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Thursday, February 27, 2025

Jab Jago Tabhi Savera - Reena

इंसान सफल तब होता है, जब वो दुनिया को नहीं बल्कि खुद को बढ़ाना शुरू कर देता है।

इस अध्याय से हमें शिक्षा मिलती है कि हमें पहले की हुई गलतियों को माफ करके आगे बढ़ना चाहिए। गलतियां हुई और होंगी, लेकिन हम उन गलतियों से भी अपने जीवन में बहुत कुछ सीखते हैं, और सीखे भी हैं। जैसे कि हमें इस अध्याय में बताया गया है कि जीवन में मुश्किलें आएंगी, लेकिन उनका सामना हमें कैसे करना है, यह हमें अच्छे से पता होना चाहिए। क्योंकि जीवन में गलतियां होती रहती हैं। नोबेल ने अपने प्रयोग जारी रखे और जेलीनाइट और बैलिस्टाइट का आविष्कार किया। एक समय था जब उनके नाम पर 355 पेटेंट थे। 1888 में उनके लुडविग की मृत्यु हो गई। और एक फ्रेंच अखबार ने गलती से एल्फ्रेड नोबेल के नाम का शोक संदेश प्रिंट कर दिया। अखबार में लिखा होता है, 'Le marchand de la mort est mort' का अर्थ है कि मौत के व्यापारी की मौत हो गई, जो पहले से ही लोगों को मारकर अमीर बन गया है। लेकिन जब उन्हें यह पता चला, तो इस बात का गहरा असर पड़ा कि लोग मेरे बारे में सोचते हैं। उनके विचार कैसे बदले जाएं। फिर उन्होंने अपनी आखिरी वसीयत लिखी, जिसमें उन्होंने अपने सारे धन का 94% पांच पुरस्कारों में स्थापित कर दिया।

असंभव कुछ भी नहीं है। जब जागो तब ही सवेरा।
काम करो ऐसा की एक पहचान बन जाए
हर कदम ऐसा चलो की निशान बन जाए।

Reena 
Arthur Foot Academy

Monday, October 12, 2020

कठिन परिश्रम कभी असफल नहीं होता - Ayasha Tak

अगर कोई व्यक्ति कठिन परिश्रम कर सकता है , तो वह सफल जरूर होगा। वह किसी भी तरह से विफल नहीं हो सकता है। हम जानते हैं कि कठिन काम आसान नहीं है , यह सभी तरह के लोगों के लिए बहुत मुश्किल है। हर पेशे को कड़ी मेहनत की जरूरत होती है। इसके बिना कुछ भी सुधार नहीं हो सकता। इसका मतलब है कि कड़ी मेहनत व्यक्ति को कभी असफल नहीं होने देती। अब मैं एक युवा व्यक्ति की कहानी बता रही हूँ। जिन्होंने कड़ी मेहनत से सफलता प्राप्त की।

उन्होनें अपनी मेहनत की शुरुआत अपने स्कूली जीवन से की। लड़के ने कड़ी मेहनत से हाई - स्कूल में अच्छा परिणाम प्राप्त किया। उन्होंने अध्ययन में बहुत अधिक समय बिताया। कई तरह के काम उन्हें बिना अध्ययन के पूरे करने पड़ते थे। वह अपने परिवार के साथ नहीं रहता था। क्योंकि उनका स्कूल उनके गाँव से बहुत दूर था। इसलिए वह स्कूल के छात्रावास में रहता था। वहाँ पर उसे अपना हर काम स्वयं करना पड़ता था। इसलिए वह ठीक से सो भी नहीं पाता था। इसके बावजूद उसने अपनी कड़ी मेहनत से अच्छे अंक प्राप्त किए। अन्यथा यदि आप कड़ी मेहनत करते है ,तो आपकी प्रतिभा में वृद्धि होगी।

स्कूल की पढाई पूरी होने के बाद में उसे कॉलेज में दाखिला लेना था। परन्तु उसका परिवार गरीब होने के कारण उसकी कॉलेज की फीस भरने में असमर्थ था। उसने अपने लिए नौकरी प्राप्त करके फिर अपनी पढाई और नौकरी दोनों ही कामों में कड़ी मेहनत की। आखिरकार, वह अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करने सफलता प्राप्त करने में सक्षम हुआ। अब वह एक बहुत बड़े व्यवसायी है। उन्होनें अपनी मेहनत से सब कुछ हासिल किया। अगर वह मेहनत नहीं कर पाता तो उन सफलताओं को कभी हासिल नहीं कर पाता

Ayasha Tak, The Fabindia School <atk@fabindiaschools.in>

Monday, September 21, 2020

मदद करने के फायदे - उषा पंवार

दूसरों की मदद करने से जीवन सफल और बेहतर बनता है। जब हम लोग छोटे होते हैं तो सिखाया जाता है कि हमें दूसरों की मदद करनी चाहिए लेकिन जैसे-जैसे बड़े होते हैं इस सीख को भूल जाते हैं। इस सीख को कभी अपने जीवन से दूर नहीं होने देना चाहिए। जब हम किसी की मदद करते हैं तो इससे सकारात्मकता महसूस करते हैं और एक अच्छा इंसान बनते हैं।

किसी की मदद करने के लिए केवल धन की जरूरत नहीं होती उसके लिए एक अच्छे मन की जरूरत होती है। जब हम दूसरों की मदद करते हैं तो यह सिर्फ उस इंसान की मदद नहीं होती है बल्कि एक सीखने की प्रक्रिया होती हैं। हर दिन कुछ नया सीख सकते हैं। मदद करने से हमको आंतरिक खुशी मिलती हैं। मदद करने से दूसरों के लिए अच्छा उदाहरण बनते हैं जब हम दूसरों की मदद करना शुरू करते हैं तो इससे बाकी लोग प्रेरित होते हैं। दूसरों की मदद करने के साथ हम लोगों के लिए प्रेरणा बनते हैं। 

उषा पंवार 
The Fabindia School Bali 
upr@fabindiaschools.in

Monday, August 3, 2020

जीवन को सफल बनाने का मंत्र - उस्मान गनी

एक बेटे ने पिता से पूछा-
पापा.. ये 'सफल जीवन' क्या होता है ?

पिता, बेटे को पतंग उड़ाने ले गए।
बेटा पिता को ध्यान से पतंग उड़ाते देख रहा था...

थोड़ी देर बाद बेटा बोला-
पापा.. ये धागे की वजह से पतंग अपनी आजादी से और ऊपर की और नहीं जा पा रही है, क्या हम इसे तोड़ दें !!  ये और ऊपर चली जाएगी....

 *पिता ने धागा तोड़ दिया *

पतंग थोड़ा सा और ऊपर गई और उसके बाद लहरा कर नीचे आयी और दूर अनजान जगह पर जा कर गिर गई...

तब पिता ने बेटे को जीवन का दर्शन समझाया...

बेटा..
'जिंदगी में हम जिस ऊंचाई पर हैं..
हमें अक्सर लगता की कुछ चीजें, जिनसे हम बंधे हैं वे हमें और ऊपर जाने से रोक रही हैं
जैसे :
           *घर* -
         *परिवार*- 
       *अनुशासन*
      *माता-पिता*
       *गुरू-और*
          *समाज*

और हम उनसे आजाद होना चाहते हैं...

वास्तव में यही वो धागे होते हैं जो हमें उस ऊंचाई पर बना के रखते हैं..

'इन धागों के बिना हम एक बार तो ऊपर जायेंगे परन्तु बाद में हमारा वो ही हश्र होगा जो बिन धागे की पतंग का हुआ...'

"अतः जीवन में यदि तुम ऊंचाइयों पर बने रहना चाहते हो तो, कभी भी इन धागों से रिश्ता मत तोड़ना.."

"धागे और पतंग जैसे जुड़ाव के सफल संतुलन से मिली हुई ऊंचाई को ही 'सफल जीवन' कहते हैं.।."

अतः इस छोटी सी कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है कि सम्बन्ध केसा भी हो हमे उसे तोड़ना नही चाहिए। सब से मिलजुल कर रहना चाहिए । जिंदगी में उतार चढ़ाव तो आते रहते है उनका हमे मुकाबला करना चाहिए और अपनी जिंदगी को सफल बनाना चाहिए।

उस्मान गनी
The Fabindia School
ugi@fabindiaschools,in

Sunday, October 21, 2018

कीर्ति मालवीय: दिमाग और दिल

दिमाग और दिल भले ही शरीर के अलग - अलग स्थान पर है परंतु यह दोनों हमारे बहुत काम आते हैंदिमाग और दिल एक दूसरे से पूर्ण रूप से विपरीत है l किसी भी व्यक्ति को कोई निर्णय लेना हो तो उसे दिल तथा दिमाग दोनों की सुननी चाहिए l किसी एक को दूसरे पर भारी नहीं होने देना चाहिए l हमें हमेशा दोनों तरफ से सोच -विचार करने के बाद फैसला लेना चाहिए और ऐसा निर्णय जिससे कोई तकलीफ़ हो l हमें परिस्थिति के हिसाब से निर्णय लेना चाहिए क्योंकि कई बार हमें जहाँ दिल की बुद्धिमत्ता का प्रयोग करना चाहिए वहाँ हम दिमाग की बुद्धिमत्ता और जहाँ दिमाग की आवश्यकता होती है वहाँ दिल की बुद्धिमत्ता का प्रयोग कर लेते हैं और अपने आप के लिए कठिनाइयाँ बढ़ा देते हैं l
            
हमें सफल जिंदगी जीने के लिए इन दोनों का समझदारी से उपयोग करना चाहिए क्योंकि अगर यह बुद्धिमत्ता परेशानियाँ मिटा सकती है तो यह ही है जो उन परेशानियों का कारण भी बन सकती हैजब हम रिश्ते मजबूत करने के बारे में सोचते है तब हमें हमेशा अपने दिल की बुद्धिमत्ता की सुननी चाहिए परन्तु जब उन्हीं रिश्तों को बनाए रखने की बात आती है तब दिमाग ही हमें सही राह दिखाता है l यह कहना गलत नहीं होगा कि कई बार दिल की आवाज झूठ भी हो सकती है क्योंकि जो हम चाहे वह हमारा दिल मान लेगा और अच्छे विचार आएँगे परन्तु दिमाग ऐसा बिलकुल नहीं करता वह हमेशा हमें सच्चाई से सामना करवाता है और उसके सामने खड़े होने में सहायता करता है l   
           
जब कोई व्यक्ति सिर्फ अपने दिल से निर्णय लेता है तब ज्यादातर वह व्यक्ति कठोर परिस्थिति में स्थिर खड़ा नहीं रह पाता, उस परिस्थिति का डट कर सामना नहीं कर पाता और अंतर से टूट जाता है परन्तु अगर कोई व्यक्ति है जो सिर्फ अपने दिमाग की बात सुनता है वह  कठिन परिस्थिति में हिम्मत नहीं हारेगा वह उस परिस्थिति से बाहर तो जायेगा लेकिन उसे कुछ और नहीं सूझेगा वह सिर्फ अपने बारे में सोचेगा और वह स्वार्थी भी बन सकता हैइसलिए एक समझदार व्यक्ति कभी भी दिमाग को दिल पर या दिल को दिमाग पर हावी नहीं होने देतावह दिमाग तथा दिल, दोनों की बुद्धिमत्ता एक साथ लेकर चलता है l जिसका  जितना उपयोग करना है  उतना ही उसका उपयोग करता है l जब हम अंदर से दुखी होते हैं और परेशान होते तब हमारा दिमाग काम नहीं करता और हम कोई  भी निर्णय दिल से लेते हैं जिससे आगे चल कर हम पछताते हैंजब हम ज्यादा खुश या ज्यादा दुखी होते हैं तब हमें कोई भी निर्णय नहीं लेना चाहिए  l 
            
अतः  बुद्धिमत्ता दिमाग की और बुद्धिमत्ता दिल की हमें हर निर्णय लेने में सहायता करते हैं और हमारे जीवन को सफलता से जीने के लिए मदद करते हैं l
कीर्ति मालवीय, Xll Commerce The Fabindia School

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