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Monday, July 12, 2021

अनुशासन: ज्योति सैन

“स्वयं पर स्वयं का शासन कहलाता है अनुशासन

यह कोई पराधीनता नहीं, ना ही है कोई बंधन

यह है नियमों का अनुकरण,

बनता है जिससे आदर्श जीवन।“

                 “अनुशासन चेतना का परिष्करण है,

                अनुशासन सिद्धांतों का अनुकरण है,

                 अनुशासन सुसंस्कारों का धरोहर है,

                  अनुशासन सफल जीवन का आधार है।“

अनुशासन को एकल शब्द कहा जाता है, जो एक औसत व्यक्ति को एक महान व्यक्तित्व में बदल देता है। इस दुनिया की सभी महान हस्तियों के बीच एक गुण है, जो सामान्य हैं वह है अनुशासन।अनुशासित दिनचर्या और उनके मन पर कठोर नियंत्रण ने उन्हें मानव जाति के इतिहास में अमर बना दिया। अनुशासन जीवन में सफलता प्राप्त करने में मदद करता है और सभी सफल लोगों की कहानियाँ हमेशा उनके जीवन में अनुशासन के महत्व को शामिल करेगी।

अनुशासन केवल दूसरों के बनाए नियमों के पालन करने को नहीं कहते, इसमें हमें स्वयं हमारे जीवन को सुव्यवस्थित व नियंत्रित ढंग से यापन करने के लिए नियमों का निर्माण करना व कठोरता से पालन करना है। अनुशासित व्यक्ति कभी जीवन में असफलता का मुँह नहीं देखता। सफल होने के लिए निरंतर प्रयास करने होते हैं। जिसमें अनुशासन एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। हमें हमेशा प्रकृति की तरह अनुशासित रहना चाहिए। जिस तरह से सूर्य समय पर उदय होता है, पृथ्वी अपने अक्ष पर घुमती है, चंद्रमा अपने समय अनुसार निकलता है, मौसम अपने समय के आधार पर बदलते हैं। ये सभी अनुशासित ढंग से अपना कार्य करते हैं। ठीक इसी तरह हमें भी अनुशासन बनाए रखते हुए लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना चाहिए।

Jyoti Sain 
The Fabindia School
jsn@fabindiaschools.in

Sunday, June 7, 2020

विनम्रता एवं सराहना: आयशा टाक


नम्रता विनम्र होने की अवस्था है। यह स्वयं को नियंत्रण में रखने का गुण है। एक व्यक्ति जो इस गुण का अधिकारी है, वह विनम्र और नम्र है। विनम्र व्यक्ति स्वयं का स्वामी होता है। वह जिद्दी नहीं होता है। वह अन्य लोगों की सलाह को स्वीकार करने और अपने अनुभवों से सीखने के लिए तैयार रहता है। वह किसी से नाराज़ नहीं होता है। एक अभिमानी व्यक्ति आसानी से क्रोधित हो जाता है, जब कोई चीज उसे ठेस पहुँचाती है। एक विनम्र व्यक्ति आसानी से क्रोधित नहीं होता है। वह अपनी गलतियों और छोटी - छोटी बातों को विनम्रता से स्वीकार करता है। 

एक अभिमानी व्यक्ति अपने दोषों को आसानी से स्वीकार नहीं करता है। वह नाराज हो जाता है और वह अपनी गलतियों के लिए दूसरों को दोषी मानता है। एक अभिमानी व्यक्ति जिद्दी और क्रोधी होता है। वह अन्य व्यक्तियों के विचारों एवं सुझावों को महत्त्व नहीं देता है। हमें अपने बच्चों को जीवन में विनम्र बनाना चाहिए, क्योंकि यह लोगों में सदभावना फैलाता है। विनम्रता व्यक्ति को दूसरों की स्थितियों को समझने के लिए अधिक संवेदनशील बनाती है। इसलिए पहले हमें बच्चों के प्रति विनम्र होना होगा, अगर हम चाहते है, कि वे दूसरों के साथ विनम्र रहें । अपने काम के लिए किसी की प्रशंसा करने से किसी व्यक्ति का विश्वास बढ़ सकता है।

सराहना शब्द बाहर से छोटा है, लेकिन सही तरीके से उपयोग किए जाने पर यह कुछ भी हासिल करने में मदद कर सकता है। यह शब्द किसी को प्रेरित करने के लिए सबसे शक्तिशाली शब्द है। यदि किसी को किसी निश्चित कार्य के लिए सराहना मिलती है, तो वह व्यक्ति हमेशा आगे के सभी कार्यों में सर्वश्रेष्ठ देता है। यह शब्द प्रेरक है, एक बड़ी शक्ति को अंदर ले जाता है और नकारात्मक विचारों को सकारात्मक में बदल सकता हैं। यह प्रशंसा का जादू है।

बहुत से लोग इस शब्द का उपयोग करना जानते हैं, जबकि अन्य इसकी गहराई और अर्थ को पहचानते है। यदि यह शब्द किसी व्यक्ति के लिए किया जाता है तो वह कम अंदरूनी ऊर्जा के साथ किसी भी कठिन कार्य को पूरा कर सकता है। कई संगठन और बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ सराहना की संस्कृति के लिए जानी जाती हैं। यह उनके कर्मचारियों की खुशी के पीछे मुख्य कारण है। प्रशंसा का उपयोग लोगों में आत्मविश्वास विकसित करने के लिए किया जा सकता है। यदि आगे कोई मुश्किल काम है और एक टीम उस कार्य को करने के तरीकों से अपरिचित है, तो टीम लीडर या मैनेजर अपने पिछले कार्य के लिए सदस्य या सदस्यों की सराहना करने की कोशिश करता है। इससे उस सदस्य की आंतरिक शक्ति बढ़ सकती है। हमें अपने बच्चों को उनके अच्छे काम के लिए सराहना करनी चाहिए, इससे उन्हें अगली बार बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलेगी। प्रशंसा से उन्हें अपने काम के प्रति सकारात्मकता मिलेगी। यहाँ तक कि एक शिक्षक को उनके अच्छे काम के लिए सराहा जाना चाहिए। यदि वे प्रेरित और खुश हैं, तो वे बच्चों को सकारात्मकता और खुशी प्रदान करेंगे।
Ayasha Tak
The Fabindia School, Bali

Sunday, May 17, 2020

धैर्य और साहस: राजेश्वरी राठौड़


धैर्य एक ऐसा गुण है जो कि अन्य महत्वपूर्ण गुणों को अपने आप में समाहित रखता है। जैसा कि सहनशीलता ,दयालुता समझने की शक्ति और सबसे अधिक महत्वपूर्ण किसी व्यक्ति की बात को सुनना चाहिए वह अपने विचारों के विपरीत ही क्यों ना हो। यह वह  शक्ति जो आपको अपने  संवेगो पर  नियंत्रण रखना सिखाती है। उदाहरण स्वरूप यदि आप अपना मत किसी बहस में रखना चाहते हैं और आप अत्यंत व्यग्र हो रहे हैं तब यदि आपने अपना धैर्य रखा तो आपकी बात को भी ध्यान पूर्वक सुना जाएगा।  धैर्य से समाज में  शांति व सौहार्द  का भी विकास होता है साथ ही स्वयं के  मस्तिष्क  मे भी  शांति का अनुभव होता है। अत्यंत धीर, गंभीर व्यक्ति का सदियों से सम्मान होता आया है।

साहस  भय, दुख,  निराशा में शक्ति का दूसरा रूप हैं।  एक साहसिक अभिवृत्ति व्यक्ति विशेष को आत्म गौरव से भर देती है। अतः एक शिक्षक के रूप में हमारे लिए यह अति आवश्यक है कि हमें हमारे विद्यार्थियों में साहस रूपी आत्मविश्वास  को उत्पन्न करें। यह विद्यार्थियों के लिए भी आवश्यक है कि वे भय का सामना करना सत्य बोलना सीखें। साहस से ही किसी व्यक्ति दूसरी कई  गुण उत्पन्न होते है इससे व्यक्ति में उत्साह बना रहता है और वह कर्म करने को प्रेरित रहता है। यह विद्यार्थी को मानसिक रूप से  भी शक्तिशाली बनाता है और वे हिम्मत नहीं हारते हैं।  एक शिक्षक कई  गतिविधियों द्वारा जैसे कहानी सुनाना जो कि साहस से भरी हो प्रेरक प्रसंग सुनाना ,किसी साहसिक यात्रा पर से जाकर छात्रों में यह साहस उत्पन्न कर सकते हैं।
Rajeshwari Rathore
The Fabindia School

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