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Wednesday, July 20, 2022

सरलता और विश्वास - ज्योति तड़ियाल

सरलता
भूमिका मनुष्य को अपना व्यवहार इतना सरल रखना चाहिए कि जरूरत के समय वह सबकी पहुंच में हो। 

एक अध्यापिका के रूप में व्यवहार की सरलता उतनी ही आवश्यक है जितनी श्यामपट्ट के लिए चाक। विद्यार्थी तभी बिना किसी भय व झिझक के अपनी समस्या साझा करे पाते हैं। उनके मन में यह दुविधा नहीं रहती कहें या ना कहें।

व्यवहार की सरलता व सादगी का ज्वलंत उदाहरण रहे हैं राष्ट्रपति अब्दुल कलाम। उनसे बातें करना अपनत्व का अनुभव कराता था। यही अपनत्व विद्यार्थी शिक्षक अनुभव करे तो ही अध्यापन काल सार्थक व सफल है।

विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया

जब कक्षा कक्ष में सरलता का व्यवहार किया गया, सादगी को अपनाया गया तो निश्चित रूप से सकारात्मक परिवर्तन दृष्टिगत हुआ। वे विद्यार्थी जो मुखर थे उनसे घनिष्ठता बढ़ी, साथ ही वह विद्यार्थी जो अंतिम पंक्ति पर बैठा था अपनी बात व विचार रख पाया। व्यवहार की सरलता का प्रभाव दूरगामी होता है और कब यह किसके मन को कितना प्रभावित कर देती है यह कहना सरल तो नहीं है परंतु निश्चित ही इसके परिणाम सकारात्मक मिलते हैं।

विश्वास

विश्वास पर ही दुनिया कायम है। विश्वास की नींव पर ही सफलता का भवन  खड़ा है। इस विश्वास की शुरुआत परिवार से होती है, जहां माता पिता व बच्चे इस विश्वास की बेल को पोषित करते हैं और फिर इस विश्वास की परिणीति उस वट वृक्ष के रूप में होती है जिसे हम समाज के रूप में देखते हैं, घनिष्ट मित्रता के रूप में देखते हैं।

विश्वास की कसौटी पर विद्यार्थी

मुझे विश्वास है कि मेरे विद्यार्थी उस ज्ञान को ग्रहण कर रहे हैं जो मैं उन्हें दे रही हूं। उस कला को सीख रहे हैं जो मैं उन्हें सिखाना चाहती हूं।

यही विश्वास होता है जब किसी प्रतियोगिता के लिए हम प्रतिभागियों का चयन करते हैं। यह हमारा विश्वास होता है कि चयनित प्रतिभागी श्रेष्ठ है, और इस विश्वास पर खरा उतरने के लिए वह भी जी जान से जुट जाता है। और जब वह सफल होता है तो निःसंदेह उस विश्वास की जीत होती है जो दोनों का एक दूसरी पर  था।

विश्वास की इसी जीत पर राष्ट्रकवि की कुछ पंक्तियां लिखना चाहूंगी

सौ सौ निराशाए रहें, विश्वास यह दृढ़ मूल है,

इस आत्मलीला भूमि के, वह विभु न सकता भूल है।

अनुकूल अवसर पर दयामय, फिर दया दिखलाएंगे,

वे दिन यहां फिर आयेंगे, फिर आयेंगे, फिर आयेंगे।

( कविता हमारी सभ्यता और कवि मैथिलीशरण गुप्त)


प्रेषक ज्योति तड़ियाल
विद्यालय द दून गर्ल्स स्कूल  JOL परियोजना ४ सरलता और विश्वास LFIN 2022 के हैप्पी टीचर्स प्रोग्राम


Monday, February 15, 2021

चरित्र का महत्व - राजेश्वरी राठौड़

चरित्र से ही मनुष्य का जीवन गौरवपूर्ण बनता है, धन, पदवी , आदि से नहीं ।समाज में महत्व और सम्मान जितना सदाचारी व्यक्ति का होता है, उतना धनाढ्य तथा ऊंचे पद वाले व्यक्ति का भी नहीं होता है।धनवान के यश से सबको ईर्ष्या होती है, इसी प्रकार धन, विद्या या योग्यता वाले में अभिमान होता है परंतु शुद्ध चरित्र वाले से न तो    कोई ईर्ष्या करता है और न उसका मन और अशुद्ध होता है। 

चरित्र के कई अंग है जैसे सत्य पर अटूट विश्वास, शांत आदि। जो व्यक्ति अपने सिद्धांतों पर दृढ़ होता है, उसी का चरित्र शुद्ध होता है। सरल हृदय व्यक्ति में विश्वास, प्रेम, दया ,कोमलता तथा स्वानुभूति के भाव स्वयं ही उत्पन्न हो जाते हैं। इनमें से एक भी गुण पूरी तरह आ जाए, तो व्यक्ति शिष्ट कहलाने लगता हैं। अच्छे चरित्र वाला व्यक्ति डरता नहीं है, निराश नहीं होता। है। पवित्र चरित्र के प्रधान अंग है छल कपट ना होना, लेन -देन में सफाई, वचन पालन,  दया -भाव, परिश्रम पर विश्वास ,अभिमान का अभाव जिस के चरित्र में उक्त सभी गुण विद्यमान हो, वह सज्जन व्यक्ति की श्रेणी में आता है।

राजेश्वरी राठौड़
The Fabindia School
rre@fabindiaschools.in

Sunday, August 30, 2020

किशोरावस्था में बच्चों को समझाना और समझना - Kusum Dangi

किशोरावस्था  का  अर्थ हैं  बढ़ना  या  विकसित होना  इस अवस्था में अनेक परिवर्तन होते हैं जैसे - शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक इस  समय  में  अधिक  बदलाव  के कारण  बच्चों को  अनेक कठिनाइयों  का सामना  करना पड़ता  हैं। वे अचानक  से हूए  वह शारीरिक परिवर्तन   को अनुभव तो कर सकते हैं परंतु समझ नहीं पाते हैं वह इन  परिवर्तनों के विषय में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं इसके लिए या तो  सहकर्मी   आयु  की मदद लेते  है  या गुमराह करने वाले साहित्य पर निर्भर हो जाते हैं।  गलत  जानकारी  मिलने  से वे और भी  परेशान हो जाते हैं  इससे उनके मानसिक और शारिरिक  विकास पर बहुत प्रभाव पड़ता हैं।  

इस दौरान परिवार की अहम  भूमिका होती है क्योंकि   इस समय  जरूरत होती हैं  उन्हें समझने की जैसे-जैसे  वे इस अवस्था  में प्रवेश करते हैं वे अपनी पहचान बनाना चाहते हैं इसलिए उनको अपने स्वयं के    निर्णय लेने  और अपने स्वयं के कार्य की जिम्मेदारी लेने के अवसरों को प्रदान करने  की जरूरत हैं  अगर वह कोई गलती करे  तो उनको समझाएं और  सही करने में सहयोग करें इस अवस्था में उनको समझाना बहुत आवश्यक हैं  इसके लिए माता -पिता को  पहले उनके अच्छे दोस्त बनने की आवश्यकता हैं  क्योंकि  इस दौरान उनको कोई समस्या आती हैं तो वे इस बारे में आपसे  बात करेंगे  उनके ऊपर विश्वास करे तथा उनको  जिम्मेदार बनाए इसके लिए उन्हें कोई भी जरूरी कार्य दे और करने के लिए कहे सबसे आवश्यक है वह कुछ भी बात करें या करें तो उन पर विश्वास करें।

Kusum Dangi
The Fabindia Schools
kdi@fabinndiaschools.in

Monday, August 3, 2020

विश्वास - जफ्फर खां

विश्वास एक छोटा सा शब्द है | उसको पढ़ने में एक सेकेंड लगता है सोचो तो एक मिनट लगता है समझो तो दिन लगता है पर साबित करने
में तो जिंदगी लगती है - जैसे कि आज वाली स्थिति कोरोना महामारी के कारण सभी लोगों का विश्वास टूटता जा रहा है तथा एक दूसरे से लोग मिल नहीं पा रहे हैं, दूरी बढ़ गई हैं ,घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं | किसी भी वस्तु को छूने से ही लोगों को अत्यधिक  समस्याओं का सामना करना पड़ रहा  हैं | हमारे बाली शहर में बाहर से आए हुए मनुष्यों की कोरोना पॉजिटिव की रिपोर्ट के आंकड़ों के कारण व्यक्तियों के मन एक डर बैठ गया है  | उन गली मोहल्ले को भी बंद किया गया है जहाँ कोरोना पोजिटिव लोग मिले हैं तथा पुलिस का पहरा भी लगाया गया हैं जिससे  लोगो में भय बढे  नहीं | 

लोग दुकानो पर बनी चीजों को नही खरीद रहे हैं | हमे इस समस्या का सामना पूरे विश्वास और सहयोग से करना चाहिए | जब कोई मुश्किल आती है तो उस मुश्किल का हल भी निकल सकता है | हमें किसी भी मुसीबत में घबराना व डरना नही चाहिए  क्योंकि हम लोग जब घबरा जाते हैं तो हमारा असर हमारे बच्चों के ऊपर पर पड़ता है और बच्चे हमसे ज्यादा घबरा जाते हैं | ऐसी  स्थिति में हमें विश्वास और हिम्मत से कार्य करना चाहिए | पहले भी लोग कई बीमारियों से ठीक हुए हैं  तो  यह कोरोना की बीमारी थोडा समय लेगी लेकिन हमें  विश्वास रखना होगा कि इस बीमारी का  समाधान निश्चित निकलने वाला है तथा सभी पहले जैसे होने वाला है| हमे अपने आप पर विश्वास रखना चाहिए  कि हम सभी पहले जैसे मिल जुलकर साथ रहेंगे और दुख-सुख में अपने पड़ोसियों की मदद  करते रहेंगे बुजुर्गों की देखभाल करते रहेंगे |

 हमारे अंदर विश्वास हैं तो हम भविष्य में बड़ी से बड़ी कठिनाइयों का सामना कर सकते है | अपने अंदर आत्मविश्वास की बढ़ोतरी करना और सरकार द्वारा बताए गए नियमों का पालन करते हुए अपने आप को सुरक्षित रखना है और अपनी गली मोहल्ले में लोगों की मदद करनी है | उनको कोरोना से बचने के उपाय भी बताने होंगे क्योंकि जो व्यक्ति अनपढ़ है उनको उपायों के बारे में पता नही है उन्हें बताना  होगा कि कोरोना से बचने के लिए मुँह पे माक्स बांधे और अपने हाथों को बार-बार साबुन से धोए  तथा दूसरे लोगो से मिलते समय एक मीटर की दूरी  बनाए रखनी चाहिए | अपनी सोच को सकारात्मक बनाए रखना चाहिए जिससे हमारा आत्मविश्वास मजबूत हो सके |

जफ्फर खां 
The Fabindia School
zkn@fabindiaschools.in

Monday, May 25, 2020

सरलता एवं विश्वास: आयशा टॉक


सादगी एक महान गुण है, जिसे हर कोई जीवन में पालन कर सकता है। हमें सादा जीवन उच्च विचार में विश्वास रखना चाहिए। हमारे पास एक साधारण जीवन - शैली होनी चाहिए। हमें फैशन के पीछे नहीं भागना चाहिए। हमें अपने साधनों से अधिक खर्च नहीं करना चाहिए। हमें अपने भाषण अर्थात बोली में शिष्टाचार एवं सादगी का पालन करना चाहिए। हमें अपनी बात में मीठा एवं विनम्र होना चाहिए। हमें घमंड नहीं करना चाहिए, न ही हमें अपनी कड़वी बातों से किसी का दिल दुखाना चाहिए। हमें किसी भी परिस्थिति में अपना आपा अर्थात मानसिक संतुलन नहीं खोना चाहिए। हमें अगर किसी को कुछ कहना होता है, तो हम अपनी बात को बहुत ही सरल लहजे से कह सकते है। सरलता कभी किसी को दुखी नहीं करती है, बल्कि सरलता किसी व्यक्ति के दिल में आपके लिए सम्मान एवं विश्वास पैदा करती है। 

 विश्वास एक बहुत छोटा - सा  शब्द लगता है, लेकिन इसके मायने बहुत बड़े एवं गहरे होते हैं। विश्वास ही जीवन का आधार है। विश्वास पर दुनिया टिकी हुई है। जिंदगी में किसी पर विश्वास करना एवं किसी का विश्वास जीतना बहुत जरूरी होता है। विश्वास एक बहुत ही अमूल्य भावना है, जिसका कोई मोल नहीं होता है। यदि जीवन में आप पर किसी ने विश्वास कर लिया एवं आपने किसी का विश्वास जीत लिया तो आप बहुत ही भाग्यशाली व्यक्ति है। विश्वास हर रिश्ते में बहुत जरूरी होता है। यह जरूरी नहीं है कि हर बार हम किसी पर या कोई हम पर एकदम से विश्वास कर लें। विश्वास की राह कठिन जरूर है, परन्तु फिर भी हम उसे पा जरूर सकते है, वह नामुमकिन नहीं है। हो सकता है, अगले को हम पर विश्वास करने में कुछ ज्यादा वक्त लग जाए। 

परन्तु बालकों का मन बहुत कोमल होता हैं, वे आसानी से अपने रिश्तेदारों, मित्रों एवं अध्यापकों पर विश्वास कर लेते हैं। इसके लिए उन्हें सिर्फ प्यार, अपनत्व एवं सादगी भरे व्यवहार की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए जैसे - एक छोटा बच्चा जब चलना सीखता है, जब वह डगमगाने लगता है तो अपने परिवार के किसी बड़े व्यक्ति का हाथ थाम लेता है। ठीक ऐसे ही जब कोई बच्चा पहली बार विद्यालय में आता है तो वह बहुत रोता है, परन्तु जब उसके अध्यापक उसकी भावनाओं को पूरी तरह से समझने लग जाते है। वे उसके सामने सरलता और प्यार से पेश आने लगते है तो वह बच्चा रोना बंद कर देता है एवं अपने अध्यापक पर पूर्ण  विश्वास करने लगता  है एवं अपनी हर बात उनके साथ में बाँटने लगता है। फिर तो वह अपनी हर परेशानी को अपने रिश्तेदारों से ज्यादा अपने अध्यापक पर भरोसा करके उन्हें बता सकता है। 
Aysha Tak
The Fabindia School, Bali

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