Showing posts with label सौहार्द. Show all posts
Showing posts with label सौहार्द. Show all posts

Monday, August 3, 2020

भारतीय संस्कृति - Krishan Gopal

भारतीय संस्कृति के विविध रूप है। इसके कई कारण है, यहाँ की अलग-अलग ऋतुएँ, इतिहास, धर्म, जाति
संप्रदाय और कृषि। यह सभी मिलकर भारतीय संस्कृति को प्रगाढ़ बनाते हैं। इन सभी में भाषा का भी एक महत्वपूर्ण स्थान है। संस्कृति के अंतर्गत हम रीति-रिवाज, परंपराओं, खानपान, धार्मिक-सामाजिक उत्सव आदि को सम्मिलित करते हैं। भारत में हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख और मुस्लिम धर्म के लोग निवास करते हैं। इन सभी की विविध परम्पराएँ  हैं। इन सभी धर्मों के मिश्रण से भी कई परम्पराएँ पैदा हुई, जिसने न केवल भारत को वरन विश्व को भी प्रभावित किया है। 

 भारत में एक तरफ ईद का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है तो दूसरी तरफ रक्षाबंधन की तैयारियाँ भी  अपने चरम पर है। सामाजिक एकता भारतीय परंपरा का महत्वपूर्ण तथ्य रही है। रमजान के पवित्र महीने में चारों तरफ खुशहाली की धूम मच जाती है तो सावन के महीने में शिवालयों में उत्साह देखा जा सकता है। ऐसा भी कहा जाता है कि भारत में वर्ष के पूरे 365 दिन उत्सव ही होते हैं। हमारे त्योहार और उत्सव इसी बात के द्योतक हैं कि आपस में भाईचारा बना रहे। विवाह भी किसी का एक अंग माना जा सकता है क्योंकि भारत में तयशुदा विवाह का प्रचलन अधिक है। ऐसे विवाह में कई परिवार आपसी रिश्तेदारी में बँध जाते हैं। पाश्चात्य संस्कृति से मेल होने के कारण इस प्रकार के विवाह में कुछ कमी अवश्य देखी जा रही है।

अगर हम सामान्य शब्दों में कहें तो संस्कृति यानी हमारी जीवन शैली। इस जीवन शैली में बालक अपने परिवार में होने वाले क्रिया-कलापों से प्रशिक्षित होता है। संस्कृति को किसी देश की विशेषताओं के अंतर्गत सम्मिलित किया जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि हम अपनी संस्कृति को बचाने का प्रयास करें। हमें हमारी परंपराओं, भाषाओं, रीति-रिवाजों, सामाजिक-राष्ट्रीय उत्सवों के बारे में जानकारी बढ़ानी चाहिए तथा इसे दूसरों के साथ भी साझा करना चाहिए। 

हमारी संस्कृति इतनी प्रगाढ़ है कि कई आघातों  के बावजूद सुरक्षित रह गई। आगे इसकी सुरक्षा हमारा दायित्व बन जाता है। हमारी राजभाषा हिंदी है किंतु हमारे यहाँ कई क्षेत्रीय भाषाएँ भी बोली जाती है, हमें इन भाषाओं का सम्मान करना चाहिए तथा इन को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाना चाहिए। नई शिक्षा नीति में भारत सरकार ने भी शिक्षा क्षेत्रीय भाषाओं में प्रदान करने की योजना बनाई है। इससे भी भारतीय भाषाओं का संरक्षण हो सकेगा। 
 सबसे महत्वपूर्ण हमारे राष्ट्रीय त्योहार, जो न किसी धर्म, न जाति संप्रदाय, न क्षेत्र आदि से जुड़े हैं। इन त्योहारों में जनता केवल भारतीय होने के गर्व के कारण भाग लेती है। 

यहाँ देश की एकता तथा सौहार्द ही महत्वपूर्ण होता है। यहाँ एक और बात महत्वपूर्ण है कि जब भी देश पर कोई संकट आता है तब सारे भारतीय बन जाते। फिर किसी प्रकार का मतभेद या मनभेद नहीं रहता। मिलकर सामना करते हैं या प्रोत्साहित करते हैं।  इन त्योहारों, उत्सवों  आदि का ध्यान रखते हुए आपसी एकता को मजबूत बनाना चाहिए। अपनी परम्पराएँ आने वाली पीढ़ी तक पहुँचाएँ। देश की वस्तु, अपनी भाषा,अपने उत्सव आदि पर हम गर्व करें।  

 Krishan Gopal
The Fabindia School
kde4fab@gmail.com

Saturday, July 4, 2020

एकता एवं देखभाल: उर्मिला राठौड़


एकता का तात्पर्य: एकता का अर्थ है संगठित या एकजुट होकर रहनासभी के प्रति समान भाव रखना। यह महत्वपूर्ण नहीं कि कौन क्या है? बल्कि यह जरूरी है कि हम एक है या अलग थलग? सुनिश्चित करना होगा कि हम हरसंभव मदद करें, गलतफहमियों को मिटाए, आपसी वैमनस्यता को ख़तम करें आदि। यह भी संभव है कि किसी विषय पर हमारे मध्य मतभेद न हो, हो सकता है कि हम एक दूसरे के विचारों से सहमत न हो परन्तु हम किसी का अहित  नहीं कर सकते और सबके विचार स्वीकार भी करने पड़ते है। एकजुटता से हम असंभव कार्य को संभव कर सकते है'एकजुटता वह धागा है जिसमें समस्त मानवीय गुणों जैसे खुशबूदार फूलों को पिरो कर रखा जाता है'

हमने बचपन में पढ़ा था कि किस तरह एक किसान अपने बेटों को लकड़ियों के गट्ठर से एकता की सीख देता है वैसे ही हम अपने परिवार और सदस्यों के मध्य समन्वय बनाए रखने के लिए बचपन से ही सीख देनी पड़ेगी जैसे- दूसरों के दुख का अनुभव करना, दया, सहानुभूति, और एक दूसरे की सहायता करने के गुण सिखाने होंगे

देखभाल क्या है:  देखभाल का अर्थ है दूसरों के प्रति ज़िम्मेदारी और प्यासे रहना। घर परिवार में अपने से बड़ों का सम्मान करना, उनको अपनेपन का अहसास देना, मुश्किल परिस्थितियों में एक दूसरे के साथ खड़े रहना। मित्रों के प्रति ईमानदारी एवं सहयोग की भावना रखना। अपने कार्यस्थल पर कर्तव्य, निष्ठा एवं ज़िम्मेदारी का निर्वहन करना। समाज के प्रति अपनत्व और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना। देश एवं राष्ट्र के प्रति राष्ट्रहित एवं नीति नियमों का पालन करते हुए, अनेकता में एकता की राष्ट्रीय धरोहर का सम्मान करना शामिल है।

एकता एवं देखभाल एक सुदृढ परिवार एवं राष्ट्र की नींव:  हम जानते है कि एक महान परिवार, समाज और राष्ट्र की नींव वहीं मजबूत हो सकती है, जहाँ हम अपने कर्तव्यों को अधिकारों से सर्वोपरि रखते हैप्रत्येक व्यक्ति की भावनाओं का सम्मान करते। जो समाज, परिवार या राष्ट्र एकजुट है वहाँ खुशहाली होती है। दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की होती है

कक्षा कक्ष में एकता एवं देखभाल की महत्वता : छात्रों को एकता के महत्त्व को समझाने के लिए प्रतिस्पर्धा से दूर रखना चाहिए। उनको शुद्ध एवं शांत वातावरण में रखकर उनसे जुड़ी प्रत्येक वस्तु की देखभाल करवाने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। देखा जाए तो सबसे ज्यादा एकता की ज़रूरत कक्षा कक्ष में होती है क्योंकि वहाँ अनेकताओं का मिलन होता है। विविध समाज, समुदाय, परिवार, भाषा, व्यंजन और संस्कृति का मिलन होता है। उन्हें एक दूसरे का सम्मान करना और विविधताओं को अपनाने की सीख देनी होगी। तभी बालक एकता का महत्व समझेंगेहम सब एक रह कर प्रकृति और मानवता को जीवित रख सकते है। जहाँ एकता है वहाँ कुछ भी बुरा नहीं हो सकता और अगर ऐसा होता भी है तो सब मिलजुल कर उस कठिन परिस्थिति से उबर सकते है। 
Urmila Rathore
The Fabindia School, Bali

Sunday, May 17, 2020

धैर्य और साहस: राजेश्वरी राठौड़


धैर्य एक ऐसा गुण है जो कि अन्य महत्वपूर्ण गुणों को अपने आप में समाहित रखता है। जैसा कि सहनशीलता ,दयालुता समझने की शक्ति और सबसे अधिक महत्वपूर्ण किसी व्यक्ति की बात को सुनना चाहिए वह अपने विचारों के विपरीत ही क्यों ना हो। यह वह  शक्ति जो आपको अपने  संवेगो पर  नियंत्रण रखना सिखाती है। उदाहरण स्वरूप यदि आप अपना मत किसी बहस में रखना चाहते हैं और आप अत्यंत व्यग्र हो रहे हैं तब यदि आपने अपना धैर्य रखा तो आपकी बात को भी ध्यान पूर्वक सुना जाएगा।  धैर्य से समाज में  शांति सौहार्द  का भी विकास होता है साथ ही स्वयं के  मस्तिष्क  मे भी  शांति का अनुभव होता है। अत्यंत धीर, गंभीर व्यक्ति का सदियों से सम्मान होता आया है।

साहस  भय, दुखनिराशा में शक्ति का दूसरा रूप हैं।  एक साहसिक अभिवृत्ति व्यक्ति विशेष को आत्म गौरव से भर देती है। अतः एक शिक्षक के रूप में हमारे लिए यह अति आवश्यक है कि हमें हमारे विद्यार्थियों में साहस रूपी आत्मविश्वास  को उत्पन्न करें। यह विद्यार्थियों के लिए भी आवश्यक है कि वे भय का सामना करना सत्य बोलना सीखें। साहस से ही किसी व्यक्ति दूसरी कई  गुण उत्पन्न होते है इससे व्यक्ति में उत्साह बना रहता है और वह कर्म करने को प्रेरित रहता है। यह विद्यार्थी को मानसिक रूप से  भी शक्तिशाली बनाता है और वे हिम्मत नहीं हारते हैं।  एक शिक्षक कई  गतिविधियों द्वारा जैसे कहानी सुनाना जो कि साहस से भरी हो प्रेरक प्रसंग सुनाना ,किसी साहसिक यात्रा पर से जाकर छात्रों में यह साहस उत्पन्न कर सकते हैं।
Rajeshwari Rathore
The Fabindia School

Blog Archive