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Sunday, August 30, 2020

किशोरावस्था में बच्चों को समझाना और समझना - Kusum Dangi

किशोरावस्था  का  अर्थ हैं  बढ़ना  या  विकसित होना  इस अवस्था में अनेक परिवर्तन होते हैं जैसे - शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक इस  समय  में  अधिक  बदलाव  के कारण  बच्चों को  अनेक कठिनाइयों  का सामना  करना पड़ता  हैं। वे अचानक  से हूए  वह शारीरिक परिवर्तन   को अनुभव तो कर सकते हैं परंतु समझ नहीं पाते हैं वह इन  परिवर्तनों के विषय में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं इसके लिए या तो  सहकर्मी   आयु  की मदद लेते  है  या गुमराह करने वाले साहित्य पर निर्भर हो जाते हैं।  गलत  जानकारी  मिलने  से वे और भी  परेशान हो जाते हैं  इससे उनके मानसिक और शारिरिक  विकास पर बहुत प्रभाव पड़ता हैं।  

इस दौरान परिवार की अहम  भूमिका होती है क्योंकि   इस समय  जरूरत होती हैं  उन्हें समझने की जैसे-जैसे  वे इस अवस्था  में प्रवेश करते हैं वे अपनी पहचान बनाना चाहते हैं इसलिए उनको अपने स्वयं के    निर्णय लेने  और अपने स्वयं के कार्य की जिम्मेदारी लेने के अवसरों को प्रदान करने  की जरूरत हैं  अगर वह कोई गलती करे  तो उनको समझाएं और  सही करने में सहयोग करें इस अवस्था में उनको समझाना बहुत आवश्यक हैं  इसके लिए माता -पिता को  पहले उनके अच्छे दोस्त बनने की आवश्यकता हैं  क्योंकि  इस दौरान उनको कोई समस्या आती हैं तो वे इस बारे में आपसे  बात करेंगे  उनके ऊपर विश्वास करे तथा उनको  जिम्मेदार बनाए इसके लिए उन्हें कोई भी जरूरी कार्य दे और करने के लिए कहे सबसे आवश्यक है वह कुछ भी बात करें या करें तो उन पर विश्वास करें।

Kusum Dangi
The Fabindia Schools
kdi@fabinndiaschools.in

Sunday, May 10, 2020

जीवन में अवसर का महत्त्व - आयशा टाक

अवसर एक उपयुक्त या अनुकूल समय है , जो लगभग सभी के जीवन में आता है। यदि कोई इसे सकारात्मक रूप में लेता है तो सफलता प्राप्त करता है। यदि हम इस अनुकूल समय की गहराई में जाते हैं , तो हम पाते हैं कि ईश्वर हमें अपने जीवन में लगभग हर दिन एक अवसर प्रदान करता है , इस अवसर को प्राप्त करना और इसका उपयोग करना हमारे ऊपर निर्भर करता है। किसी व्यक्ति के जीवन में बहुत सारे अवसर आते हैं ,लेकिन वह अनदेखा करता है या उन्हें बहुत कम महत्त्व देता है ,कभी अनजाने में और कभी जानबूझकर। परिणाम यह होता है कि वह जीवन भर पीड़ित होता है या  पश्चाताप करता है। उदाहरण के लिए ये कहानी पढ़िए
शीर्षक - अवसर की पहचान
एक बार एक व्यक्ति चित्रों की दुकान पर गया। वहाँ पर उसने बहुत ही अजीब से चित्र देखें। पहले  चित्र में  चेहरा पूरी तरह बालों से ढ़का हुआ था और पैरों में पंख लगे हुए थे। दूसरे चित्र में एक व्यक्ति का सिर पीछे से  पूरा गंजा था। ग्राहक ने पूछा - यह पहला वाला चित्र किसका है ? दुकानदार ने बोला - यह चित्र अवसर का है। ग्राहक ने पूछा - इसका चेहरा बालों से ढ़का हुआ क्यों है ? दुकानदार बोला - क्योंकि जब अवसर आता है , तो मनुष्य उसे पहचानता नहीं है। ग्राहक ने पूछा और इसके पैरों में पंख क्यों हैं ? दुकानदार बोला - वह इसलिए क्योंकि अगर इसका सही समय पर उपयोग हो तो यह जल्दी से उड़ जाता है। फिर ग्राहक ने पूछा - यह दूसरा वाला चित्र किसका है ? दुकानदार ने कहा - यह भी अवसर का ही है। यदि अवसर को सामने से ही बालों से पकड़ लोगे तो वह आपका  है।  अगर आपने थोड़ी देर बाद में पकड़ने की कोशिश की तो उसके सिर के पीछे वाला गांजा हिस्सा हाथ में आएगा जो फिसलकर निकल जाएगा। वह ग्राहक इन चित्रों के रहस्य जानकर हैरान था , वह  समझ गया था कि अवसर तो हमें मिलता रहता है , परन्तु हमारी लापरवाही की वजह से हमारे हाथ से निकल जाता है। 

अक्सर हम लोगों को यह शिकायत रहती है कि हमें अवसर ही  नहीं मिला , परन्तु ये अपनी जिम्मेदारी से भागने और अपनी गलती को छुपाने का बस एक बहाना है। अवसर हमारे सामने से आते - जाते रहते हैं , पर हम उन्हें पहचान नहीं पाते या पहचानने में देर कर देते  हैं। कई बार हम सिर्फ इसलिए चूक जाते हैं , क्योंकि हम बड़े अवसर की ताक में रहते हैं। पर अवसर बड़ा या छोटा नहीं होता है। हमें अवसर का भरपूर उपयोग करना चाहिए। 

आयशा टाक 
The Fabindia School  

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