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Tuesday, October 13, 2020

आत्म निर्भर - कविता देवडा

जीवन में हम सब को आत्मनिर्भर होना चाहिए क्योंकि आज के दौर में अगर हम आत्म निर्भर रहेंगे तो ही आगे बढ़ पाएंगे। हर चीज को सीखने के लिए हमें हमेशा आगे बढ़कर विनम्र होकर तैयार रहना चाहिए। जब हम कोई कार्य सीखते हैं तो मन में सवाल जवाब तो रहते ही हैं लेकिन उन सवालों का जवाब ढूंढने का प्रयास हमें करना चाहिए। जब हम आत्मनिर्भर रहेंगे तो हमारे आने वाली पीढ़ी भी हमें देखकर प्रयास करेगी। जब हम आत्म निर्भर रहने की कोशिश करेंगे तभी हमारी आने वाली पीढ़ी हमें देखकर सीखने की कोशिश करेंगी।

हम जैसे भी हैं पहले स्वीकार करें  स्वयं को  नहीं तो  हम  मजबूत  और आत्मनिर्भर  नहीं बन सकते हैं। हर व्यक्ति एक जैसा नहीं होता या हम किसी के जैसे नहीं बन सकते हैं। हमारे पास कुछ भी करने का हुनर तो बहुत है लेकिन हम कुछ बहाने बनाकर उसको नकारते हैं। कोई भी नया कार्य करने का अगर सोचते हैं तो उसकी शुरुआत तो हमें ही करनी होगी लेकिन अगर हम कुछ करने से पहले ही  पीछे हट जाएंगे  तो हम  आगे कैसे बढ़ेंगे। हम कुछ  गलती करने के लिए ही तैयार नहीं होंगे तो उसमें सुधार कैसे करेंगे। स्वयं की गलती को भी स्वीकारना अपने आप में बहुत बड़ी बात है। दूसरों को कोसने की बजाय हमें पहले स्वयं में झांकना होगा और अपनी गलतियों को अपनाना और सुधार करना होगा।

 एक छोटे बच्चे को ही ले लीजिए वह भी अगर कुछ काम करना चाहे तो पहले तो वह खुद कोशिश करेगा फिर जब नहीं होगा उससे तो वह बड़ों से मदद लेगा। वैसे ही हम लोगों को भी प्रयास करते रहना चाहिए और लोग क्या कहेंगे इस बारे में नहीं सोचना है लोग तो हमेशा दोनों तरफ से बोलेंगे अगर हम सफलता पाते हैं तो भी बोलेंगे और नहीं पाते हैं तो भी बोलेंगे इसीलिए स्वयं पर निर्भर होना सीखिए धन्यवाद।

कविता देवडा, द फैबइंडिया स्कूल <kda@fabindiaschools.in>

Wednesday, June 24, 2020

स्वतंत्रता और शान्ति: उषा पंवार

देश की आजादी से ही देश के हर नागरिक के आजादी जुड़ी है। आजादी का अर्थ मनमानी करने की छूट नहीं है बल्कि इसका अर्थ है कि नियम-कायदों की सीमा में रहते हुए व्यक्ति सही ढंग से अपने कर्तव्यों की पालना करें, अपनी सीमा में रहे और दूसरों को कष्ट ना हो। 8 से 9 साल के बाद बच्चों को आजादी देनी चाहिए कि वह अपने बारे में छोटे-छोटे निर्णय ले सके, जैसे कि उन्हें खेल खेलने जाना है, क्या पहनना है, कितनी देर पढ़ाई करनी है या कितनी देर टीवी देखना है। यानी इस उम्र से ही उन पर कुछ जिम्मेदारी डालनी चाहिए क्योंकि एक बार युवावस्था में पहुँचने के बाद तो वह वैसे भी मनमानी करते हैं।

बड़ों को बच्चों की उम्र के अनुसार उनपर विश्वास करना चाहिए। कुछ बातों का निर्णय उन पर छोड़ देना चाहिए। माता पिता को अपनी पसंद थोपनी नहीं चाहिए बल्कि उसे निर्णय लेने में मदद करनी चाहिए। ऐसे में उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और ज्यादा आत्मनिर्भर बनेंगे। बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनकी बात को ध्यान से सुनना चाहिए। बच्चे को आगे क्या करना है, इसका निर्णय अभिभावक को नहीं बल्कि बच्चों को ही करना चाहिए, 12वीं के बाद बच्चे इतने सयाने हो जाते हैं कि वे अपना कैरियर खुद चुन सकते हैं। बच्चों को उस समय मार्गदर्शन व सहयोग की आवश्यकता होती है जब वह अपनी पसंद की पढ़ाई करेंगे तो बेहतर परिणाम मिलेगा।

बच्चे मन के सच्चे होते हैं, इनका मन कोरे कागज की तरह होता है। बच्चों को बोलने की, खेलने की, पढ़ने की पूरी आजादी दे दो, बच्चों में निश्चित रूप से विकास होगा। बच्चों को खेल खेल में शिक्षित, गुणवान बनाकर उनका सर्वांगीण विकास कर सकते हैं। हमें बच्चों की भावनाओं का भी ध्यान रखना रखना चाहिए। छोटा बच्चा समझकर उनके निर्णय को टालना नहीं चाहिए। माता-पिता व शिक्षकों को बच्चों की रूचि का ख्याल रखना चाहिए। माता पिता को बच्चों पर पूरा भरोसा विश्वास करते हुए, उन्हें आजादी के साथ जिम्मेदारी का एहसास दिलाना चाहिए। जिन बच्चों पर ज्यादा प्रतिबंध लगाए जाते हैं वही चोरी-छिपे आजादी का गलत इस्तेमाल करते हैं।

बच्चे की वास्तविक प्रतिभा पहचानने और निखारने की शिक्षा का उद्देश्य आजादी देना जरूरी है। माता पिता और अध्यापक को ध्यान रखना है कि बच्चे को बड़े होकर जो बनना है उसमें उसकी मदद की जाए।

खुशहाल जीवन के लिए जहाँ शांति है वहाँ विकास है, जहाँ विकास है वहाँ सुख है। मन जब स्थिर हो जाता है तो उस स्थिति को शांति कहते हैं । शांति मधुरता और भाईचारे की अवस्था है जिसमें कोई लड़ाई झगड़े, बैर भाव नहीं होते। शांति का अर्थ यह भी नहीं है कि केवल मुँह से चुप रहना बल्कि मन का चुप रहना ही सच्ची सुख शांति है कहते हैं कि जहाँ शांति है वहाँ सुख है। मनुष्य के पास धन दौलत, वैभव और सुख साधन है परंतु शांति नहीं है तो कुछ भी नहीं है यह सब कुछ खरीदे जा सकते हैं लेकिन शांति खरीद नहीं सकते हैं।
Usha Panwar
The Fabindia School, Bali
upr4fab@gmail.com

स्वतंत्रता एवं शांति: आयशा टॉक


स्वतंत्रता एक ऐसी स्थिति है, जिसमें लोगों को बाहरी प्रतिबंधों के बिना बोलने, कार्य करने और अपने सुख को प्राप्त करने का अवसर मिलता है। स्वतंत्रता हमारे लिए महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि उससे हमें अपने नए विचार, रचनात्मक कौशल उत्पादन और जीवन की उत्कृष्टता को बढ़ाने का अवसर मिलता है। स्वतंत्रता व्यक्ति को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाती है।

कोई भी व्यक्ति जो स्वतंत्र रूप से सोचेगा, तो उसकी सोच उत्कृष्ट होगी। वह कभी भी अपना एवं दूसरों का अहित नहीं करेगा। छात्रों को स्वतंत्र सीखने के लिए प्रोत्साहित करना, न केवल उनके लिए बहुत बड़ा लाभ है, बल्कि यह प्रगति को बेहतर बनाने के लिए उच्च प्रभाव कम लागत वाला तरीका भी है। 

इसी तरह विद्यार्थियों के लिए स्वतंत्रता बहुत आवश्यक हैं। क्योंकि यह रचनात्मकता और बौद्धिक जिज्ञासा का विकास करती है। स्वतंत्र शिक्षा निष्क्रिय होने के बजाय विद्यार्थियों के सक्रिय होने में सहायक साबित होती है। 

हमारे जीवन में शांति की बहुत आवश्यकता है, यह सचेत मानव मन की नींव है। हमारे जीवन में शांति एक सच्चा एवं महत्त्वपूर्ण सुख है। शांति हमें मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने में सहायक होती है। किसी भी विषय पर हम शांतिपूर्वक ढंग से बेहतर फैसला ले सकते है। शांत मन से सोच-समझ कर किया गया कार्य हमेशा सही होता है।

कठिन परिस्थितियों में हमें एकदम से असहज नहीं होना चाहिए, बल्कि शांतिपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। शांति शिक्षा मूल्यों, ज्ञान और विकास को प्राप्त करने की प्रक्रिया हैं। शांति, शिक्षण गतिविधियों, ज्ञान, कौशल एवं दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है, जो लोगों को संघर्ष की घटनाओं को रोकने, शांति से संघर्ष को हल करने या शांति के लिए अनुकूल सामाजिक परिस्थितियों का निर्माण करने में मदद करेगी। 
Ayasha Tak
The Fabindia School, Bali.

Monday, May 25, 2020

सादगी और विश्वास: कुसुम डाँगी


सरलता का अर्थ, सरल होने की अवस्था गुण या भाव, सरल शब्दों में कहें तो किसी को भी आसानी से समझना और सत्यता की समझ रखना ही विश्वास है। विश्वास और मन को स्थिर करने की विधि है - ईमानदारी और सच्चाई। जो इंसान जितना सरल और सादा होता  है।उस पर आसानी से विश्वास किया जा सकता है, क्योंकि सरल व्यक्ति अपने जीवन से अनुपयोगी और निरर्थक विचार बाहर निकाल लेता  है । सार्थक और उपयोगी गुण  अपने जीवन में अपना लेता है। जीवन में सादगी लाना और तुच्छ विचारों को हृदय से दूर कर देना, अपने आप में महान गुण है। व्यक्ति का जीवन जितना सादा और सरल होता है, उतना ही वह विनयशील, शिष्ट तथा आत्मनिर्भर होता है।

शिक्षक का स्वभाव जितना सादा होता है, छात्र उन्हें उतना ही महत्व देते हैं। क्योंकि वो अपनी कोई भी समस्या बिना किसी झिझक के उनके साथ बाँट सकते  हैं । जिससे शिक्षक उनकी  समस्याओं का समाधान  कर  सकते हैं। इससे उनके बीच का  रिश्ता बेहतर और मजबूत बनता है । छात्रों को अधिक से अधिक जिम्मेदारी देने और उन पर विश्वास करने से, वे अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीकों  से  निभाते  हैं।

इससे वे आत्मविश्वासी बनते हैं और कठिन से कठिन जिम्मेदारी लेने में आगे आते है जिससे उनमें  ईमानदारी, धैर्य और सच्चाई आदि गुण विकसित होते हैं । धैर्य वो गुण है जो इंसान को कभी असफल नहीं होने देता थोड़ा समय जरूर लगता है लेकिन सफलता जरूर मिलती  है । इससे निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि सरलता और विश्वास आपस में जुड़े हुए है क्योंकि जो सरल और ईमानदार होगा उस पर विश्वास आसानी से किया  जा सकता  है ।

" किसी का सरल स्वभाव उसकी कमज़ोरी नहीं बल्कि उसकी ताकत होता है । "
Kusum Dangi
The Fabindia School, Bali

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