Showing posts with label उपयोग. Show all posts
Showing posts with label उपयोग. Show all posts

Monday, April 12, 2021

एक दिन फोन के बिन: सुरेश सिंह नेगी

संसार में बहुत सी चीजें ऐसी भी हैं जिसके बिना हम एक दिन भी नहीं रह सकते हैं। लेकिन अगर हम ठान  लें तो एक दिन के लिए उनके बिना भी रह सकते हैं। 

अक्सर कहा जाता है कि, एक छोटा बच्चा अपनी माँ के बिना एक दिन भी नहीं रह सकता है। लेकिन समय के साथ जैसे-जैसे वह बड़ा होता चला जाता है। वह अपनी माँ के बिना भी रहना सीख़ जाता है। ऐसा इसलिए होता है कि जब वह छोटा होता है तब उसके अन्दर समझ की कमी होती है। लेकिन आज हमें समझ होते हुए भी हम एक दिन भी फोन के बिना नही रह सकते हैं।

अगर आप, लोगों से पूछें कि क्या वह एक दिन फोन के बिना रह सकते हैं। तो ज्यादातर लोगों का यही कहना  होगा कि बिना फोन के हमें  नींद नही आती है, हमारा दिन फोन के बिना अधूरा सा लगता है या फिर हमारा  काम ही कुछ ऐसा है कि जो कि बिना फोन के हो ही नहीं सकता। काफी हद तक उनका कहना भी सही है क्योंकि उन्होने फोन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया है। 

आज के दौर में जिस तरह से फोन  का उपयोग हो रहा है मेरा मानना है कि ऐसा नहीं होना चाहिए। जब हमें   जरूरत हो उसी समय उसका उपयोग करें। सोचो कि कभी आपका फोन ख़राब हो जाए या फिर फोन की बैटरी खत्म हो जाए और पूरे दिन बिजली नही हो तब उस समय आप क्या करोगे। 

जिस प्रकार से हम अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए उपवास रखतें हैं, ठीक उसी प्रकार से फोन को भी महीने में कम से कम एक बार पूरे दिन के लिए अपने से दूर रखें।

सुरेश सिंह नेगी

The Fabindia School, Bali
sni@fabindiaschools.in

Sunday, May 10, 2020

जीवन में अवसर का महत्त्व - आयशा टाक

अवसर एक उपयुक्त या अनुकूल समय है , जो लगभग सभी के जीवन में आता है। यदि कोई इसे सकारात्मक रूप में लेता है तो सफलता प्राप्त करता है। यदि हम इस अनुकूल समय की गहराई में जाते हैं , तो हम पाते हैं कि ईश्वर हमें अपने जीवन में लगभग हर दिन एक अवसर प्रदान करता है , इस अवसर को प्राप्त करना और इसका उपयोग करना हमारे ऊपर निर्भर करता है। किसी व्यक्ति के जीवन में बहुत सारे अवसर आते हैं ,लेकिन वह अनदेखा करता है या उन्हें बहुत कम महत्त्व देता है ,कभी अनजाने में और कभी जानबूझकर। परिणाम यह होता है कि वह जीवन भर पीड़ित होता है या  पश्चाताप करता है। उदाहरण के लिए ये कहानी पढ़िए
शीर्षक - अवसर की पहचान
एक बार एक व्यक्ति चित्रों की दुकान पर गया। वहाँ पर उसने बहुत ही अजीब से चित्र देखें। पहले  चित्र में  चेहरा पूरी तरह बालों से ढ़का हुआ था और पैरों में पंख लगे हुए थे। दूसरे चित्र में एक व्यक्ति का सिर पीछे से  पूरा गंजा था। ग्राहक ने पूछा - यह पहला वाला चित्र किसका है ? दुकानदार ने बोला - यह चित्र अवसर का है। ग्राहक ने पूछा - इसका चेहरा बालों से ढ़का हुआ क्यों है ? दुकानदार बोला - क्योंकि जब अवसर आता है , तो मनुष्य उसे पहचानता नहीं है। ग्राहक ने पूछा और इसके पैरों में पंख क्यों हैं ? दुकानदार बोला - वह इसलिए क्योंकि अगर इसका सही समय पर उपयोग हो तो यह जल्दी से उड़ जाता है। फिर ग्राहक ने पूछा - यह दूसरा वाला चित्र किसका है ? दुकानदार ने कहा - यह भी अवसर का ही है। यदि अवसर को सामने से ही बालों से पकड़ लोगे तो वह आपका  है।  अगर आपने थोड़ी देर बाद में पकड़ने की कोशिश की तो उसके सिर के पीछे वाला गांजा हिस्सा हाथ में आएगा जो फिसलकर निकल जाएगा। वह ग्राहक इन चित्रों के रहस्य जानकर हैरान था , वह  समझ गया था कि अवसर तो हमें मिलता रहता है , परन्तु हमारी लापरवाही की वजह से हमारे हाथ से निकल जाता है। 

अक्सर हम लोगों को यह शिकायत रहती है कि हमें अवसर ही  नहीं मिला , परन्तु ये अपनी जिम्मेदारी से भागने और अपनी गलती को छुपाने का बस एक बहाना है। अवसर हमारे सामने से आते - जाते रहते हैं , पर हम उन्हें पहचान नहीं पाते या पहचानने में देर कर देते  हैं। कई बार हम सिर्फ इसलिए चूक जाते हैं , क्योंकि हम बड़े अवसर की ताक में रहते हैं। पर अवसर बड़ा या छोटा नहीं होता है। हमें अवसर का भरपूर उपयोग करना चाहिए। 

आयशा टाक 
The Fabindia School  

Blog Archive