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Thursday, March 6, 2025

समझौता - Suman Singh

बेटी वो तुमसे दुगनी उम्र का है, तो क्या हुआ।
अब तक न जाने कितने लोग तुम्हें ठुकरा चुके हैं।।
सोचो और सोच कर बताओ,
अपनी ज़िद पर तुम भी न उतर आओ ।
सोचना शुरू किया उसने तो,
बस सोचती ही रह गई।
देखते दिखाते, बीस से अठाईस की हो गई।।
यूँ ही लोग आते गए और उसके पक्के रंग को देख कर उसे ठुकराते गए ।।
चिड़चिड़ी सी हो गई वो,
इन रंगों की दुनिया में खो गई वो ।।
क्यो इंसान के दिल को न देखकर,
चेहरे के रंग पर जाता है इंसान।
क्यो कर नही पाता वह सही गलत की पहचान।।
लड़के चाहे कैसे भी हो ,
पर उन्हें अप्सरा चाहिए।
तो किसी की बेटी क्यों डमी ही,
खरीद लाइये।।
सजा देना घर के एक कोने में, सजा – सवारकर ।
गुस्से में सोचती रही वह,
अपना मन सा मारकर ।।
अच्छा पढ़ने लिखने का भी कोई फायदा नही हुआ,
डिग्री के ऊपर पक्का रंग ,
बाजी मार ले गया।।
मेरे पीछे मेरी बहनें भी तो,
घर में कंवारी बैठी है।
लोग पापा को कहते हैं,
अभी तक तेरे घर पर,
सारी बैठी है।।
सोचा, समझा उसने भी ,
कर लिया फैसला।
तोड़ दूंगी जो भी आँखों मे,
सपना था पला।
पापा का बोझ कम कर दिल,
पर बोझ लिए चली जाउंगी।
दुगुनी उम्र का ही सही, उसके
साथ ही घर बसाउंगी ।।
ये ही तो होता चला आया है,
पीढ़ियों से अभी तक,
रंग तो भगवान की देन है,
पर दुनिया को भी कहाँ चैन है।।
पर शायद उसे भी ,
अपने पिताजी पर दया आ गई।
उसके दिल मे था दर्द,
पर घर में खुशियां सी छा गई।।

Suman Singh
Gyanshree School

Sunday, October 21, 2018

कीर्ति मालवीय: दिमाग और दिल

दिमाग और दिल भले ही शरीर के अलग - अलग स्थान पर है परंतु यह दोनों हमारे बहुत काम आते हैंदिमाग और दिल एक दूसरे से पूर्ण रूप से विपरीत है l किसी भी व्यक्ति को कोई निर्णय लेना हो तो उसे दिल तथा दिमाग दोनों की सुननी चाहिए l किसी एक को दूसरे पर भारी नहीं होने देना चाहिए l हमें हमेशा दोनों तरफ से सोच -विचार करने के बाद फैसला लेना चाहिए और ऐसा निर्णय जिससे कोई तकलीफ़ हो l हमें परिस्थिति के हिसाब से निर्णय लेना चाहिए क्योंकि कई बार हमें जहाँ दिल की बुद्धिमत्ता का प्रयोग करना चाहिए वहाँ हम दिमाग की बुद्धिमत्ता और जहाँ दिमाग की आवश्यकता होती है वहाँ दिल की बुद्धिमत्ता का प्रयोग कर लेते हैं और अपने आप के लिए कठिनाइयाँ बढ़ा देते हैं l
            
हमें सफल जिंदगी जीने के लिए इन दोनों का समझदारी से उपयोग करना चाहिए क्योंकि अगर यह बुद्धिमत्ता परेशानियाँ मिटा सकती है तो यह ही है जो उन परेशानियों का कारण भी बन सकती हैजब हम रिश्ते मजबूत करने के बारे में सोचते है तब हमें हमेशा अपने दिल की बुद्धिमत्ता की सुननी चाहिए परन्तु जब उन्हीं रिश्तों को बनाए रखने की बात आती है तब दिमाग ही हमें सही राह दिखाता है l यह कहना गलत नहीं होगा कि कई बार दिल की आवाज झूठ भी हो सकती है क्योंकि जो हम चाहे वह हमारा दिल मान लेगा और अच्छे विचार आएँगे परन्तु दिमाग ऐसा बिलकुल नहीं करता वह हमेशा हमें सच्चाई से सामना करवाता है और उसके सामने खड़े होने में सहायता करता है l   
           
जब कोई व्यक्ति सिर्फ अपने दिल से निर्णय लेता है तब ज्यादातर वह व्यक्ति कठोर परिस्थिति में स्थिर खड़ा नहीं रह पाता, उस परिस्थिति का डट कर सामना नहीं कर पाता और अंतर से टूट जाता है परन्तु अगर कोई व्यक्ति है जो सिर्फ अपने दिमाग की बात सुनता है वह  कठिन परिस्थिति में हिम्मत नहीं हारेगा वह उस परिस्थिति से बाहर तो जायेगा लेकिन उसे कुछ और नहीं सूझेगा वह सिर्फ अपने बारे में सोचेगा और वह स्वार्थी भी बन सकता हैइसलिए एक समझदार व्यक्ति कभी भी दिमाग को दिल पर या दिल को दिमाग पर हावी नहीं होने देतावह दिमाग तथा दिल, दोनों की बुद्धिमत्ता एक साथ लेकर चलता है l जिसका  जितना उपयोग करना है  उतना ही उसका उपयोग करता है l जब हम अंदर से दुखी होते हैं और परेशान होते तब हमारा दिमाग काम नहीं करता और हम कोई  भी निर्णय दिल से लेते हैं जिससे आगे चल कर हम पछताते हैंजब हम ज्यादा खुश या ज्यादा दुखी होते हैं तब हमें कोई भी निर्णय नहीं लेना चाहिए  l 
            
अतः  बुद्धिमत्ता दिमाग की और बुद्धिमत्ता दिल की हमें हर निर्णय लेने में सहायता करते हैं और हमारे जीवन को सफलता से जीने के लिए मदद करते हैं l
कीर्ति मालवीय, Xll Commerce The Fabindia School

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