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Wednesday, June 24, 2020

स्वतंत्रता एवं शांति: आयशा टॉक


स्वतंत्रता एक ऐसी स्थिति है, जिसमें लोगों को बाहरी प्रतिबंधों के बिना बोलने, कार्य करने और अपने सुख को प्राप्त करने का अवसर मिलता है। स्वतंत्रता हमारे लिए महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि उससे हमें अपने नए विचार, रचनात्मक कौशल उत्पादन और जीवन की उत्कृष्टता को बढ़ाने का अवसर मिलता है। स्वतंत्रता व्यक्ति को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाती है।

कोई भी व्यक्ति जो स्वतंत्र रूप से सोचेगा, तो उसकी सोच उत्कृष्ट होगी। वह कभी भी अपना एवं दूसरों का अहित नहीं करेगा। छात्रों को स्वतंत्र सीखने के लिए प्रोत्साहित करना, न केवल उनके लिए बहुत बड़ा लाभ है, बल्कि यह प्रगति को बेहतर बनाने के लिए उच्च प्रभाव कम लागत वाला तरीका भी है। 

इसी तरह विद्यार्थियों के लिए स्वतंत्रता बहुत आवश्यक हैं। क्योंकि यह रचनात्मकता और बौद्धिक जिज्ञासा का विकास करती है। स्वतंत्र शिक्षा निष्क्रिय होने के बजाय विद्यार्थियों के सक्रिय होने में सहायक साबित होती है। 

हमारे जीवन में शांति की बहुत आवश्यकता है, यह सचेत मानव मन की नींव है। हमारे जीवन में शांति एक सच्चा एवं महत्त्वपूर्ण सुख है। शांति हमें मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने में सहायक होती है। किसी भी विषय पर हम शांतिपूर्वक ढंग से बेहतर फैसला ले सकते है। शांत मन से सोच-समझ कर किया गया कार्य हमेशा सही होता है।

कठिन परिस्थितियों में हमें एकदम से असहज नहीं होना चाहिए, बल्कि शांतिपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। शांति शिक्षा मूल्यों, ज्ञान और विकास को प्राप्त करने की प्रक्रिया हैं। शांति, शिक्षण गतिविधियों, ज्ञान, कौशल एवं दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है, जो लोगों को संघर्ष की घटनाओं को रोकने, शांति से संघर्ष को हल करने या शांति के लिए अनुकूल सामाजिक परिस्थितियों का निर्माण करने में मदद करेगी। 
Ayasha Tak
The Fabindia School, Bali.

Thursday, December 5, 2019

उषा पंवार: खेल - एक जीवन

           
ना हारना जरूरी है ना जीतना जरूरी है,
ये ज़िन्दगी एक खेल है खेलना जरूरी है।।

खेल-खेल में बच्चे बहुत कुछ सीख जाते हैं। खेल- खेल में भाषा का विकास भी होता हैं। खेल ऐसे होने चाहिए जिससे बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक दोनों ही विकास हो। खेल से जीवन में एक नया जोश, उत्साह, उमंग पैदा होते हैं। अध्यापक और अभिभावक बच्चों के साथ बच्चा बनकर ही खेलना चाहिए जिससे खेल में जिज्ञासा बढ़े और खुशी मिले। विद्यार्थी पढ़ाई के साथ खेलों को बराबर का महत्व देने से प्राय: कुशाग्र बुद्धि के होते हैं।

                    खेल अधिकतर काल्पनिक भी खेले जाने चाहिए जिससे बच्चों का बौद्धिक विकास होता हैं और समस्या का समाधान करने की क्षमता बढ़ती हैं जैसे कोई बच्चा नाटक में डॉक्टर की भूमिका निभा रहा है तो वह अपने आप में कल्पना करता है कि वह सबसे अच्छा डॉक्टर है इससे नए-नए शब्दों का प्रयोग करते हैं और सोचने की शक्ति बढ़ती हैं।

                  विद्यालय में बच्चों को ऐसी गतिविधियाँ करवानी चाहिए जिससे एक दूसरे के साथ मिलकर कार्य करना और उनमें ऐसी प्रतिभा और संस्कारों का विकास हो जिसके द्वारा बच्चें जिम्मेदारी एवं आदर करना सीखे। खेल नाटकीय रूप से भी खेला जाना चाहिए जिससे बच्चे नि:संकोच, बेझिझक बोलना एवं भाग लेना सीखे। प्रत्येक विद्यार्थी पढ़ाई के दौरान खुद को ज्यादा समय तक पढाई से नहीं जोड़ पाता है और किताबी कीड़ा बना रहता है जिससे विद्यार्थी नीरस, उबाऊपन, थकान, तनाव महसूस करते हैं अतः इन सब को दूर करने के लिए खेलों से जुड़े रहना जरूरी है।

                 मनोरंजन का मुख्य साधन शारीरिक व मानसिक गतिविधियों से संबन्धित खेल या नाटक ही प्रमुख हैं जैसे पुस्तक के पाठ को समझाने के लिए विद्यार्थियों को पात्र बनाकर नाटक के जरिए खेल करवा सकते हैं जिससे बच्चे आगे आकर बोलना सीखते हैं।

               खेलों के द्वारा बच्चा अपने आप को परिवार में, विद्यालय में, समूह में, समाज में किस परिस्थिति में किस प्रकार से अपने आप को प्रस्तुत करना है यह सीख जाता है इसी वजह से उसकी एक अलग ही छवि बन जाती हैं और समाज में उसका अलग ही व्यक्तित्व तय हो जाता हैं जिस कारण लोग उससे मदद प्राप्त करना चाहते हैं। जैसे खेल में हार-जीत होती है अलग अलग परिस्थितियाँ होती हैं उसी प्रकार जब उसके जीवन में इस तरह की दुविधाएँ आती हैं उतार-चढ़ाव आते हैं सुख-दुःख आते हैं तो वह अपने आप को आसानी से उस परिस्थिति से बचा सकता हैं या उसका समाधान कर सकता है। इसका हमारे सामने उदाहरण के तौर पर बहुत से खिलाड़ी हैं जो एक छोटे से शुरू होकर बड़े खिलाड़ियों के रूप में प्रकट होते हैं।

ज़िन्दगी खेलती भी उसी के साथ है जो खिलाड़ी बेहतरीन होता है,
दर्द सबके एक से है मगर हौसले सबके अलग अलग है,
कोई हताश होकर बिखर जाता है तो कोई संघर्ष करके निखर जाता हैं।।
Usha Panwar
The Fabindia School
upr4fab@gmail.com

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