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Thursday, October 22, 2020

प्रतिकूल परिस्थितियों में सामना करना - Krishan Gopal

parikalpanasamay.com
समय एक सा नहीं रहता, हर पल कुछ अलग होता है। कभी हमारे पक्ष में रहता है तो कभी संकट लेकर उपस्थित रहता है। ऐसे में व्यक्ति को आत्मविश्वास, कठिन परिश्रम, सहयोग और स्वयं के मार्गदर्शन की आवश्यकता रहती है।  ऐसी परिस्थिति में कभी उहापोह वाली स्थिति ना बनने दें। 

यह भी संभव है कि हर रोज हम कई परिस्थितियों का सामना करते हैं तथा उसका मुकाबला भी करते हैं। परंतु कभी बड़ा संकट सामने आ जाए तो हार मान जाते हैं। ऐसे कई उदाहरण पढ़ने को मिले, जिससे प्रतिकूल परिस्थितियों में भी सामना करने की प्रेरणा मिलती है। कई सारी बातें या घटनाएँ हमारे सामने प्रत्यक्ष घटित होती है। 

ऐसी ही एक घटना का जिक्र करना चाहूँगा। स्कूल के वार्षिकोत्सव का समय था, प्रदर्शनी के लिए परियोजना कार्य चल रहा था। एक बालक को कुछ मिट्टी की मूर्तियाँ बनाने को कहा गया था। किंतु वह बालक बना नहीं पा रहा था या उसकी बनी मूर्तियाँ उपयुक्त नहीं थी। ऐसे में उसे यह कार्य करने से मना कर दिया गया। किंतु रविवार के अवकाश के पश्चात जब वह स्कूल आया तो पहले से काफी सुंदर मिट्टी की मूरत उसके हाथों में थी। 

पूछने पर पता चला अवकाश के पूरे दिन वह बार-बार इसका अभ्यास करता रहा और अंत में परिणाम सामने था। वह कोई मूर्तिकार नहीं था या किसी से मदद नहीं मिली किंतु स्व-प्रेरणा से उसने यह काम पूरा किया। मनोयोग से था आत्मविश्वास के साथ किया गया कार्य निश्चित रूप से सफलता दिलाता है। 

यह बात एक बालक की थी, यह उसके लिए एक बड़ी चुनौती थी परन्तु निश्चित रूप से बड़ों के सामने विकट समस्याएँ आ जाती है परंतु इन समस्याओं को हमें खुद को ही दूर करने का प्रयास करना होगा। कहा गया है “मन के हारे हार है मन के जीते जीत।” इसलिए मन से हार नहीं माननी चाहिए बल्कि यह विश्वास रखें कि निश्चित रूप से जीत हमारी होगी। 

कई दिव्यांगजन हार न मानकर प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपने अनुकूल वातावरण तैयार कर लेते हैं। कई बार तो इन्हें किसी की मदद भी नहीं मिलती, फिर भी जीवन से हार  न मानकर लड़ते जाते हैं। हमें भी लड़ना है तथा जीवन में आने वाली ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों में तटस्थ रहकर उचित निर्णय लेने की क्षमता का विकास करना है। धैर्य रखते हुए मानसिक संतुलन बनाए रखना है। तभी हम जीवन को सही मायने में दिशा दे पाएँगे।  

Krishan Gopal, The Fabindia School <kde@fabindiaschools.in> 

Tuesday, August 25, 2020

समय का महत्व - Usha Panwar

समय बहुमूल्य है, इसे व्यर्थ नही खोना चाहिए। हम बीते हुए समय को वापस नहीं लौटा सकते हैं। समय किसी की
प्रतीक्षा नहीं करता। हमारे जीवन की सभी सफलताएं, आशाए, इच्छाएं समय पर ही निर्भर करती है। जो व्यक्ति समय का सदुपयोग करते हैं वही जीवन में सफल हो पाते हैं।
विद्यार्थी जीवन के लिए समय के सदुपयोग का विशेष महत्व है। विद्यार्थियों को विद्या ग्रहण करने के लिए अपने समय का एक-एक क्षण का सदुपयोग करना चाहिए। संसार में जितने भी महापुरुष व मेघावी व्यक्ति हुए हैं उन्होंने अपने समय का बुद्धिमत्ता पूर्वक सदुपयोग किया है। उदाहरण:-नेपोलियन सिर्फ 5 मिनट देरी से पहुंचने के कारण उसे युद्ध भूमि में पराजय का सामना करना पड़ा और वह कैद कर लिया गया।
अतः हमें अपने समय का पूर्ण सदुपयोग करना चाहिए खेल के समय खेलना और पढ़ाई के समय मन लगाकर पढ़ाई करना। समय के सदुपयोग से ही जीवन में सच्चा सुख व सफलता प्राप्त की जा सकती है ।समय अमूल्य धन है ।समय संसार में अमीर गरीब ऊंच-नीच की भेदभाव नहीं रखता जिसने भी समय के महत्व को पहचाना और सदुपयोग किया वह उन्नति की सीढ़ियां चढ़ जाता है।

धन्यवाद
Usha Panwar
The Fabindia School
upr@fabindiaschools.in 

Sunday, May 10, 2020

जीवन में अवसर का महत्त्व - आयशा टाक

अवसर एक उपयुक्त या अनुकूल समय है , जो लगभग सभी के जीवन में आता है। यदि कोई इसे सकारात्मक रूप में लेता है तो सफलता प्राप्त करता है। यदि हम इस अनुकूल समय की गहराई में जाते हैं , तो हम पाते हैं कि ईश्वर हमें अपने जीवन में लगभग हर दिन एक अवसर प्रदान करता है , इस अवसर को प्राप्त करना और इसका उपयोग करना हमारे ऊपर निर्भर करता है। किसी व्यक्ति के जीवन में बहुत सारे अवसर आते हैं ,लेकिन वह अनदेखा करता है या उन्हें बहुत कम महत्त्व देता है ,कभी अनजाने में और कभी जानबूझकर। परिणाम यह होता है कि वह जीवन भर पीड़ित होता है या  पश्चाताप करता है। उदाहरण के लिए ये कहानी पढ़िए
शीर्षक - अवसर की पहचान
एक बार एक व्यक्ति चित्रों की दुकान पर गया। वहाँ पर उसने बहुत ही अजीब से चित्र देखें। पहले  चित्र में  चेहरा पूरी तरह बालों से ढ़का हुआ था और पैरों में पंख लगे हुए थे। दूसरे चित्र में एक व्यक्ति का सिर पीछे से  पूरा गंजा था। ग्राहक ने पूछा - यह पहला वाला चित्र किसका है ? दुकानदार ने बोला - यह चित्र अवसर का है। ग्राहक ने पूछा - इसका चेहरा बालों से ढ़का हुआ क्यों है ? दुकानदार बोला - क्योंकि जब अवसर आता है , तो मनुष्य उसे पहचानता नहीं है। ग्राहक ने पूछा और इसके पैरों में पंख क्यों हैं ? दुकानदार बोला - वह इसलिए क्योंकि अगर इसका सही समय पर उपयोग हो तो यह जल्दी से उड़ जाता है। फिर ग्राहक ने पूछा - यह दूसरा वाला चित्र किसका है ? दुकानदार ने कहा - यह भी अवसर का ही है। यदि अवसर को सामने से ही बालों से पकड़ लोगे तो वह आपका  है।  अगर आपने थोड़ी देर बाद में पकड़ने की कोशिश की तो उसके सिर के पीछे वाला गांजा हिस्सा हाथ में आएगा जो फिसलकर निकल जाएगा। वह ग्राहक इन चित्रों के रहस्य जानकर हैरान था , वह  समझ गया था कि अवसर तो हमें मिलता रहता है , परन्तु हमारी लापरवाही की वजह से हमारे हाथ से निकल जाता है। 

अक्सर हम लोगों को यह शिकायत रहती है कि हमें अवसर ही  नहीं मिला , परन्तु ये अपनी जिम्मेदारी से भागने और अपनी गलती को छुपाने का बस एक बहाना है। अवसर हमारे सामने से आते - जाते रहते हैं , पर हम उन्हें पहचान नहीं पाते या पहचानने में देर कर देते  हैं। कई बार हम सिर्फ इसलिए चूक जाते हैं , क्योंकि हम बड़े अवसर की ताक में रहते हैं। पर अवसर बड़ा या छोटा नहीं होता है। हमें अवसर का भरपूर उपयोग करना चाहिए। 

आयशा टाक 
The Fabindia School  

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