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Tuesday, July 27, 2021

सफलता और कड़ी मेहनत: आयशा टॉक

Courtesy- www.mything.in
सफल लोग वहीं करते हैं, जो उन्हें अच्छा लगता हैं। और वे वहीं करते है जो उन्हें अपने व्यवसाय के लिए सही लगता है। यदि आप शब्दकोश में सफलता शब्द का अर्थ देखें तो आप पाएँगे कि इसका अर्थ किसी के लक्ष्य या लक्ष्य की प्राप्ति है। तो मूल रूप से कोई भी अपने लक्ष्य को प्राप्त करके ही सफलता प्राप्त कर सकता है। लोग अपनी सफलता का मूल्यांकन करने के लिए विभिन्न लोगों के प्रदर्शन की तुलना करते है।

लेकिन सफलता कोई ऐसी चीज़ नहीं है, जिसे आप दूसरों से कॉपी कर सकते हैं। सफलता पाने के लिए आपको अपना रास्ता खुद बनाना होगा। यह कुछ लोगों को अनुपयुक्त लग सकता है, लेकिन सफलता मेहनत पर निर्भर करती है। बिना मेहनत किये आप सफल नहीं हो सकते है। कड़ी मेहनत का मतलब ये नहीं है कि आप कोई ऐसा मेहनती काम करें जिससे आपको पसीना आए।


कड़ी मेहनत का मतलब है स्वस्थ शरीर, मजबूत दिमाग, इच्छाशक्ति और चीजों के प्रति सकारात्मक रवैया रखना। उन सभी चीजों के लिए आपको ऊर्जा की जरूरत होती है। इसलिए, अपने शरीर और आत्मा के प्रति चौकस रहें। इसके अलावा केवल अपने कार्यक्रम पर कार्य न करें, अपनी कार्य सीमा को आगे बढ़ाएँ, अन्य चीजों का प्रभार लें, अपने कौशल में सुधार करें और सबसे महत्त्वपूर्ण बात सीखते रहें।


इसके अलावा सकारात्मक लोगों के साथ रहें, सकारात्मक आदतें विकसित करें और न केवल अपने शरीर बल्कि अपने दिमाग के लिए भी व्यायाम करें। संक्षेप में हम कह सकते है कि सफलता एक बीज की तरह है जिसे जीवन के सभी तत्वों के संतुलित अनुपात की आवश्यकता होती है। कोई भी व्यक्ति एक दिन में सफलता प्राप्त नहीं कऱ सकता है और सफल होने के लिए उसे जीवन में विभिन्न परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। सबसे बढ़कर सफलता तृप्ति की भावना है जो अपने लक्ष्य को प्राप्त करते समय महसूस करते है।


Ayasha Tak

atk@fabindiaschools.in

The Fabindia School, Bali

Sunday, May 17, 2020

साहसी व्यक्ति का धैर्य: कृष्ण गोपाल


जो किसी से डरे वह साहसी है, ये साहस की परिभाषा नहीं है। हर व्यक्ति के भीतर भी डर रूपी चिनगारी दिखाई पड़ती है  किन्तु जो डर को जीत ले वही साहसी है।  कई बार काम करने से पहले हम कतराते हैं।  एक प्रश्न मस्तिष्क में कौंध ही जाता है -'मुझे सफलता नहीं मिली तो, कहीं मैं हार तो नहीं जाऊँगा ?' इस डर को जीतना ही साहस है।  कभी यह स्मरण नहीं रहता कि यदि हार गए तो एक नया अनुभव मिलेगा।  जीत गए तो प्रयास सफल होगा ही।

 सच्चा साहसी वही है जो अपनी सफलता का धैर्य से प्रतीक्षा करे।  विद्यार्थी के लिए ये दोनों मूल्य आवश्यक है।एक नन्हा बालक खूब अभ्यास करता है, तब कहीं जाकर लिखने के लिए तैयार होता है।  ऐसे नन्हे बालकों के शिक्षक भी धैर्य की प्रतिमा होते हैं। एक खिलाड़ी लगातार अभ्यास करता है, तब कहीं जाकर उसे प्रदर्शन करने का अवसर मिलता है।  ठीक ऐसे ही एक गायक नियमित साधना करता है। ये सब धैर्य से ही संभव हो सकता है। 

दशरथ मांझी ने पहाड़ तोड़ने का साहस दिखाया, धैर्य भी रखा।  कई लोग उसके काम पर हँसे भी, समय भी बहुत लगा किन्तु उसने यह प्रण  छोड़ा।  जो ठाना वह करके दिखाया।  मुश्किलें भी आयी होगी पर पीछे मुड़कर नहीं देखा।  इसलिए आज वह साहस और धैर्य का पर्याय बन गया।  हम अपनी गलतियों को स्वीकार करने में घबराते हैं। 

यदि गलतियों को स्वीकारा जाए तो साहसी व्यक्ति कहलाएँगे  बच्चे भी कतराते हैं, उनका मार्गदर्शन करना चाहिए।  अपनी गलतियों को स्वीकार करना और उससे प्रेरणा लेना कि भविष्य में इस गलती को दोहराया नहीं जाएगा। साहस और धैर्य दोनों ऐसे मूल्य है, जिसको अपनाकर व्यक्ति सफलता की ओर अग्रसर होगा ही। विद्यार्थियों को आने वाले समय में कई सफलताएँ अर्जित करना है। अतः इन मूल्यों की विशेष आवश्यकता जान पड़ती है। विद्यार्थियों को राह दिखाने की जिम्मेदारी शिक्षकों और अभिभावकों की है।  अतः यह भी आवश्यक हो जाता है कि सर्वप्रथम ये मूल्य शिक्षकों और अभिभावकों में विकसित हो। 
Krishan Gopal
The Fabindia School

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