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Tuesday, June 29, 2021

अपनी गलतियों को स्वीकार करें: सुरेश सिंह नेगी

आम तौर पर, इंसानों के लिए दूसरों की खामियों को पहचानना आसान होता है, लेकिन जब भी हम दूसरों को हमारे बारे में बात करते सुनते हैं तो हम हमेशा रक्षात्मक हो जातें हैं।

हमें यह स्वीकार करने के लिए पर्याप्त विनम्र होना होगा कि हम हमेशा सही नहीं होते हैं। हमें अपनी गलतियों के लिए स्वेच्छा से माफी माँगनी चाहिए और उनमें सुधार करना चाहिए।

यदि हमें अपनी गलतियों को समझने और स्वीकार करने में कठिनाई हो रही है, तो हम इन तरीकों को अपना सकते हैं:

1. अपनी गलतियों को स्वीकार करना और उनके लिए माफी माँगना कमजोरी के संकेत नहीं हैं। गलती को स्वीकार करने के लिए एक व्यक्ति को अपने प्रति ईमानदार होना पड़ेगा। जिन लोगों को अपनी गलती का एहसास होता है वे उसे स्वीकार करके माफी माँग लेते हैं। ऐसा करने से दूसरों का सम्मान हासिल करने की अधिक संभावना होती है।

2. दूसरों पर उँगली न उठाएँ। जब भी हम किसी की ओर उँगली उठाते हैं, तो हमारी चार अन्य उँगलियाँ वास्तव में हमारी ओर इशारा कर रही होती हैं। इसका मतलब यह है कि हमें किसी अन्य व्यक्ति को किसी भी दोष के लिए न्याय करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि हमारे पास वास्तव में उससे अधिक दोष हो सकते हैं। इससे पहले कि हम किसी के खिलाफ शिकायत करें या बातें करें, हमें  पहले खुद को जाँचना होगा। क्योंकि हम यह नहीं कह सकते हैं कि हम उस व्यक्ति से बेहतर हैं।

3. खुले विचारों वाले बनें। बंद-दिमाग हमें हमारे दोषों को देखने से रोक सकता है क्योंकि इससे हमें यह लगता है कि हम जो मानते हैं वह सही है- और हमारे सिद्धांतों के बाहर कुछ भी गलत है। हमें  दूसरों की राय और विश्वास के लिए भी खुला होना चाहिए। हमें उन्हें स्वीकार करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन कम से कम हम उनका पक्ष सुनने के लिए तैयार हो सकते हैं। साथ ही साथ हमें यह भी स्वीकार करने की आवश्यकता है कि दूसरे भी सही हो सकते हैं।

4. अपना मूल्यांकन करें, अपनी गलतियों को महसूस करने का दूसरा तरीका है अपने कार्यों, शब्दों या निर्णयों का मूल्यांकन करना। ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीका है कि हमें स्वयं को उनका रिसीवर बनना होगा। उदाहरण के लिए, यदि कोई आपके द्वारा आहत होने का दावा करता है, तो आप स्वयं को उसके स्थान पर रख सकते हैं और अपने कार्यों के प्रभाव को महसूस कर सकते हैं।

5. जब कोई हमारी त्रुटि की ओर इशारा करता है तो उसे विनम्रतापूर्वक सुनें। जब भी कोई हमें हमारी  गलती बताए, तो तुरंत रक्षात्मक न बनें। हमें इस बात से सहमत होना चाहिए कि दूसरे हमारे बारे में क्या बताते हैं या नहीं, हमको उन्हें सुनने के लिए पर्याप्त विनम्र होना चाहिए। अगर हमें पता चलता है कि उन्होंने वास्तव में जो कहा है वह सही है, तो नम्रता से उन्हें धन्यवाद देना चाहिए, और उन गलतियों के लिए क्षमा माँगनी चाहिए। यदि उन्होंने केवल हमें गलत समझा है, तब भी हमको उन्हें यह बताने के लिए धन्यवाद देना चाहिए कि वे क्या सोचते हैं। फिर, हम बाद में धीरे से अपना पक्ष स्पष्ट कर सकते हैं।

 6. रचनात्मक आलोचनाओं के लिए आभारी रहें। जब भी लोग हमें नकारात्मक प्रतिक्रिया दें तो आहत न हों। उन्हें टालने के बजाय, उनकी टिप्पणियों को रचनात्मक आलोचना मानना चाहिए। मूल्यांकन करें कि ये टिप्पणियाँ सत्य हैं या नहीं। यदि हाँ, तो यह स्वीकार करने के लिए पर्याप्त विनम्र रहें कि हमें बदलने की आवश्यकता है।

Suresh Singh Negi
The Fabindia School
sni@fabindiaschools.in

Monday, May 25, 2020

सरलता एवं विश्वास: आयशा टॉक


सादगी एक महान गुण है, जिसे हर कोई जीवन में पालन कर सकता है। हमें सादा जीवन उच्च विचार में विश्वास रखना चाहिए। हमारे पास एक साधारण जीवन - शैली होनी चाहिए। हमें फैशन के पीछे नहीं भागना चाहिए। हमें अपने साधनों से अधिक खर्च नहीं करना चाहिए। हमें अपने भाषण अर्थात बोली में शिष्टाचार एवं सादगी का पालन करना चाहिए। हमें अपनी बात में मीठा एवं विनम्र होना चाहिए। हमें घमंड नहीं करना चाहिए, न ही हमें अपनी कड़वी बातों से किसी का दिल दुखाना चाहिए। हमें किसी भी परिस्थिति में अपना आपा अर्थात मानसिक संतुलन नहीं खोना चाहिए। हमें अगर किसी को कुछ कहना होता है, तो हम अपनी बात को बहुत ही सरल लहजे से कह सकते है। सरलता कभी किसी को दुखी नहीं करती है, बल्कि सरलता किसी व्यक्ति के दिल में आपके लिए सम्मान एवं विश्वास पैदा करती है। 

 विश्वास एक बहुत छोटा - सा  शब्द लगता है, लेकिन इसके मायने बहुत बड़े एवं गहरे होते हैं। विश्वास ही जीवन का आधार है। विश्वास पर दुनिया टिकी हुई है। जिंदगी में किसी पर विश्वास करना एवं किसी का विश्वास जीतना बहुत जरूरी होता है। विश्वास एक बहुत ही अमूल्य भावना है, जिसका कोई मोल नहीं होता है। यदि जीवन में आप पर किसी ने विश्वास कर लिया एवं आपने किसी का विश्वास जीत लिया तो आप बहुत ही भाग्यशाली व्यक्ति है। विश्वास हर रिश्ते में बहुत जरूरी होता है। यह जरूरी नहीं है कि हर बार हम किसी पर या कोई हम पर एकदम से विश्वास कर लें। विश्वास की राह कठिन जरूर है, परन्तु फिर भी हम उसे पा जरूर सकते है, वह नामुमकिन नहीं है। हो सकता है, अगले को हम पर विश्वास करने में कुछ ज्यादा वक्त लग जाए। 

परन्तु बालकों का मन बहुत कोमल होता हैं, वे आसानी से अपने रिश्तेदारों, मित्रों एवं अध्यापकों पर विश्वास कर लेते हैं। इसके लिए उन्हें सिर्फ प्यार, अपनत्व एवं सादगी भरे व्यवहार की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए जैसे - एक छोटा बच्चा जब चलना सीखता है, जब वह डगमगाने लगता है तो अपने परिवार के किसी बड़े व्यक्ति का हाथ थाम लेता है। ठीक ऐसे ही जब कोई बच्चा पहली बार विद्यालय में आता है तो वह बहुत रोता है, परन्तु जब उसके अध्यापक उसकी भावनाओं को पूरी तरह से समझने लग जाते है। वे उसके सामने सरलता और प्यार से पेश आने लगते है तो वह बच्चा रोना बंद कर देता है एवं अपने अध्यापक पर पूर्ण  विश्वास करने लगता  है एवं अपनी हर बात उनके साथ में बाँटने लगता है। फिर तो वह अपनी हर परेशानी को अपने रिश्तेदारों से ज्यादा अपने अध्यापक पर भरोसा करके उन्हें बता सकता है। 
Aysha Tak
The Fabindia School, Bali

सादगी और विश्वास: जफ्फर खान

मेरे अनुसार सादगी एक महान गुण है l जिसे व्यक्ति अपने जीवन में पालन कर सकते हैं | हमारे पास एक साधारण जीवन शैली होनी चाहिए | हमें अपने भाषणों और शिष्टाचार में भी सादगी का पालन करना चाहिए | हमें अपनी बात में मीठा और विनम्र होना चाहिए |

सादगी भरे जीवन का अर्थ है कम खरीदना, कम उपयोग करना, खुद को उन चीजों के प्रति समर्पित करना जो महत्वपूर्ण है | कोई भी चीज खरीदने से पहले गंभीरतापूर्वक विचार करें  फिर  खरीदे | अपने जीवन के आध्यात्मिक और भावनात्मक कष्ट को दूर करने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ बने रहे | हम जितना सादगी से रहेंगे जीवन उतना ही सार्थक होता जाएगा |

सादा जीवन यानी आजाद जीवन | वह जीवन जो हमको उस ओर बढ़ने की राह दिखाता है जहाँ जुनून और उपलब्धियाँ हैं | परिवार में विश्वास ही एक ऐसी चीज है, जो पूरे परिवार को आपस में बाँधें रखती हैं और उसी विश्वास के आधार पर प्रत्येक सदस्य अपने कर्तव्य के प्रति पूरी निष्ठा रखता है | हमें अपने लक्ष्य और मंजिल को पाने के लिए अपने मन में अटल विश्वास रखना चाहिए |

विश्वास ने  दुर्बलो को बलवान और रोगियों को निरोगी बनाया है | वह कार्य करने में अधिक शक्ति रखते हैं | उनका जीवन मर्यादा युक्त होता है | उनकी कार्यशैली नियमबद्ध होती हैं | विश्वासी व्यक्ति सदैव सत्य पर भरोसा कर विजय प्राप्त करते हैं | सत्य असीम हैं, अनंत हैं | विश्वासी व्यक्ति ईर्ष्या नहीं करते, द्वेष नहीं करते, शिकायतें नहीं करते, निंदा नहीं करते है | वे निरंतर अपने कर्तव्य में लगे रहते हैं और अपना कार्य करते रहते हैं l 
Jaffer Khan
The Fabindia School, Bali

Sunday, October 21, 2018

उषा पंवार: मधुरवाणी

हमारी  वाणी  में  इतनी  शक्ति  होती  हैं  कि  हम  किसी  को  भी  अपना  बना सकते  हैं  और  किसी को भी अपने से  दूर   कर सकते हैं यदि हम   प्रेम  पूर्वक  किसी  से  बातचीत करते हैं तो अवश्य ही   वे अपनी ओर   आकर्षित  हो  जाएँगे और  यदि हम कर्कश  व  कठोर  शब्दों का प्रयोग करते हैं तो कोई भी हमसे दूर हो  सकता  है अथवा   कोई भी हमसे बातचीत   करना  पसंद नहीं करेगा। मधुर वाणी   केवल  सुनने  वालों को ही नहीं बल्कि  बोलने वाले को भी  आत्मिक सुख प्रदान करती हैं।

किसी के दुख़  में  हम  सहानुभूति के शब्द  भी  बोल  दे  तो  वे उसे  बहुत  सहारा  देते हैं ।  मृदुभाषी  सदा  सम्मान  पाते हैं । सभी लोग  उनकी  प्रशंसा  करते हैं ।  प्रेम- सौहार्द से समाज में मेल  जोल  बढ़ता   हैं।

कबीरदास  जी  कहते  हैं  कि ''ऐसी  बानी  बोलिए मन  का  आपा खोए,  औरन  को  शीतल  करै,  आपहु  शीतल  होय”।

विनम्र  स्वभाव  और  मीठी  वाणी  का  हर  तरह की  सफलता  में  योगदान  रहता है इसलिए  मनुष्य को हमेशा  मीठी  वाणी  बोलनी चाहिए।

वाणी  में इतनी  शक्ति  होती है कि  कड़वा  बोलने  वाले  व्यक्ति  का  शहद  भी  नहीं  बिकता है जब कि  मृदुभाषी  व्यक्ति की  मिर्ची, करेला  जैसी  वस्तु  भी बिक  जाती हैं ।  ज़रुरी नहीं  कि   हम  केवल  मिठाई  खिलाकर  ही  दूसरों  का मुँह  मीठा  करें, हम मीठा   बोलकर   भी  खुशी  दे  सकते हैं ।

मृदुभाषी  में  इतनी ताकत होती है  कि  पराया  व्यक्ति  या  दुश्मन  भी   अपना  हितैषी  बन  जाता है । कबीरदासजी  कहते हैं कि “जिहवा  में  अमृत  बसै  जो  कोई  जाने  बोल,  बिष बासुकि का उतरै  जिह्वा  तानै  हिलोल।।"


उषा  पंवार, email: upr4fab@gmail.com, The Fabindia school, Bali

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