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Friday, July 24, 2020

प्रकृति का मानव जाति को पाठ - Aysha Tak

प्रकृति का मानव जाति को पाठ पढ़ाने का अपना तरीका है।  जब कठिन पाठ पढ़ाया जाता है , तो प्रकृति भी एक
कठोर शिक्षक बन जाती है। कोविड - 19 अभी हमारे लिए प्रकृति द्वारा पढ़ाया जा रहा सबसे कठिन पाठ है। इस महामारी ने हमें यह सिखाया है कि हम यह सुनिश्चित करें कि हम शिक्षण प्रदान करने के सभी रास्ते तलाशते रहते हैं। शिक्षक कभी भी हार मानकर नहीं बैठते हैं। वह अपने विद्यार्थियों की सहायता एवं देखभाल के लिए विभिन्न रास्ते तलाशते रहते हैं। उनमें से अभी के समय में एक रास्ता जो शिक्षकों ने तलाशा वह है ऑनलाइन शिक्षा का। इसके लिए पहले शिक्षकों को खुद को सब कुछ सीखना पड़ा ,ताकि वह विद्यार्थियों को अच्छे तरीके से ऑनलाइन शिक्षा दे सकें।

 सीखने की कोई उम्र नहीं होती है और ना ही सीखने का कभी अंत होता है। सीखना - सिखाना ताउम्र चलता रहता है। अभी जो हम यह ऑनलाइन शिक्षा चला रहे है यह भी प्रकृति की ही मेहरबानी है। अगर ऐसी स्थिति नहीं आती तो अभी हम ऑनलाइन शिक्षा नहीं कर रहे होते। पहली बार ऑनलाइन क्लासरूम दुनिया पर राज कर रहे हैं। उपस्थिति हमारे लिए हमेशा सबसे बड़ी चुनौती रही है। इस कठिन समय में जब विद्यालय बंद है। उसके बावजूद भी उनके अध्यापक दिन - रात मेहनत करके उनके लिए पढ़ाने के नए - नए तरीके खोजकर योजनायें बनाकर उनको पढ़ा रहे हैं।तो विद्यार्थियों का यह कर्त्तव्य बनता है कि वे नियमित अपनी कक्षाओं में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएँ और जो भी सिखाया जाता है, पूर्ण ईमानदारी से सीखने का प्रयत्न करें। कुछ पाठों को कठिन तरीके से सिखाया जाता हैं ,लेकिन हमें सीखना चाहिए और कोविड - 19 सम्पूर्ण मानवजाति के लिए गंभीर रूप से सीखने वाला सबक है। 

आयशा टाक
The Fabindia School
atk@faidiaschools.in

Monday, May 25, 2020

सीखने को रोक नहीं सकते - सुरेश सिंह नेगी

कोविड -१९ के इस दौर में जंहा लोग घर के अंदर रहने को मजबूर हैं, वंही दूसरी ओर कुछ लोग ऐंसे भी हैं जो
घर पर ही बैठकर ऑनलाइन काम कर रहे हैं।  जो  इंसान  पहले  फोन का उपयोग बहुत कम करता था।  वह भी अब इसका उपयोग ज्यादा से ज्यादा करने लगा है,  और करे भी क्यों न काम ऑनलाइन जो करना पड़ता है, या फिर समय व्यतीत करने  के लिए कुछ न कुछ तो करना ही है।

जंहा विद्यालय विद्यार्थीयों   को   ऑनलाइन पढाने  का भरपूर प्रयास कर  रहें है।   वंही   माता -पिता भी अपने बच्चों का पूरा साथ दे रहें है।  उनमें  से कुछ माता -पिता तो ऐंसे  भी हैं, जिन्होंने अपने बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रहने  के लिए  बाजार  के बंद  होने के बावजूद  भी स्मार्ट फोन  खरीदा है।  इस समय की मार सबसे ज्यादा विद्यालय प्रबंधन, शिक्षक और अभिभावक  पर पडी है ।  अब तो ज्यादातर शिक्षकों का  फ़ोन  भी रुक -रुक चलने   लगा है और वह दिन भर इतना गर्म रहता है, कि लगता है की कभी भी फट सकता है।

हालांकि इसके विपरीत अच्छी बात यह है कि हमें तकनीकी  के क्षेत्र  में काफी कुछ नया सीखने को मिला  है। जिसमे से गूगल कक्षा में अपने फोन की स्क्रीन कैसे दूसरों से शेयर करतें हैं। ऑनलाइन पढ़ाई तो हमने  बहुत देखी थी पर ऑनलाइन कैंसे पढ़ाया जाता है यह भी हमने इसी समय सीखा है।

अंत में मै उन विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों और अभिभावकों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में और कम  संसाधनों के चलते  अपने  बच्चों  की पढ़ाई के प्रति एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 

सुरेश सिंह नेगी
The Fabindia School 

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