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Thursday, February 27, 2025

Jab Jago Tabhi Savera - Arthur Foot Academy

जब जागो तब सवेरा से हमें यह सीखने को मिला कि अगर हमें किसी काम में सफलता हासिल नहीं होती है तो हमें वह काम छोड़ना नहीं चाहिए, बल्कि उसे अच्छे से करना चाहिए। जो पीछे गलती हुई, उसे सुधारना चाहिए और समय का हमें सही उपयोग करना चाहिए। इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं होता अगर हम समय का सही से उपयोग करें। अगर हम समय को इसी तरह वेस्ट करेंगे, तो इसमें हमारा ही नुकसान होगा। तो हमें समय की अहमियत समझनी चाहिए।

साक्षी खन्ना


जब जागो तब सवेरा। मैंने यह पढ़ा है कि इसे मुझे यह सीखने को मिला है कि जब जागो तब सवेरा होता है। मैं सोचती हूँ कि जो गलती मुझसे पहले हुई है और मैं बार-बार उसी गलती के बारे में सोचती रहूंगी, तो मैं जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ सकती हूँ। अगर मैं अपने दिल और दिमाग से कोई कार्य करना चाहती हूँ, तो मुझे जीवन में बहुत कुछ सीखना होगा। जिसकी मैं चाहती हूँ कि मैं पढ़ भी रही हूँ और आगे भी पढ़ूं, और पढ़-लिखकर आगे बढ़ूं और एक अच्छी शिक्षिका बनूं। आर्थर फूट एकेडमी स्कूल में मैंने जीवन में कभी पहले किसी स्कूल में नहीं पढ़ाया है और मैं जीवन की पहली सीढ़ी की कोशिश कर रही हूँ। एक कविता में बताया गया है कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती, और मेरी सोच यही है कि अगर मैं जीवन में कोशिश करूंगी, तो मैं जरूर जीवन में आगे बढ़ूंगी। और अगर मैं पीछे की गई गलती को बार-बार दोहराऊंगी और अब अपने आप को माफ करके आगे बढ़ूंगी, तो मैं कभी आगे बढ़ सकती हूँ।

सिमरन

हम कभी भी अपने जीवन में पीछे जाकर नई शुरुआत नहीं कर सकते। लेकिन अपने आज में शुरुआत कर सकते हैं। एक नए अंत को अंजाम दे सकते हैं।  
हमें अपने जीवन में कभी निराश नहीं होना चाहिए। क्योंकि इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। परंतु हमें खुद पर विश्वास होना चाहिए। अगर हमने अपने जीवन में किसी भी कार्य को सही तरीके और पूरे विश्वास के साथ किया है, परंतु फिर भी अगर हमें उस कार्य का सही परिणाम न मिले, तो हमें दुखी नहीं होना चाहिए। बल्कि उसके महत्व को समझकर उसे और भी अच्छी तरह से पूरा करने का प्रयास करना चाहिए।  
ऐसे ही, अगर हमें कोई कार्य देर से समझ में आए, तो हमें कार्य को छोड़ना नहीं चाहिए। बल्कि उस कार्य की शुरुआत वहीं से कर देनी चाहिए।
                                                                                     
                                                                                    स्वाति


Tuesday, October 13, 2020

आत्म निर्भर - कविता देवडा

जीवन में हम सब को आत्मनिर्भर होना चाहिए क्योंकि आज के दौर में अगर हम आत्म निर्भर रहेंगे तो ही आगे बढ़ पाएंगे। हर चीज को सीखने के लिए हमें हमेशा आगे बढ़कर विनम्र होकर तैयार रहना चाहिए। जब हम कोई कार्य सीखते हैं तो मन में सवाल जवाब तो रहते ही हैं लेकिन उन सवालों का जवाब ढूंढने का प्रयास हमें करना चाहिए। जब हम आत्मनिर्भर रहेंगे तो हमारे आने वाली पीढ़ी भी हमें देखकर प्रयास करेगी। जब हम आत्म निर्भर रहने की कोशिश करेंगे तभी हमारी आने वाली पीढ़ी हमें देखकर सीखने की कोशिश करेंगी।

हम जैसे भी हैं पहले स्वीकार करें  स्वयं को  नहीं तो  हम  मजबूत  और आत्मनिर्भर  नहीं बन सकते हैं। हर व्यक्ति एक जैसा नहीं होता या हम किसी के जैसे नहीं बन सकते हैं। हमारे पास कुछ भी करने का हुनर तो बहुत है लेकिन हम कुछ बहाने बनाकर उसको नकारते हैं। कोई भी नया कार्य करने का अगर सोचते हैं तो उसकी शुरुआत तो हमें ही करनी होगी लेकिन अगर हम कुछ करने से पहले ही  पीछे हट जाएंगे  तो हम  आगे कैसे बढ़ेंगे। हम कुछ  गलती करने के लिए ही तैयार नहीं होंगे तो उसमें सुधार कैसे करेंगे। स्वयं की गलती को भी स्वीकारना अपने आप में बहुत बड़ी बात है। दूसरों को कोसने की बजाय हमें पहले स्वयं में झांकना होगा और अपनी गलतियों को अपनाना और सुधार करना होगा।

 एक छोटे बच्चे को ही ले लीजिए वह भी अगर कुछ काम करना चाहे तो पहले तो वह खुद कोशिश करेगा फिर जब नहीं होगा उससे तो वह बड़ों से मदद लेगा। वैसे ही हम लोगों को भी प्रयास करते रहना चाहिए और लोग क्या कहेंगे इस बारे में नहीं सोचना है लोग तो हमेशा दोनों तरफ से बोलेंगे अगर हम सफलता पाते हैं तो भी बोलेंगे और नहीं पाते हैं तो भी बोलेंगे इसीलिए स्वयं पर निर्भर होना सीखिए धन्यवाद।

कविता देवडा, द फैबइंडिया स्कूल <kda@fabindiaschools.in>

Thursday, July 16, 2020

नई सोच - सुरेश सिंह नेगी

दुनिया में सीखाने वालों की कमी नहीं है,बस कमी है तो सीखने वालों की। हर एक इंसान के पास इतना समय भी
नहीं है, कि वह प्रयोग करके सीखें लेकिन जो लोग उस क्षेत्र से जुड़े हैं, वो  प्रयोग करके सीखतें हैं। और वे अपने इस अनुभव को  दूसरों के साथ साझा करतें हैं।  इस तरह  से ज्ञान  लगातार आगे की ओर बढ़ता ही चला जाता है।  इसमें सीखने वालों के बजाय सीखाने वालों का ज्ञान ज्यादा बढ़ता है। 

 इसलिए हर समय दूसरों को सीखाने की कोशिश करते रहना चाहिए। इस कोविद -१९ के दौर में जंहा कुछ लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे । वंही दूसरी ओर कुछ लोग इस समय में कुछ नया सोच रहे थे।  उन्ही में से एक वर्ग सीखने और सीखाने वालों का आता है।  सीखाने  वालों ने सेमिनार आयोजित करें और सीखने वालों ने उनमे भाग लिया। उन लोगों  में से मैं भी एक हूँ। 

सीखने की इस प्रक्रिया में बहुत सी चीजों को हम भूल जातें हैं, लेकिन उनमे से कुछ चीजें ऐंसी भी होती हैं, जो कि  हमारे दिमाग में  एक अलग सी जगह बना लेती है। उन चीजों में से जिस चीज ने मुझे सोचने के लिए मजबूर कर दिया वो मै आप लोंगो से भी साझा करना चाहता हूँ। 

हम लोग गणित में संख्याओं को जोड़ना,घटाना और गुणा  दाँयी   तरफ से बाँयी  तरफ को करते हैं जबकि  भाग को बाँयी  तरफ से दाँयी  तरफ को । यंहा पर मैने भाग को बाँयी  ओर  से दाँयी ओर को हल करके दिखाया है। मुझे उम्मीद है, कि यह तरीका आप को भी मेरी तरह ही सोचने लिए मजबूर कर देगा।

सुरेश सिंह नेगी
द फैबइंडिया स्कुल
sni@fabindiaschools.in

Sunday, May 17, 2020

साहस और धैर्य: उषा पंवार


सच्चा साहसी वही होता है जो कभी निराश नहीं होता है। जिस काम को करने में डर लगता है फिर भी हम उस काम को करने की कोशिश करते हैं और पूरा कर देते हैं वही साहस होता है। साहस धैर्य योग्यता कोशिश यह सफलता के रहस्य हैं। हमें कठिन परिस्थितियों में ही साहस व धैर्य की आवश्यकता पड़ती है। साहस रखने व वाले व्यक्ति किसी से नहीं डरते उनके सामने कोई भी मुश्किल हो। साहस ही एकमात्र ऐसा साथी है जिसे साथ लेकर मनुष्य कठिन से कठिन रास्ते पर चलकर लक्ष्य तक पहुंच जाता है। साहस वह उत्साह है जो जीवन में रंग भरता है। विद्यार्थियों को भी हर चुनौती का सामना करने का साहस रखना चाहिए तभी वे अपने लक्ष्य तक पहुंच है।

     धैर्य:-धीरे धीरे रे मना धीरे सब कुछ होय,
         माली सींचे सौ घड़ा ऋतु आए फल होय।

जिसे धीरज है वह मेहनत से नहीं घबराता उसे सफलता मिलती ही है। धैर्य कड़वा है पर उसका फल मीठा होता है। धैर्य हर समस्या का हल है। धैर्य यानी सब्र एक ऐसी सवारी है जो सवार को गिरने नहीं देती दुख में धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए। धैर्य और साहस में फर्क है जहां धैर्य की जरूरत है वहां साहस से काम नहीं चलता जैसे यदि कोई पानी में डूबा जा रहा है तो उसे बचाने के लिए साहस की जरूरत होती है न कि धैर्य की। उस समय धैर्य काम बिगाड़ देता है उसी प्रकार शिक्षक को कमजोर छात्र को समझाने के लिए धैर्य की जरूरत होती है ।
Usha Panwar
The Fabindia School

साहस और धैर्य: आयशा टॉक

साहस का उपयोग करने से हम जीवन में आने वाली मुश्किलों को जीत पाते हैं। हर व्यक्ति के मन में भय या डर होता है, लेकिन जब वह साहस का उपयोग करते हुए आगे बढ़ता है और उस डर का सामना करता है, तो उस व्यक्ति का विकास होता है। संसार में आधे से अधिक लोग तो इसलिए असफल हो जाते है कि समय पर उनमें साहस का संचार नहीं हो पाता और वे बहुत जल्दी घबरा जाते हैं। असफल होने के बाद भी सफलता के लिए कोशिश करते रहना ही साहस है। यदि आपके पास काम करने का सही तरीका है और आपने लगातार साहस किया है तो आपको सफलता पाने से कोई नहीं रोक सकता।


जिंदगी में किसी भी कार्य को करने के लिए हमें धैर्यवान होना बहुत जरूरी होता है। क्योंकि किसी भी कार्य में सफलता हमेशा समय से पहले नहीं मिलती है। धैर्य एवं सहनशीलता के बिना हम जीवन में कुछ भी बड़ा काम नहीं कर पाएँगे। कभी - कभी हम किसी कार्य को बिना धैर्य रखें, समाप्त करने की सोचते हैं और वह कार्य हम सही ढंग से नहीं कर पाएँगे या बीच में ही छोड़ देंगे और हमें सफलता नहीं मिलेगी।

इस प्रकार जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए साहस एवं धैर्य का होना बहुत जरूरी होता है। जैसे कक्षा में सभी विद्यार्थी पढ़ाई में एक जैसे नहीं होते हैं। कुछ विद्यार्थी डर के मारे किसी कार्य में आगे आने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाते हैं, ऐसी परिस्थिति में कक्षा के अध्यापक को उन विद्यार्थियों में सबसे पहले साहस जगाना होता है। उनकी गलतियों को धैर्यपूर्वक सुधारना चाहिए एवं उनको उनकी कमियों के साथ हर हाल में स्वीकार करना होता है। तभी उन विद्यार्थियों में साहस एवं धैर्य का संचार हो सकता हैं और वे जीवन में कुछ अच्छा कर सकेंगे। 
Ayasha Tak
The Fabindia School

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