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Tuesday, November 29, 2022

स्वतंत्रता और शांति - ज्योति तड़ियाल


स्वतंत्रता और शांति
स्वतंत्रता का शाब्दिक अर्थ है – स्व+तंत्र+ता अर्थात स्वयं की इच्छा के अनुसार कार्य करना। जब हम स्वयं की इच्छानुसार मार्ग चयनित करते हैं और ऐच्छिक कार्य कर पाते हैं।

तिलक जी के अनुसार, “ स्वतंत्रता मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है।” यानि कि स्वतंत्रता हमारा अधिकार है और यदि कोई इसका हनन करता है तो भारतीय संविधान हमें सुरक्षा प्रदान करता है। परंतु बंधनहीन स्वतंत्रता अराजकता उत्पन्न करती है।

फ़्रांस के महान दार्शनिक रूसो ने लिखा था, “ मनुष्य स्वतंत्र पैदा हुआ है, किंतु वह सर्वत्र बंधनों में जकड़ा हुआ है।“ रूसो का यह कथन फ़्रांस की राजक्रांति का नेतृत्व वाक्य बना और वह १७८९ में राजशाही से मुक्त हो गया।

स्वतंत्रता
विद्यार्थी जीवन की तीन घटनाएं जब मुझे स्वतंत्रता का अभाव अनुभव हुआ –
प्रथम – विषय चयन के समय मुझे अपना चयनित विषय नहीं मिल पा रहा था। कारण अंक कम आना। शिक्षिका की प्रतिक्रिया स्वाभाविक थी क्योंकि उन्हें अपने परीक्षाफल का भय था। परंतु उस विषय में मेरी पकड़ ठीक ठाक थी। केवल १२ वीं कक्षा में अंक कम आए थे। फिर भी क्यों हमें इस बात की स्वतंत्रता नहीं मिलती कि मेहनत से परिणाम सुधारा जा सकता है। बहरहाल बहुत परेशानियों के बाद मुझे वह विषय मिला और स्नातक में मेरे उसी विषय में सर्वाधिक अंक थे।

द्वितीय – बात कक्षा ८ की है। नए ऐच्छिक विषय के रूप में मेरे द्वारा संगीत का चयन किया गया। परंतु अध्यापिका को मेरी आवाज़ पसंद नहीं आई। मुझे अवसर ही नहीं मिल पाया। और विवशता में कला विषय कर चयन करना पड़ा। तृतीय – कभी कभी केवल ऊपरी तौर पर देख लेने भर से ही किसी के प्रति राय बना ली जाती है। कक्षा में भी जो छात्र थोड़ा संकोची होता है, उसे कुछ उत्तरदायित्व ही नहीं दिया जाता और प्रायः ऐसी परिस्थितियों से हम परिचित होते ही रहते हैं।

सार यही है कि केवल पुस्तकीय भाषा में स्वतंत्रता लिखने भर से ही स्वतंत्रता नहीं मिलती इसके लिए हृदय विशाल और धैर्य धारण करना आवश्यक है। साथ ही यह कुछ बंधनसहित होनी चाहिए।

शांति
शांति वह मानसिक अवस्था है जब मस्तिष्क तनाव व हिंसा से मुक्त हो। जब असफलता का भय मनुष्य को पीड़ित न करे। जब किए गए कार्य में कोई मीन मेख न निकले। जब दूसरे को नीचा दिखाने किर इच्छा बलवती न हो। देखा जाए तो अनेक सामाजिक कारण ऐसे होते हैं जब किसी के द्वारा शांति का मार्ग छोड़ हिंसा का मार्ग पकड़ लिया जाता है।

हम प्रायः अपने विद्यालय या आस पास भी ऐसा देखते हैं कि कुछ विद्यार्थी स्वयं को ठीक से प्रकट नहीं कर पाते हैं और हिंसक हो उठते हैं, कई बार ऐसा भी होता है कि दूसरे विद्यार्थियों पर प्रभाव जमाने के लिए कुछ विद्यार्थी उग्र व हिंसक हो उठते हैं।

कक्षा कक्ष के संदर्भ में वायलेंस शब्द के अनेक अर्थ लिए जा सकते हैं। जैसे – हिंसा, आवेग, उग्रता, उग्र व्यवहार, बल, तीव्रता, उत्पात आदि। मेरा मानना है कि कक्षा में वायलेंस शब्द को भली भांति विद्यार्थियों को समझाया जाना चाहिए। इनका भेद भी स्पष्ट करना चाहिए कि केवल बल प्रयोग ही वायलेंस नहीं है। मौखिक व्यवहार द्वारा किसी को दुःखी करना भी वायलेंस है।

मेरा मानना है कि आज सबके ऊपर अपेक्षाओं का इतना भार है कि न चाहते हुए भी वह वायलेंस का शिकार हो जाता है, शांति कोसों दूर चली जाती है। इसलिए परिवार, विद्यालय, संस्थाओं, कार्यालयों का यह दायित्व बन जाता है कि वे यथासंभव वातावरण को शांत बनाए रखने का प्रयत्न करें, जिससे वॉयलेंस में कमी आ सके।

लक्ष्य कठिन अवश्य है परंतु असंभव नहीं है और पहल करने से ही अगर सफलता मिल पाएगी।।

प्रेषक
ज्योति तड़ियाल
द दून गर्ल्स स्कूल

Friday, May 14, 2021

Freedom and Peace - Manju Srivastava

         स्वतंत्रता एक ऐसी चीज़ है जो इस सृष्टि पर जन्में हर एक जीव जन्तु , प्राणी और

 यहां तक कि पेड़ पौधों के लिए भी अति आवश्यक है l स्वतंत्रता के बिना उनका पूर्ण

 विकास संभव नहीं  है l

       स्वतंत्रता का अर्थ केवल अपनी ज़जीरों को उतार देना नहीं होता , बल्कि इस तरह

 से जीना है कि औरों का भी सम्मान बढ़े और वे भी स्वतंत्र हो l

       एक व्यक्ति की स्वतंत्रता वहीं तक उचित होती है जहां से दूसरे व्यक्ति की शांति भंग

 न हो और वह भी अपने जीवन का विकास कर सके l

      शांति को स्वतंत्रता से अलग किया ही नहीं जा सकता क्योंकि कोई भी तब तक शांति

 से नहीं रह सकता जब तक वह स्वतंत्र न हो l

     स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है जिसे सब को मिलना चाहिए l

     हम बाहरी दुनिया में शांति नहीं पा सकते है l  हमें अपने अंदर ही शांति को तलाशना

 है l मन शांत होगा तो विचार भी सकारात्मक होगें l

Manju Srivastava
The Doon Girls' School, Dehradun 

Thursday, February 18, 2021

तनाव को कम करने के तरीके - Ayasha Tak

Courtesy: managementcentre.co.uk
जीवन के किसी बिंदु पर हर कोई तनाव का अनुभव करता है, तनाव काम या नौकरी से संबंधित हो सकता है ,परिवार से संबंधित हो सकता है या आपकी पढ़ाई ,खराब स्वास्थ्य , वित्तीय समस्याओं आदि के कारण हो सकता है। कई बार किसी करीबी व्यक्ति की मृत्यु भी तनाव का कारण बनती है। 

कुछ लोग तनाव को सही ढंग से संभालते हैं , जबकि कुछ लोग अपने जीवन को फिर से व्यवस्थित करने में  विफल रहते हैं। तनाव के लक्षण मानसिक , शारीरिक या सामाजिक हो सकते हैं , इसमें सिरदर्द , हताशा , भूख का घटना या बढ़ना , नींद न आना या बहुत ज्यादा नींद आना शामिल हैं। 

कुछ आसान तरीकों को अपनाकर हम अपने जीवन में तनाव को कम कर सकते हैं।  जैसे - 
 ज़्यादा मुस्कुराए - जितना हो सके मुस्कुराओ। जैसा की मदर टेरेसा ने कहा था - “ शांति की शुरुआत मुस्कान से होती है और हर बार जब आप किसी पर मुस्कुराते हो, तो यह प्यार की एक कार्यवाही है ,उस व्यक्ति को एक उपहार ,एक सुंदर चीज़। “

संगीत -सॉफ्ट और शांत संगीत एक महान संकटमोचक है। संगीत एक व्यक्ति को खुश और हल्का रखता है। आप अपने पसंदीदा गीत को सुन सकते है और साथ में गुनगुना भी सकते है, इससे आपकी आत्माएं जाग उठेगी और आप फिर से खुश और अद्भुत महसूस करेंगे। 

वास्तविक बनो -अपने लक्ष्य को पूरा करने में अपने आप को ज़्यादा जोर न दें। धैर्य रखें , तार्किक और यथार्थवादी बनें। एक ही दिन में सब कुछ पूरा करने की कोशिश करके अपने आप को तनाव न दें। “नहीं” कहना सीखें। 

हँसना - हंसी एक बेहतरीन दवा है। जितना हो सके हंसें , कॉमेडी धारावाहिक और फिल्में देख सकते है। 

दोस्त - अपने दोस्तों के साथ घूमने और अपने जीवन का आनंद लेने के लिए कुछ समय निकालें। आप अपने जीवन का आनंद लेने के लिए पैदा हुए हैं , इसलिए कम चिंता करें और खुश रहें। 

Ayasha Tak
The Fabindia School
atk@fabindiaschools.in

Friday, September 11, 2020

मेरी रुचि - उर्मिला राठौड़

शौक किसी भी व्यक्ति में उसकी अन्य आदतों में से एक विशेष रुचि को प्रदर्शित करता है जो उसकी सारी आदतों से अलग होता है। शौक बहुत अच्छी वस्तु है, जो हर किसी में होता है। किसी भी वस्तु का शौक होना एक अच्छी आदत है जो सभी में होनी बहुत आवश्यक है, क्योंकि यह उस व्यक्ति को उसकी पसंद की चीजों को करने के लिए प्रेरित करता है। यह व्यक्ति को खुले दिमाग से किसी कार्य में व्यस्त करता है। यह हमें कभी भी अकेला नहीं छोड़ता और हमारा मानसिक बीमारियों से बचाव करता है।

शौक हमारे प्रतिदिन के जीवन का वो हिस्सा होता है। यह हमारी प्रतिदिन के दबाव से बचने में मदद करता है। यह हमें बहुत अधिक आनंद और शारीरिक, मानसिक व आत्मिक शान्ति प्रदान करता है। यह एक योग और ध्यान की तरह है, कभी-कभी तो इससे भी अधिक लाभ प्रदान करता है। यह हमारे मस्तिष्क को क्रियात्मकता की ओर ले जाता है और जीवन में कुछ बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है। अच्छी आदतें नाटकीय रुप से हमारे व्यक्तित्व और चारित्रिक विशेषताओं में सुधार करने के साथ ही हमारे प्रदर्शन को बेहतर करती हैं। यह हमारी योग्यता और क्षमता को खोजने में मदद करता है और उन्हें सही दिशा में प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करता है। हमारे शौक हमें जीवन की दैनिक भीड़ से अलग रखकर, हमारे दिमाग को ताजा और शान्त बनाते हैं।

मेरा प्रिय शौक : बागवानी करना।
मेरा पसंदीदा शौक बागवानी करना है और मुझे नए पौधों को लगाना और उन्हें हर सुबह पानी देना बहुत अच्छा लगता है। खिलते हुए फूलों और बढ़ते हुए पौधों को देखकर मुझे आत्मिक शांति महसूस होती है और जीवन की वास्तविकता का अहसास होता है। यह मुझे तंदुरुस्त, मजबूत, स्वस्थ और तरोताजा रखने में मदद करता है। प्रतिदिन पेड़ों को पानी देना और बागवानी करना, मेरे लिए सबसे अच्छा व्यायाम है, जो मेरे मस्तिष्क और शरीर को सकारात्मक की ओर मोड़ता है।

इस कोरोना काल में व्यक्ति अपने आप को बंधन में महसूस करने लगा। मैंने इस बार निश्चित किया कि जब हम बागवानी कर सकते है तो खेती क्यों नहीं? इस विचार ने मुझे इसके लिए प्रेरित किस और एक छोटी सी कोशिश की। जब फसल को लहलहाते, पक्षियों की चहचहाहट और बादलों की आवाजाही के बीच खेत में काम करना एक अद्भुत सुकून देता है। इससे हम शारीरिक और मानसिक तौर पर स्वस्थ महसूस करते है। साथ ही एक नया कौशल भी सीख पाई। 

अतः हमें अपने शौक को जिंदा रखना चाहिए । इससे जीवन में नवीनता और सरसता बनी रहेगी।

उर्मिला राठौड़
The Fabindia School
urd@fabindiaschools.in

Sunday, November 3, 2019

कक्षा में युद्ध एवम शांति का वातावरण

शिक्षक एक कुम्हार की भाँति होती है जो विद्यार्थी रुपी घड़े को बनाने के लिए बाहरी हाथ से हल्की सी चोट भी देता है , लेकिन घड़े के अंदर यानी हमारी आत्मा को भी सहारा देता है ।
एक बार एक कक्षा में सभी विद्यार्थी जब अध्यन कर रहे थे । तभी अगले विषय का समय आरम्भ होने पर शिक्षक कक्षा में से
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चले गए तथा सभी विद्यार्थी एक दूसरे से बात करने में लीन हो गए यह वार्ता कब युद्व में परिवर्तित हो गई इस बात का पता विद्यार्थियों को नहीं लगा । सब एक दूसरे से लगातार बहस करते जा रहे थे । बहस ये थी कि हर कार्य में बालिकाएं ज्यादा तेज हैं या बालक, धीरे धीरे यह झगड़ा युद्ध मे परिवर्तित हो गया । उनको पता ही न चला कि अध्यापिका कब कक्षा में प्रवेश कर गई वह शांति के साथ उनके झगड़े को देख रही थी और समझने का प्रयास कर रही थी कि आखिर क्या हो रहा है ? अचानक से बच्चों की नज़र अध्यापिका पर पड़ी और सब धीरे धीरे अपनी जगह पर बैठ गए । उन्होंने शांत भाव से बच्चों से पूछा कि ,’क्या हुआ और आप सब इतनी तेज तेज़ झगड़ा क्यों कर रहे थे ।‘ सबसे पहले तो बच्चों ने उनसे माफी मांगी और फिर झगड़े का कारण बताया , कारण जान कर अध्यापिका ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी फिर उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि सभी मनुष्य के अंदर अपने कुछ खास गुण होते हैं जिनके चलते वह सभी अपनी पहचान किसी न किसी रूप में अवश्य बनाते हैं , जैसे यहां से शिक्षा प्राप्त कर कोई गायक बनेगा कोई खिलाड़ी तो कोई डॉक्टर बनेगा और कोई कुछ और व्यवसाय चुनेगा जिसमें की वह निपुण होगा । इसलिए कभी भी किसी को नीचा या कम नहीं समझना चाहिए ।अध्यापिका की समझदारी वाली बातें सुनकर सभी विद्यार्थि शर्मिंदा भी हुए और उन्होंने शिक्षिका से अपने व्यवहार की एक बार फिर से माफी मांगी । 
इस कहानी की महत्वपूर्ण विशेषता यह है की प्रत्येक शिक्षक में धैर्यता को होना अत्यंत आवश्यक है । इसी धैर्य की वजह से शिक्षिका ने कक्षा की युद्ध पूर्ण स्थिति को शांति से हल कर दिया । 
एक अच्छा शिक्षक हमारी समस्याओं का समाधान ही नहीं करता , बल्कि उस समस्या से कैसे निबटा जाए यह भी सिखाता है ।
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