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Wednesday, January 16, 2019

Jaffar Khan: भरोसा (TRUST) & सादगी (SIMPLICITY)


 भरोसा  (TRUST)
विश्वास क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?                
वंचित लोगों से निपटने के दौरान भरोसा और सम्मान का मौलिक महत्व भी हैं। वे कमजोर और अकसर खो जाते हैं और अकेले होते हैं। उनकी गरिमा के लिए यह महत्वपूर्ण है कि जब आप उन्हें मदद कर रहे हों, तो वे आपको किसी ऐसे व्यक्ति के रूप में देख सकते हैं जिस पर वे निर्भर हो सकते हैं।

रिश्ते में विश्वास क्यों महत्वपूर्ण है?
 भरोसा  एक स्वस्थ रिश्ते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन यह कई अलग-अलग कारणों से कई लोगों के साथ अलग-अलग तरीकों से संघर्ष करता है।  किसी पर भरोसा करना मतलब है कि आपको लगता है कि वे भरोसेमंद हैं, आपको उन पर भरोसा है और आप शारीरिक और भावनात्मक रूप से उनके साथ सुरक्षित महसूस करते हैं।


सादगी (SIMPLICITY)
मेरे जीवन में सादगी का महत्व
आमतौर पर यह कहा जाता है कि 'सादगी' एक गुण है, हम में से कई यह भी मानते हैं कि यह एक सुंदर चीज़ है। लोगों को महात्मा गांधी की सादगी पसंद थी, जिस तरह से उन्होंने कपड़े पहने थे, जिस तरह से वह रहते थे और जिस तरह से उन्होंने खुद को प्रस्तुत किया था। उन्हें वास्तविक जीवन में सादगी के प्रतीकों में से एक माना जाता है। मैं सादगी पसंद करता हूँ लेकिन मैं इसे दिखाने के लिए इसे नहीं करता हूँ लेकिन मुझे वास्तव में  यह जीवन के तरीके के रूप में पसंद है।  सादगी की अधिक सराहना की जाती है यदि यह जीवन का तरीका बन जाए।


Jaffar Khan, The Fabindia School, Email: Zkn4fab@gmail.com



Sunday, September 23, 2018

मनमानवेंद्र: एक बुद्धिमत्ता दिल की और एक बुद्धिमत्ता दिमाग की


एक  बुद्धिमत्ता  दिल  की और एक बुद्धिमत्ता  दिमाग की, दोनों के अपने- अपने मायने है और दोनों का असल जिंदगी में बहुत महत्व है,क्योंकि दिल हमें रिश्ते मजबूत करना सिखाता है और दिमाग उन रिश्तों को बनाए रखना सिखाता है। 
दिल और दिमाग चाहे शरीर के अलग-अलग स्थान  पर है लेकिन दोनों ही हमें फैसला लेने में मदद करते हैं वैसे तो हम हमेशा अपनी दिमाग की सुनते है लेकिन हमें तनाव या दुख हो तो दिल ही वह काम करता जो दिमाग नहीं कर सकता और उस तनाव से हमें दिल ही बाहर निकलता है। कबीर दास जी ने कहा है कि "पोथी पढ़ी -पढ़ी जग मुआ पंडित भया कोई। ढाई अक्षर प्रेम के पढ़े सो पंडित होय यानी  कि चाहे कितनी भी पुस्तकें आदि पढ़ लो लेकिन जब तक प्रेम से काम नहीं लेंगे वास्तविक विद्वान नहीं बन सकते। मेरे विचार  किसी के पक्ष या विपक्ष में नहीं है बल्कि जो सच्चाई है और दोनों का जो महत्त्व होता है वह बता रहा हूँ। 
सभी जीवो से इंसान आज बहुत आगे है क्योंकि इंसान के पास दिमाग (विकसित) है अन्यथा दिल तो सभी जीवों के पास है। वहीं दूसरी तरफ अगर देखे तो दिल का भी उतना  महत्त्व है जितना कि दिमाग का,क्योंकि इंसान बुद्धिहीन दिमाग से तो जिंदा रह सकता है लेकिन बिना दिल के इंसान एक पल भी जिंदा नहीं रह सकता। इसलिए दोनों अपनी -अपनी जगह पर ठीक है और मेरा मानना है कि जब भी कोई तनाव -पूर्ण स्थिति में फैसला लेना हो तो हमेशा दिमाग की सुनें और जहाँ स्थिति  रिश्तों की हो वहाँ अपने दिल की सुनो तभी हम सही मायनों में कोई सही फैसला ले पाएँगे। 
लेकिन लोगों का मानना है कि दिमाग ऊपर स्थित है और इसलिए हमेशा दिमाग की सुननी चाहिए कि दिल की ताकि हम भावनात्मक होकर फैसला ले सकें लेकिन मेरे विचार लोगों के विचारों से विपरीत है क्योंकि कभी -कभी रिश्तों की गरिमा बनाए रखने के लिए दिल से भी फैसला लेना पड़ता है। 
उदाहरण के तौर पर देखे तो एक खिलाडी के जीवन में फिटनेस बहुत जरूरी है लेकिन कभी-कभी उसका दिल ऐसी चीजें खाने का करता जो उसके सेहत के लिए सही नहीं है और उस समय उसका दिमाग उसे रोकता है और कहता है यह सही नहीं तो कहने का अर्थ है दोनों ही दिल और दिमाग कुछ भी फैसला लेने में बहुत मदद करते है और एक तरफ से हमारा दिमाग दिल के अनुरूप काम करता है। लेकिन जब हम सिर्फ एक की ही सुनते हैं या तो दिल की या दिमाग की तब वहाँ हमारा लिया हुआ फैसला गलत भी हो सकता और इसलिए हमें हमेशा दोनों की सुननी चाहिए और फिर फैसला लेना चाहिए और तभी हम यह कह सकते है कि "एक बुद्धिमत्ता दिल की और एक बुद्धिमत्ता  दिमाग की
                                                                        मनमानवेंद्र सिंह /कक्षा 12 - The Fabindia School

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