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Saturday, August 15, 2020

समस्या समाधान - उर्मिला राठौड़

किसी समस्या का समाधान (हल) प्राप्त करने के लिये हमें विभिन्न पहलुओं का  क्रमबद्ध तरीके से विश्लेषण करना
पड़ता है। रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत से कारक ऐसे आते है, जिनको समझ लेने की बाद ही निष्कर्ष निकलता है कि इससे कैसे निपटे और उसका सामना कैसे करे ? 

व्यक्ति मानसिक और शारीरिक तौर पर मजबूत होगा तभी ऐसी परिस्थितियों से निकल सकता है।इसके लिए हमें अपनी जीवन शैली में बदलाव करने की ज़रुरत है। एक बालक अपनी समस्याओं के निवारण हेतु कोशिश तो करेगा लेकिन सही क्रम अपनाने में गलती कर लेता है। उसके समाधान के लिए वयस्कों की मदद की आवश्कता होती है। 
सबसे पहले व्यक्ति को मानसिक तौर पर मजबूती चाहिए ।  उसके लिए एकाग्रता, सकारात्मकता होना आवश्यक है। यह तभी होगा जब हम नियमित योगाभ्यास करेंगे। अच्छे और प्रेरणास्पद साहित्य पढ़ेंगे और शिष्ट व्यक्तियों के साथ अपने विचारों का आदान प्रदान करेंगे। विपरीत परिस्थितियों से लड़ने का हौसला होगा। प्रत्येक समस्या अपने साथ समाधान रखती है बस जरूरत है तो धैर्यवान बनने की, नए तरीकों को खोजने की। हम धरती से सभी समस्याओं को मिटा नहीं सकते लेकिन उसके लिए रास्ता तो खोज सकते है। यह धैर्य और सकारात्मता से ही होगा।

 किसी विषय से संबंधित समस्याओें के लिए निरन्तर अभ्यास करना चाहिए। जिससे हमारा भविष्य बेहतर बन सके। क्योंकि हम जो हमेशा कार्य करते है वो सफलता पाने के लिए नहीं है बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए है कि हम कहीं असफल न हो। 

उर्मिला राठौड़
The Fabindia School
ure@fabindiaschools.in 

Sunday, June 7, 2020

विनम्रता और प्रशंसा: राजेश्वरी राठौड़


विनम्रता आत्मसम्मान का विशेष गुण है। विनम्रता जैसे गुण से व्यक्ति धैर्यवान व संयमी हो जाता है। दूसरों के सहयोग व सहायता का भाव ही हमको विनम्र बनाता है। अहंकार सदैव दूसरों की आलोचना करवाता है। विनम्रता व्यक्ति को स्वच्छ व ईमानदार बनाती है। यह आपको सहज संबंध स्थापित करने के योग्य बनाती है।

जिस किसी भी व्यक्ति के पास विनम्रता होती है वह व्यक्ति से मनुष्य बन जाता है क्योंकि विनम्रता अपने साथ मनुष्यता को लाती है। संवेदनाओं को लाती हैं, भावनाओं को लाती है, और भावनाएँ और संवेदनाएँ व्यक्ति को इंसान बना देती है। ऐसे ही विद्यालय में शिक्षकों का विनम्रता का व्यवहार विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। कक्षा-कक्ष में शिक्षकों द्वारा कहानी कहना, किसी महान नेता के जीवन से जुड़ी घटना बताना इत्यादि के माध्यम से छात्रों में विनम्रता का गुण विकसित किया जा सकता है।

इसी तरह परिवार व समाज में भी विनम्रता का एक विशेष महत्व है। बालक सबसे पहले परिवार के साथ रहता है, उसको भी दैनिक कार्य व छोटी-छोटी बातों से उसे विनम्रता का भाव सिखाया जाना चाहिए। उसे क्षमा शीलता का भाव होना चाहिए। विद्यालय में शिक्षकों द्वारा छात्रों में आपस में एक दूसरे की मदद करने पर आभार प्रकट करना चाहिए। ऐसी भावना रखने से ही बालक को अच्छा इंसान बनाया जा सकता है। विनम्रता मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत है। उससे ही मनुष्य एक अच्छा नागरिक बन सकता है।
प्रशंसा का अर्थ है किसी की बढ़ाई करना है। हमें अपने स्वजनों संबंधियों की परिचित, अपरिचितों की सत्प्रवृत्तियों को प्रोत्साहित करते रहना चाहिए। हर एक मनुष्य में कुछ हुनर होता है। उस हुनर की अच्छाइयों को पहचानना चाहिए और उसे प्रोत्साहित करना चाहिए। जिससे उनके सद्गुण बढे। साहस व आत्मविश्वास बढ़ाकर ही किसी को श्रेष्ठता के कठिन सन्मार्ग पर चलाया जाना संभव हो सकता है। दमन और दंड से निंदा और तिरस्कार से कोई दुर्गुण दब तो जाते पर अवसर मिलने पर वे हिंसा के साथ और भी भयंकर रूप से प्रकट होते हैं।

दोषों का उन्मूलन तो गुणों की वृद्धि से ही संभव है। ऐसे ही कक्षा-कक्ष में एक शिक्षक छात्र की प्रतिभा को पहचानता है, उसे और विकसित करने के लिए विद्यार्थी को प्रोत्साहन देता है ताकि वह अपने कार्य को और रुचि से और अच्छे से करें। जैसे- महाभारत में गुरु द्रोणाचार्य ने अर्जुन को धनुष विद्या अच्छे से सिखाई और आज पूरे संसार में अर्जुन की प्रशंसा की जाती है। गुणों को बढ़ाने में प्रोत्साहन और प्रशंसा का मार्ग सर्वश्रेष्ठ हैं विनम्र व्यक्ति की ही सच्ची प्रशंसा की जाती है।
Rajeshwari Rathore
The Fabindia School, Bali

Sunday, May 17, 2020

साहस और धैर्य: जफर खान

साहस एक दुर्लभ गुण है | साहसी व्यक्ति जीवन में हमेशा सफलता पाता है | वह अपने जीवन में अपने लक्ष्य को आसानी से जीत लेता है | जीवन में मनुष्य को हमेशा साहसी बनकर ही रहना चाहिए क्योंकि डरे हुए इंसान को सभी लोग डराते हैं, वह इंसान कभी भी जीवन में सफल नहीं हो पाता हैं| साहस रखने वाला व्यक्ति हर मुश्किल का सामना आसानी से कर लेता है साहस हमें हमेशा जीवन में आगे की ओर लेकर जाता है| साहस रखने वाला व्यक्ति किसी से नहीं डरते हैं चाहे उनके सामने कोई भी मुश्किल आ जाए| हमें जीवन में हमेशा साहस जैसा व्यवहार रखना चाहिए और किसी भी मुश्किल से नहीं डरना चाहिए| आज का समय जब कोरोना जैसी बीमारी चल रही है इस समय में व्यक्ति को अपने साहस को स्थिर रखना चाहिए ताकि वह इस बीमारी से डरे नहीं बल्कि इस बीमारी का सामना करें और इस परिस्थिति से उबर सके |

जीवन में सफलता पाने के लिए धैर्य रखना बहुत जरूरी है | धैर्यवान व्यक्ति विपदा आने पर भी अपना मानसिक संतुलन बनाए रखता है और शांत चित्त होकर इस पर नियंत्रण करते हुए दुख से बचने का सरल मार्ग खोज लेता है| धैर्य की परीक्षा विपत्ति आने पर ही होती है| आज के समय के चलते सभी लोगों को धीरज से काम करना चाहिए जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं कि दुख के बाद सदैव सुख आता है रात के बाद सवेरा होता है चाहे कोई भी विपत्ति हो वह कुछ समय के लिए ही रहती है उसके बाद खुशी आ जाती है  | धैर्यवान व्यक्ति अपने जीवन में आने वाली किसी भी समस्या से डरता नहीं है बल्कि धीरज रख कर उस समस्या का हल खोजता है और अपनी समस्याओं को  सुलझाता है|
Jaffer Khan
The Fabindia School

साहस और धैर्य: आयशा टॉक

साहस का उपयोग करने से हम जीवन में आने वाली मुश्किलों को जीत पाते हैं। हर व्यक्ति के मन में भय या डर होता है, लेकिन जब वह साहस का उपयोग करते हुए आगे बढ़ता है और उस डर का सामना करता है, तो उस व्यक्ति का विकास होता है। संसार में आधे से अधिक लोग तो इसलिए असफल हो जाते है कि समय पर उनमें साहस का संचार नहीं हो पाता और वे बहुत जल्दी घबरा जाते हैं। असफल होने के बाद भी सफलता के लिए कोशिश करते रहना ही साहस है। यदि आपके पास काम करने का सही तरीका है और आपने लगातार साहस किया है तो आपको सफलता पाने से कोई नहीं रोक सकता।


जिंदगी में किसी भी कार्य को करने के लिए हमें धैर्यवान होना बहुत जरूरी होता है। क्योंकि किसी भी कार्य में सफलता हमेशा समय से पहले नहीं मिलती है। धैर्य एवं सहनशीलता के बिना हम जीवन में कुछ भी बड़ा काम नहीं कर पाएँगे। कभी - कभी हम किसी कार्य को बिना धैर्य रखें, समाप्त करने की सोचते हैं और वह कार्य हम सही ढंग से नहीं कर पाएँगे या बीच में ही छोड़ देंगे और हमें सफलता नहीं मिलेगी।

इस प्रकार जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए साहस एवं धैर्य का होना बहुत जरूरी होता है। जैसे कक्षा में सभी विद्यार्थी पढ़ाई में एक जैसे नहीं होते हैं। कुछ विद्यार्थी डर के मारे किसी कार्य में आगे आने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाते हैं, ऐसी परिस्थिति में कक्षा के अध्यापक को उन विद्यार्थियों में सबसे पहले साहस जगाना होता है। उनकी गलतियों को धैर्यपूर्वक सुधारना चाहिए एवं उनको उनकी कमियों के साथ हर हाल में स्वीकार करना होता है। तभी उन विद्यार्थियों में साहस एवं धैर्य का संचार हो सकता हैं और वे जीवन में कुछ अच्छा कर सकेंगे। 
Ayasha Tak
The Fabindia School

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