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Thursday, May 29, 2025

संवेदना: इंसान की सबसे बड़ी शक्ति - Sakshi Khanna

Samvendna means sensitivity or feelings.
यह इंसान की वह भावना है जिससे वह दूसरों के सुख-दुःख को महसूस कर सकता है।
Sensitivity is what makes us human – it connects us emotionally to others and helps build a compassionate society.

जब हम किसी की तकलीफ़ को समझते हैं और उसकी मदद करना चाहते हैं, वहीं संवेदना कहलाती है।

अगर कोई बच्चा गिर जाता है, या कोई जानवर बीमार हो जाए या उसे चोट लग जाए, तो हमें उस जानवर की मदद करनी चाहिए और उसकी देखभाल करनी चाहिए। ऐसा करने से इंसान महान और संवेदनशील कहलाता है।

समाज में अगर हम सभी एक-दूसरे के लिए संवेदनशील हो जाएँ और सब एक-दूसरे की मदद करें, तो इससे एकता बनी रहेगी और बहुत-सी समस्याएँ अपने आप खत्म हो जाएँगी।

Savendna is not weakness, it is strength. यह इंसान को महान बनाती है। हमें अपने कार्यों से समय निकालकर दूसरों की भावनाओं को समझना चाहिए और जहाँ किसी को हमारी ज़रूरत हो, वहाँ मदद के लिए आगे आना चाहिए। इसी तरह हम एक अच्छे नागरिक और अच्छे इंसान बनते हैं।

"When someone is in trouble, one should not give him big sermons, but rather give him small help. Such help is better than big sermons."

साक्षी खन्ना

Sunday, May 25, 2025

गुरु नानक का प्रकाश पथ - रीना देवी Arthur Foot Academy

 

नाना नाम जहाज है,
जो जपे वह उतरे पार।
मेरा सद्गुरु करता मुझको प्यार,
वही तो है मेरा खेलनहार।

गुरु नानक देव जी सिख धर्म के प्रथम गुरु थे। उन्होंने एक ईश्वर की उपासना, मानवता की सेवा और सभी धर्मों में समानता का संदेश दिया।
उनका जीवन सादगी, करुणा और सत्य का प्रतीक था। उन्होंने ७ देशों की यात्रा की, जिसमें भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, अफगानिस्तान, ईरान, इराक, बांग्लादेश, सऊदी अरब (मक्का मदीना), श्रीलंका, तिब्बत शामिल हैं।
एक सच्चा इंसान वह है जो खुद भी अच्छा जीवन जीता है और दूसरों को भी अच्छा जीवन बनाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सिखाया कि भगवान एक है और वह सबमें है, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या रंग का इंसान हो। उनकी वाणी "एक ओंकार" से यह बात साबित होती है। उन्होंने हमेशा मेहनत से काम करने, सच बोलने और जरूरतमंदों की मदद करने की शिक्षा दी।

गुरु नानक जी की यात्राओं और उपदेशों से मैं यह सीखती हूं कि ज्ञान बांटना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कभी किसी से नफरत नहीं की, बल्कि सबको प्रेम का संदेश दिया। वह सभी धर्मों को साथ लेकर चले।
भारत-पाकिस्तान सीमा, करतारपुर, ननकाना साहिब, ऐमनाबाद, शक्करगढ़, और बाबा फरीद के बारे में भी बताया गया।
गुरु नानक की यात्राएं आज भी हमें प्रेरणा देती हैं कि हम अपने विचारों को सीमित न रखें, खुले मन से सभी से सीखें और सच्चाई, प्रेम और सेवा के मार्ग पर चलें।

Sunday class में मैंने वह स्थान देखे जहां पर गुरु नानक जी गए थे और मुझे बहुत अच्छा लगा, क्योंकि मैंने पहले कभी यह सब नहीं देखा था, लेकिन इस कक्षा के माध्यम से मुझे यह सौभाग्य प्राप्त हुआ।
वह सूफी संतों को भी अपने साथ लेकर चले और उन्होंने यही संदेश दिया कि हम सब एक हैं और ईश्वर भी एक ही है।

इस क्लास में मुझे यह भी अच्छा लगा जब बू अली कलंदर की दरगाह, पानीपत (हरियाणा, इंडिया) दिखाई गई।
हर दम मैं मौला अली का नाम जप करता हूं।
मां को जीत लेना ही ज़िंदगी का मकसद बना।

सूफी एजाज अहमद हाशमी, सेवादार, शेख शरफ-उद-दीन की दरगाह के बारे में बताया गया और वहां पर उनसे बात भी की।
मुझे बहुत अच्छा लगा और घर बैठे-बैठे हमने इतनी सारी जगहें देख लीं, समय का पता ही नहीं चला।
इन्हें देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा, और अच्छी बातें भी सुनने को मिलीं और जानकारी भी प्राप्त हुई।

गुरु नानक देव जी के उपदेश वह ज्ञान का पवित्र प्रकाश हैं, जिसमें संपूर्ण विश्व को प्रकाशवान किया है।

रीना देवी


गुरु नानक देव जी: एकता और मानवता के संदेशवाहक - सिमरन कौर Arthur Foot Academy

 

गुरु नानक देव जी एक बहुत अच्छे और महान गुरु थे, जिन्होंने हमारे लिए बहुत कुछ किया है। सामाजिक अधिकारों के लिए उनका पूरा परिवार शहीद हो गया, जिसमें कुछ लोगों ने उनके दो बेटों को जिंदा दीवार में गाड़ दिया था। उन्होंने देश के लिए कई तरह के बलिदान दिए। ऐसे ही कई गुरु और भी थे, जैसे गुरु तेगबहादुर जी आदि।

एक बार गुरु नानक जी एक गाँव में गए। वहां गुरु नानक जी एक रात के लिए रुके। वहीं पर कुछ लोगों ने उन्हें खाना खिलाया और उनकी बहुत अच्छी देखभाल की। अगली सुबह गुरु नानक जी वहाँ से जाने लगे। जाते वक्त गुरु नानक जी ने उन सभी लोगों को आशीर्वाद दिया।

ऐसे ही गुरु नानक जी ने अनेक जगहों पर जाकर सभी धर्मों के लोगों से मिले और उन्हें एकता और मानवता का संदेश दिया। उन्होंने सभी के साथ समानता का पाठ पढ़ाया और सिखाया कि सभी धर्मों के लोगों के साथ मिलकर एकता के साथ रहना चाहिए। कोई भी धर्म अलग नहीं है और ना ही कोई इंसान अलग है, सब समान हैं और सभी धर्मों और इंसानों का ईश्वर एक है।

"केवल वो बोलो जो तुम्हारे लिए सम्मान लेकर आए।"

– सिमरन कौर


गुरु नानक देव जी की यात्राएँ: एकता और प्रेम का संदेश - स्वाति Arthur Foot Academy

 

"यात्रा सिर्फ स्थानों की नहीं होती, यह आत्मा की गहराइयों में उतरने का माध्यम भी बन जाती है। गुरु नानक देव जी की यात्राएँ हमें सिखाती हैं कि सच्चाइयों, प्रेम और एकता की खोज के लिए सीमाएँ कोई मायने नहीं रखतीं।"

पाठ ‘प्रवास’ से मैंने सीखा है कि कैसे गुरु नानक देव जी ने अपनी यात्राओं के दौरान अलग-अलग धर्मों, जातियों के लोगों से मुलाकात की, जिससे सीखने को मिलता है कि "ईश्वर एक है और सभी इंसान बराबर हैं, चाहे वे किसी भी धर्म या जाति से हों। हमें सभी के साथ समानता और भाईचारे का व्यवहार करना चाहिए।"

गुरु नानक जी ने अपने जीवन में लगभग 150 से अधिक स्थानों पर यात्रा की, जिनका उद्देश्य था:

  • सभी के साथ समानता और भाइचारे से व्यवहार करना और समझना कि सबका ईश्वर एक है।

  • अंधविश्वास और जात-पात के खिलाफ बोलना।

  • सभी धर्मों के लोगों के साथ बातचीत करके उनकी भावनाओं को समझना, उनका हल निकालना या उनकी मदद करना।

  • एकता का संदेश देना; गुरु नानक जी ने सभी धर्मों, जातियों के लोगों से मिलकर एकता, भाइचारे और प्रेम का संदेश दिया।

प्रवास हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हमारे जीवन के पड़ाव, चाहे वे कितने भी छोटे क्यों न हों, वे कभी नहीं भूल सकते हैं, बल्कि हर रुके हुए ठहराव को एक प्रेरणा में बदला जा सकता है।

प्रवास एक ऐसा संदेश है जो आज भी हमारे भीतर झांकने और सुधारकर जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

"गुरु नानक जी ने सिखाया है कि ईश्वर न तो किसी एक धर्म में सीमित है, न ही किसी एक स्थान में है, वह सबमें और हर जगह मौजूद है।"

ना कोई हिन्दू है, ना कोई मुसलमान है, सभी मनुष्य हैं, सभी एक समान हैं। — गुरु नानक देव जी
स्वाति

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