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Monday, July 5, 2021

रूचि के अनुसार व्यवसाय: कृष्ण गोपाल दवे

वर्तमान समय में व्यवसायों की कोई कमी नहीं, जब बच्चा इस जगह पर आता है तब उसके सामने जीविकोपार्जन के लिए किए जाने वाले व्यवसायों की भरमार रहती है। ऐसी परिस्थिति में उसका भ्रमित हो जाना भी स्वाभाविक है। व्यवसाय का चुनाव करने में वह धन को महत्व दे सकता है। जैसा कि आज माना जाता है कि वही व्यक्ति सफल है जिसके पास जीवन गुजारने के लिए अच्छा खासा धन है।

किंतु इन सब के विपरीत हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि व्यवसाय के चयन में भी हमारी रुचि महत्वपूर्ण है। जब हम कोई काम रुचि को ध्यान में रखते हुए चुनेंगे तो वह हमारे लिए बड़ा लाभकारी सिद्ध हो सकता है। क्योंकि रुचि से किया गया काम प्रगति की तरफ ले जाता है। जिस व्यवसाय में रुचि होगी वहाँ पर प्रगति भी होगी। हम अपने व्यवसाय में नए नए आयाम जोड़ते जाएँगे। यही एक महत्वपूर्ण बात है कि हम कभी अपने व्यवसाय से ऊबेंगे नहीं, सतत निरंतर प्रयास करते जाएँगे और जीवन के हर पड़ाव पर उतना ही जोश रहेगा। 


यदि व्यवसाय के चयन में केवल धन को महत्व दिया गया है तो हो सकता है एक निश्चित समय के पश्चात हम उस काम से ऊब जाएँगे। हमारी दिलचस्पी कम होती जाएगी। वह समय ऐसा होगा जब हम अपना व्यवसाय नहीं बदल सकेंगे, ऐसी परिस्थिति में पश्चाताप के सिवाय कुछ हाथ नहीं आएगा।


निश्चित रूप से धन का महत्व है। जीवन में पैसा होना भी आवश्यक है किंतु धन और रुचि दोनों को मिलाकर यदि व्यवसाय का चुनाव करें तो सफलता अवश्य मिलेगी। 


एक समय था जब पढ़ाई पूरी करने के बाद व्यक्ति सोचता था कि उसे कौन सा पेशा अपनाना चाहिए। किंतु आज के समय में बच्चा माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करते हुए ही अपना व्यवसाय चुन लेता है। कई बार व्यवसाय चयन में माता पिता अपनी इच्छाएँ थौंप देते हैं, जो आगे चलकर बच्चे के लिए घातक हो सकती है इसलिए बच्चे को अपनी रुचि के अनुसार व्यवसाय चयन करने दे। साथ ही साथ व्यवसाय चुनने के लिए उसे पर्याप्त समय प्रदान करें। 


Krishan Gopal Dave 

The Fabindia School 

Sunday, June 7, 2020

विनम्रता और सराहना: कृष्ण गोपाल


विनम्रता एक अद्भुत मूल्य है। यदि हम विनम्र होंगे तो ऊँचाइयों पर अवश्य जाएँगे परन्तु ऊँचाई पर जाने के बाद भी विनम्रता को नहीं छोड़ा तो वहीं बने भी रहेंगे।  प्राणी मात्र के प्रति विनम्र बनना चाहिए।  धन और काया तो कुछ समय तक साथ देगी, विनम्र व्यक्ति को अमर बना देती है।  

विनम्रता अर्थात झुकना, पर झुकने का ये अर्थ नहीं है कि अधीनता स्वीकार कर ली।प्रकृति सभी के लिए विनम्र रहती हैं।  प्राणियों के कल्याण के लिए अपना सर्वस्व लुटाने को तैयार है।  मानव अपनी महत्वाकांक्षा को नहीं छोड़ता।  हमारा जीवन प्रकृति की ही देन है।  विनम्र व्यक्ति हमेशा सम्मान प्राप्त करता है।  विनम्रता के साथ संतोष की प्रवृत्ति का विकास होता है। सम्पूर्ण रूप से संपन्न व्यक्ति विनम्रता प्रकट करे तो प्रशंसनीय है। 

अपने से बड़ों के सामने झुकना विनम्रता है। गलती का पश्चाताप करना विनम्रता है। 
मनुष्य नैतिक मूल्यों का त्याग करते जा रहा हैं। मूल्यों के विनाश से जीवन का स्तर गिरता जा रहा है।  इसलिए ये आवश्यक हो जाता है कि हम आने वाली पीढ़ी में नैतिक मूल्यों का विकास करें। 

बालकों के काम की सराहना की जानी चाहिए। स्कूल में भी किसी काम के कुछ हिस्से को ही किया हो तो भी प्रशंसा करें या प्रोत्साहित करें।  कुछ बालक अंतर्मुखी होते हैं।  उन्हें प्रोत्साहित नहीं किया तो वे कभी भी आगे नहीं आएँगे। 
प्रोत्साहित करने से बच्चा काम को मनोयोग से करता है। अन्य बालकों के सामने सराहना करने पर प्रोत्साहन दोनों ओर होता है। अन्य बालक भी अपना स्थान बनाने के लिए प्रयत्न करेंगे। बच्चों का ही नहीं अपने मित्रों, सहयोगियों, पड़ोसियों की भी यथा समय सराहना की जानी चाहिए। प्रशंसा का उचित स्तर होना चाहिए।  अकारण, आवश्यकता से अधिक प्रशंसा न करें।  अपना काम निकालने के लिए प्रशंसा  न करें।  प्रशंसा का प्रयोग केवल प्रोत्साहन के लिए हो।
Krishan Gopal
The Fabindia School, Bali

Sunday, May 10, 2020

जीवन में अवसर का महत्त्व - आयशा टाक

अवसर एक उपयुक्त या अनुकूल समय है , जो लगभग सभी के जीवन में आता है। यदि कोई इसे सकारात्मक रूप में लेता है तो सफलता प्राप्त करता है। यदि हम इस अनुकूल समय की गहराई में जाते हैं , तो हम पाते हैं कि ईश्वर हमें अपने जीवन में लगभग हर दिन एक अवसर प्रदान करता है , इस अवसर को प्राप्त करना और इसका उपयोग करना हमारे ऊपर निर्भर करता है। किसी व्यक्ति के जीवन में बहुत सारे अवसर आते हैं ,लेकिन वह अनदेखा करता है या उन्हें बहुत कम महत्त्व देता है ,कभी अनजाने में और कभी जानबूझकर। परिणाम यह होता है कि वह जीवन भर पीड़ित होता है या  पश्चाताप करता है। उदाहरण के लिए ये कहानी पढ़िए : 
शीर्षक - अवसर की पहचान
एक बार एक व्यक्ति चित्रों की दुकान पर गया। वहाँ पर उसने बहुत ही अजीब से चित्र देखें। पहले  चित्र में  चेहरा पूरी तरह बालों से ढ़का हुआ था और पैरों में पंख लगे हुए थे। दूसरे चित्र में एक व्यक्ति का सिर पीछे से  पूरा गंजा था। ग्राहक ने पूछा - यह पहला वाला चित्र किसका है ? दुकानदार ने बोला - यह चित्र अवसर का है। ग्राहक ने पूछा - इसका चेहरा बालों से ढ़का हुआ क्यों है ? दुकानदार बोला - क्योंकि जब अवसर आता है , तो मनुष्य उसे पहचानता नहीं है। ग्राहक ने पूछा और इसके पैरों में पंख क्यों हैं ? दुकानदार बोला - वह इसलिए क्योंकि अगर इसका सही समय पर उपयोग न हो तो यह जल्दी से उड़ जाता है। फिर ग्राहक ने पूछा - यह दूसरा वाला चित्र किसका है ? दुकानदार ने कहा - यह भी अवसर का ही है। यदि अवसर को सामने से ही बालों से पकड़ लोगे तो वह आपका  है।  अगर आपने थोड़ी देर बाद में पकड़ने की कोशिश की तो उसके सिर के पीछे वाला गांजा हिस्सा हाथ में आएगा जो फिसलकर निकल जाएगा। वह ग्राहक इन चित्रों के रहस्य जानकर हैरान था , वह  समझ गया था कि अवसर तो हमें मिलता रहता है , परन्तु हमारी लापरवाही की वजह से हमारे हाथ से निकल जाता है। 

अक्सर हम लोगों को यह शिकायत रहती है कि हमें अवसर ही  नहीं मिला , परन्तु ये अपनी जिम्मेदारी से भागने और अपनी गलती को छुपाने का बस एक बहाना है। अवसर हमारे सामने से आते - जाते रहते हैं , पर हम उन्हें पहचान नहीं पाते या पहचानने में देर कर देते  हैं। कई बार हम सिर्फ इसलिए चूक जाते हैं , क्योंकि हम बड़े अवसर की ताक में रहते हैं। पर अवसर बड़ा या छोटा नहीं होता है। हमें अवसर का भरपूर उपयोग करना चाहिए। 

आयशा टाक 
The Fabindia School  

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