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Thursday, March 4, 2021

प्रशंसा - सुरेश सिंह नेगी

"प्रशंसा" शब्द बाहर से छोटा दिखता है, लेकिन अगर इसे ठीक से इस्तेमाल किया जाए तो यह कुछ भी हासिल करने में मदद कर सकता है। यह शब्द किसी को प्रेरित करने के लिए सबसे शक्तिशाली शब्द है। अगर किसी को किसी निश्चित कार्य के लिए प्रशंसा मिलती है तो वह व्यक्ति हमेशा आगे के सभी कार्यों को पूरे मन से करने की कोशिश करता है। यह शब्द नकारात्मक विचारों को सकारात्मक में बदल सकता है। इस दुनिया में हर कोई अपने कार्यों के लिए प्रशंसा प्राप्त करना पसंद करता है। 

"प्रशंसा" केवल कार्यस्थलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग कहीं भी किया जा सकता है। अगर आपके घर में भी कोई व्यक्ति अच्छा कार्य करता है तो निश्चित रूप से उस व्यक्ति की प्रशंसा होनी चाहिए। 

इसलिए जब भी संभव हो किसी भी व्यक्ति की प्रशंसा करते रहना चाहिए, क्योंकि यह चीजों को आसान और सरल बनाने में मदद करता है। प्रशंसा केवल उसे पाने वाले पर ही नहीं, बल्कि उसे देने वाले पर भी अच्छा–खासा प्रभाव छोड़ती है। जब आप किसी की प्रशंसा करते हैं, तो आप सकारात्मक सोच रख सकते हैं, और आप अधिक से अधिक तालमेल बना सकते हैं। प्रशंसा लोगों को खुशी और आनन्द देती है। इसलिए, प्रशंसा करने में कंजूस बनने का कोई कारण नहीं है। किसी की प्रशंसा करने में समय बहुत जरूरी होता है। जैसे कि कहावत भी है कि, “लोहा गर्म है, तब मारो हथौड़ा,” जब कोई व्यक्ति प्रशंसा पाने के योग्य काम करता है, तो उसी समय और उसी जगह ही उसकी प्रशंसा करना सही है।

एक अच्छी प्रशंसा आत्मविश्वास और हिम्मत देती है। आइए हम एक दूसरे की प्रशंसा करके एक अच्छे समाज का निर्माण करें।

सुरेश सिंह नेगी
The Fabindia School
sni@fabindiaschools.in

Tuesday, December 22, 2020

कलम की ताकत - राजेश्वरी राठौड

Courtesy: ru.depositphotos.com
"कलम तलवार की तुलना में शक्तिशाली है" का अर्थ है कि कलम बेहद शक्तिशाली है आकार में छोटी होने के बावजूद यह उन चीजों को पूरा करने की शक्ति रखती हैं जो एक शक्तिशाली तेज धार वाली तलवार पूरा नहीं कर सकती कलम तलवार से भी अधिक शक्तिशाली है इसका मतलब की लेखन का कार्य हिंसा के कार्य की बजाए लोगों पर अधिक प्रभाव डाल सकती हैं। 

यह कलम अंधकार को मिटाकर प्रकाश उजागर करती है। कलम ऐसे चमत्कार पैदा कर रही है जैसे की लिखित जानकारी ज्ञान के रूप में फैल जाती हैं जो लोगों के जीवन काल के लिए संरक्षित हैं। इतिहास इस बात का प्रमाण है कि लेखकों ने अपने लेखन के माध्यम से दुनिया को बदल दिया है। महात्मा गांधी, जॉन कीट्स, स्वामी विवेकानंद और कई अन्य लोगों ने अपने लेखन के माध्यम से समाज व देश में सुधार किये हैं। लेखक अपने उपदेश और ज्ञान के माध्यम से विभिन्न सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ते हैं और समाज में परिवर्तन लाते हैं। यह कलम है जो पुस्तक को शक्तिशाली बनाती है ऐसी पराक्रमी कलम है।

लेखन लोगों को सामाजिक या राष्ट्रीय बुराई के खिलाफ खड़े होने के लिए एकजुट कर सकता है। कलम की शक्ति को इस तथ्य से भी समझा जा सकता है की परीक्षा आदि के दौरान उत्तर पुस्तिका में लिखा गया एक गलत उत्तर हम पर भारी पड़ सकता है। लेखक आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण ज्ञान और जानकारी को कलम बंद कर सके। कलम यह बताती है कि शब्दों में बल से अधिक प्रभावी ढंग से समस्याओं को हल करने की क्षमता है। कलम का जीवन में बहुत महत्व है।

राजेश्वरी राठौड
The Fabindia School
rre@fabindiaschools.in

Monday, July 20, 2020

प्रकृति से जुड़ाव - उर्मिला राठौड़

प्रकृति एक प्राकृतिक पर्यावरण है जो हमारे आसपास है, हमारा ध्यान देती है और हर पल हमारा पालन-पोषण
करती है। ये हमारे चारों तरफ एक सुरक्षात्मक कवच प्रदान करती है जो हमें नुकसान से बचाती है। हवा, पानी, जमीन, आग, आकाश आदि जैसी प्रकृति के बिना हमलोग इस काबिल नहीं है कि धरती पर रह सके। प्रकृति हमारे आस-पास कई रुपों में है जैसे पेड़, जंगल, जमीन, हवा, नदी, बारिश, तालाब, मौसम, वातावरण, पहाड़, पठार, रेगिस्तान आदि। कुदरत का हर स्वरुप बहुत शक्तिशाली है जो हमारा पालन पोषण करने के साथ ही नाश करने की क्षमता भी रखता है।

आज के दिनों में सभी के पास प्रकृति का आनन्द उठाने का कम समय है। बढ़ती भीड़ में हम प्रकृति का सुख लेना और अपने को स्वस्थ रखना भूल गये है। हम शरीर को फिट रखने के लिये तकनीक का प्रयोग करने लगे है। जबकि ये बिल्कुल सत्य है कि प्रकृति हमारा ध्यान रख सकती है और हमेशा के लिये फिट रख सकती है। बहुत सारे लेखक अपने लेखन में प्रकृति के फायदे और उसकी सुंदरता का गुणगान कर चुके है। प्रकृति के पास ये क्षमता है कि वो हमारे दिमाग को चिंता मुक्त रखे और बीमारियों से बचाए। मानव जाति के जीवन में तकनीकी उन्नत्ति के कारण हमारी प्रकृति का लगातार ह्रास हो रहा है जिसे संतुलित और उसके प्राकृतिक संपत्ति को संरक्षित रखने के लिये उच्च स्तर की जागरुकता की जरुरत है।

ईश्वर ने सब कुछ बहुत सुंदरता से देखने के लिये बनाया है जिससे हमारा आँखे कभी नहीं थक सकती। लेकिन हम भूल जाते है कि मानव जाति और प्रकृति के बीच के रिश्तों को लेकर हमारी भी कुछ जिम्मेदारी है। सूर्योदय की सुबह के साथ ये कितना सुंदर दृश्य दिखाई देता है, जब चिड़ियों के गाने, नदी, तालाब की आवाज हवा और एक लंबे दिन के दबाव के बाद बगीचे में शाम में दोस्तों के साथ खुशनुमा पल हो। लेकिन हम अपने पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते प्रकृति की खूबसूरती का आनन्द लेना भूल चुके है।

कई बार हमारी छुट्टियों में हम अपना सारा दिन टीवी, न्यूजपेपर, कम्प्यूटर खेलों में खराब कर देते है लेकिन हम भूल जाते है कि दरवाजे के बाहर प्रकृति के गोद में भी बहुत कुछ रोचक है हमारे लिये। बिना जरुरत के हम घर के सारे लाइटों को जलाकर रखते है। हम बेमतलब बिजली का इस्तेमाल करते है जो ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा देता है। हमारी दूसरी गतिविधियाँ जैसे पेड़ों और जंगलों की कटाई से CO2 गैस की मात्रा में वृद्धि होती है और ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनती है।

अगर हमें हमेशा खुश और स्वस्थ रहना है तो हमें स्वार्थी और गलत कार्यों को रोकने के साथ-साथ अपने ग्रह को बचाना होगा और इस सुंदर प्रकृति को अपने लिये बेहतर करना होगा। पारिस्थितिकीय तंत्र को संतुलित करने के लिये हमें पेङों और जंगलो की कटाई रोकनी होगी, ऊर्जा और जल का संरक्षण करना होगा आदि। अंत में प्रकृति के असली उपभोक्ता हम है तो हमें ही इसका ध्यान रखना चाहिये।

उर्मिला राठौड़
The Fabindia School
ure@fabindiaschools.in

Wednesday, June 24, 2020

स्वतंत्रता और शांति: राजेश्वरी राठौड़


स्वतंत्रता एक शक्तिशाली शब्द हैंस्वतंत्रता का अर्थ है "बंधनों का अभाव” औपचारिक दृष्टि से विवेकशील कर्ता के लिए स्वतंत्रता की मांग, प्रतिबंधों का ना होना जब व्यक्ति स्वतंत्र होगा तब ही वह विवेक से निर्णय की शक्ति से रचनात्मक और क्षमताओं का विकास कर सकता है। स्वतंत्रता के तीन रूप  होते हैं पहला रूप है किसी बात से स्वतंत्रता, दूसरा रूप किसी बात के लिए स्वतंत्रता और तीसरा रूप है किसी बात की प्रक्रिया हैमानव एक सामाजिक प्राणी हैसामाजिक रीति-रिवाजों और देश के कानून का पालन आजाद माहौल में करने को स्वतंत्र हो जैसे भोजन, वस्त्र रूचि और भिरुचियाँ आदि

हमारे जीवन के व्यक्तिगत पहलू जैसे शिक्षा, व्यवसाय में अपने परिवारजनों के विचार लें लेकिन पसंद स्वयं की होगी शिक्षा प्राप्त करने के बाद विद्यार्थियों को खुद ही व्यवसाय चुनना चाहिए परिवारजनों के केवल विचार जान सकते हैं लेकिन अपनी रुचि के अनुसार व्यवसाय करना चाहिए। स्वतंत्रता से अपना कार्य रुचिपूर्वक करना चाहिए मनुष्य की इच्छा और कार्य पर किसी प्रकार की रुकावट या मर्यादा नहीं होनी चाहिए अपने पूर्ण विकास के लिए समान अवसर प्राप्त हो सके सभी व्यक्तियों को समान अवसर एवं समान स्वतंत्रता प्राप्त होनी चाहिए

शांति, शिक्षा, मूल्य, ज्ञान और व्यवहार कौशल विकसित करने की प्रक्रिया है। जो मनुष्य दूसरों के साथ और प्राकृतिक वातावरण के साथ मिलकर रहती हैं। हमारे अंदर शांति आएगी तो विकास होगाशांति बनाने के लिए संवेदनशील बनना पड़ता है। हम शिक्षा के क्षेत्र में एक शिक्षक तभी विद्यार्थियों की भावनाओं को समझ कर उनकी समस्या का निवारण कर सकता है और विषय ज्ञान में वृद्धि कर सकता है

इस तरह हमारे पास दुनिया का पूरा वैभव और सुख साधन उपलब्ध है परंतु शांति नहीं है तो हम भी दुखी आदमी की तरह ही हैंसुख का शांति से गहरा रिश्ता हैझगड़ा, दुख और लालच को बंद करने के लिए शांति एक शक्तिशाली औजार की तरह हैहमारे घर परिवार व समाज में शांति सदभाव होगा तब ही हमारे राष्ट्र का विकास हो सकेगा इसीलिए मानव जीवन में शांति का होना आवश्यक है। शांति अच्छे संस्कारों व शिक्षा से ही सीख सकते हैं। जहाँ शांति हो वहाँ आनंद का माहौल होगा तो हर व्यक्ति स्वतंत्र होगा तब ही अपने राष्ट्र का विकास कर सकेगा
Rajeshwari Rathore
The Fabindia School, Bali

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