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Thursday, September 23, 2021

दूसरों को खुशियाँ देना : कृष्ण गोपाल दवे

डॉ अनुपम सिब्बल ने अपनी पुस्तक में ठीक ही लिखा है कि जो चीजें हमें खुशी देती है, उनकी सूची छोटी होती जा रही है। हमें छोटी-छोटी बातों में खुशियों की तलाश करनी चाहिए ना कि किसी बड़ी खुशी के इंतजार में इन छोटे पलों को व्यर्थ गँवा देना। डॉक्टर सिब्बल ने अपनी पुस्तक में कई उदाहरण प्रस्तुत किए जिन्होंने लोगों को खुशी देने के लिए अपना जीवन तक समर्पित कर दिया। 

यह बात जितनी छोटी लगती है उतनी ही बड़ी और सारगर्भित है कि दूसरों को खुशियाँ देने से हमारा मन भी प्रसन्न रहता है। एक बार की घटना याद आती है कि हमने स्कूल के बच्चों से उनके पुराने कपड़े, स्वेटर, शॉल आदि मंगवाए। जो फटे हुए नहीं थे अच्छी स्थिति में थे। आशा के अनुकूल बहुत सारे कपड़े इकट्ठे भी हुए तथा एक दिन तय किया गया उस दिन हम बाली तहसील के आदिवासी गाँवों की ओर गए। अरावली की तलहटी में बसे कुछ छोटे-छोटे गाँव जहाँ न शिक्षा की व्यवस्था थी न लोगों के लिए रोजगार का साधन था। हम वहाँ पहुँचे और उन लोगों में यह एकत्र किए हुए कपड़े बाँटने लगे।


लोगों की खुशी का ठिकाना न रहा, कड़कड़ाती सर्दी में वे किस तरह से कम कपड़ों में गुजारा कर रहे थे। जब उन्हें स्वेटर आदि मिले तो बहुत खुश हुए। हमारे आसपास बच्चे, बूढ़े, जवान सब दौड़ दौड़ कर आए और खुश होते हुए हैं वे कपड़े ले गए। उनकी प्रसन्नता देख कर हमारे मन में भी प्रसन्नता का कोई ठिकाना न रहा। कुछ लोग निराश होकर भी गए क्योंकि उनके आने तक कपड़े समाप्त हो चुके थे। परंतु एक बार पुनः आने का विश्वास दिला कर तथा विश्वास लेकर हम वहाँ से लौट आए।


यह घटना हमारे दिल में समाहित हो गई। मन में इस बात की प्रसन्नता थी कि उन लोगों के चेहरों पर हमने खुशी के भाव देखे। यह भी पता था कि यह ख़ुशी लंबे समय तक की नहीं थी। पर बड़ी ख़ुशी की तलाश में छोटी खुशियों से क्यों मुँह मोड़ें। इसलिए दूसरों को ख़ुशी देने का एक अवसर भी हाथ से न जाए। 


Krishan Gopal

The Fabindia School

kde@fabindiaschools.in


Sunday, May 17, 2020

धैर्य और साहस: राजेश्वरी राठौड़


धैर्य एक ऐसा गुण है जो कि अन्य महत्वपूर्ण गुणों को अपने आप में समाहित रखता है। जैसा कि सहनशीलता ,दयालुता समझने की शक्ति और सबसे अधिक महत्वपूर्ण किसी व्यक्ति की बात को सुनना चाहिए वह अपने विचारों के विपरीत ही क्यों ना हो। यह वह  शक्ति जो आपको अपने  संवेगो पर  नियंत्रण रखना सिखाती है। उदाहरण स्वरूप यदि आप अपना मत किसी बहस में रखना चाहते हैं और आप अत्यंत व्यग्र हो रहे हैं तब यदि आपने अपना धैर्य रखा तो आपकी बात को भी ध्यान पूर्वक सुना जाएगा।  धैर्य से समाज में  शांति व सौहार्द  का भी विकास होता है साथ ही स्वयं के  मस्तिष्क  मे भी  शांति का अनुभव होता है। अत्यंत धीर, गंभीर व्यक्ति का सदियों से सम्मान होता आया है।

साहस  भय, दुख,  निराशा में शक्ति का दूसरा रूप हैं।  एक साहसिक अभिवृत्ति व्यक्ति विशेष को आत्म गौरव से भर देती है। अतः एक शिक्षक के रूप में हमारे लिए यह अति आवश्यक है कि हमें हमारे विद्यार्थियों में साहस रूपी आत्मविश्वास  को उत्पन्न करें। यह विद्यार्थियों के लिए भी आवश्यक है कि वे भय का सामना करना सत्य बोलना सीखें। साहस से ही किसी व्यक्ति दूसरी कई  गुण उत्पन्न होते है इससे व्यक्ति में उत्साह बना रहता है और वह कर्म करने को प्रेरित रहता है। यह विद्यार्थी को मानसिक रूप से  भी शक्तिशाली बनाता है और वे हिम्मत नहीं हारते हैं।  एक शिक्षक कई  गतिविधियों द्वारा जैसे कहानी सुनाना जो कि साहस से भरी हो प्रेरक प्रसंग सुनाना ,किसी साहसिक यात्रा पर से जाकर छात्रों में यह साहस उत्पन्न कर सकते हैं।
Rajeshwari Rathore
The Fabindia School

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