शक्तिशाली बनाता है और वे हिम्मत नहीं हारते हैं।  एक शिक्षक कई  गतिविधियों द्वारा जैसे कहानी सुनाना जो कि साहस से भरी हो प्रेरक प्रसंग सुनाना ,किसी साहसिक यात्रा पर से जाकर छात्रों में यह साहस उत्पन्न कर सकते हैं।
Rajeshwari Rathore
The Fabindia School

Wednesday, May 6, 2020

ईमानदारी और सम्मान: राजेश्वरी राठौड़

ईमानदारी एक बहुत ही मानवीय अभिवृत्ति है। यह गुण किसी भी व्यक्ति की आत्मा को सत्य, विश्वास और शुद्धता के भाव से परिपूर्ण कर देता है। साधारण अर्थ में ईमानदारी झूठ नहीं  बोलना  और सत्यता पूर्ण जीवन जीना होता है। एक शिक्षक के रूप में यह आवश्यक है कि हम महत्वपूर्ण गुणों का छात्रों में बीजारोपण करें, उन्हें पल्लवित करें लेकिन  कई बार देखने में आता है कि कुछ छात्रों द्वारा बारंबार असत्य  बोला जाता है जो कि स्पष्ट रूप  से उस डर का द्योतक  है  कि उनमें सत्य का सामना करने का साहस उत्पन्न नहीं हुआ। यह साहस छात्रों से परस्पर वार्तालाप करके और प्रोत्साहित करके कभी-कभी छात्रों के सामने अपने  द्वारा की गई किसी त्रुटि को स्वीकार करके, उनमें सत्य बोलने का साहस पैदा कर सकते है।

सम्मान वह गुण है जिसमें एक व्यक्ति किसी के प्रति आदर पूर्वक व्यवहार करता है जिसमें उसके प्रति श्रद्धा होती है। किसी के प्रति मन में सम्मान तब उत्पन्न होता है जब वह उसके प्रति समर्पित हो जाते हैं ।यह उसमें दयालुता, उत्तरदायित्व और आध्यात्मिकता की भावना भी उतपन्न करता है । जैसा कि एक भक्त का भगवान के प्रति, एक शिष्य का गुरु के प्रति होता है । सम्मान ऐसा भाव है जो समानुपाती रूप से कार्य करता है। जितना अधिक आप दूसरों को सम्मान देते हैं, उतना ही अधिक सम्मान आप प्राप्त करते हैं

यदि हम किसी की भावनाओं, विचारों और भिन्न धार्मिक मत का आदर करते हैं तो हमें भी दूसरों द्वारा सम्मान स्वत ही प्राप्त हो जाता है । हमें पर्यावरण के प्रति श्रद्धा रखनी चाहिए क्योंकि यह हमें जीवन प्रदान करता है। सम्मान की यह शृंखला हमें समाज और समुदाय से जुड़ने में सहायता करती है जो कि उत्तरोत्तर एक अटूट संबध में बदल जाती है
Rajeshwari Rathod
The Fabindia School, Bali

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