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Monday, June 21, 2021

कोरोना काल मे शिक्षा का स्वरूप और प्रभाव- कुसुम डांगी

m.patrika.com

हमारा देश डिजिटल युग में काफी पहले की प्रवेश कर चुका हैं। लेकिन कोरोना काल में इसमें काफी बढ़ोतरी हुई हैं। कोरोना काल के दौरान देशभर में हुए लॉकडाउन ने शिक्षा का पूरा स्वरूप ही बदल दिया हैं। जो बच्चे कल तक बैग लेकर विद्यालय जा रहे थे वे सब आज घर पर रहकर न सिर्फ ऑनलाइन पढाई कर रहे हैं बल्कि वे घर बैठे ही परीक्षा देने के साथ ही अपनी उपस्थिति भी दर्ज करा रहे हैं।

लेकिन दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे शिक्षा से काफी वंचित रह रहे हैं क्योंकि न तो उनके पास ऑनलाइन पढ़ने के साधन हैं और न गाँवों में नेटवर्क की उचित व्यवस्था हैं तथा सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले वंचित समुदाय के बच्चों के लिए पर्याप्त साधन और इंटरनेट डाटा जुटाना मुश्किल हो जाता हैं। ऐसी परिस्थिति में देश का एक भाग शिक्षा से वंचित रह जाएगा। हमारा देश प्रगति कैसे कर पाएगा, यह विचारणीय है। 

जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं है और जो इंटरनेट एक्सेस नहीं कर सकते स्थानीय प्रशासन की तरफ से ऐसे परिवार के बच्चों को छोटा-मोटा एजुकेशन किट बनाकर देना चाहिए जो उनके घर जाकर दिया जाए ताकि कोई भी शिक्षा से वंचित न रहे और सबको शिक्षा के अवसर मिलते रहे। किसी न किसी माध्यम से ऐसे बच्चों की मदद की जानी चाहिए।

Kusum Dangi
The fabindia School
kdi@fabindiaschools.in


Tuesday, April 14, 2020

आशा: आयशा टॉक

आशा का हमारे जीवन में बहुत महत्त्व है। एक व्यक्ति अपने परिवार की सभी जरूरतों और इच्छाओं को पूरा करने के लिए, पैसा कमाने के लिए काम करता है। यही आशा है कि वह उन्हें खुश करेगा। आशा वास्तव में हमें कुछ करने का कारण देती है। संसार में प्रत्येक प्राणी एक-दूसरे से कुछ न कुछ उम्मीद रखता है। जैसे- एक बीमार व्यक्ति डॉक्टर से आशा रखता है कि ये मुझे स्वस्थ कर देगा।  

एक छात्र अपने अध्यापक से उम्मीद रखता है कि मेरा अध्यापक मुझे कभी अनुत्तीर्ण नहीं होने देगा। परन्तु अध्यापक भी छात्रों से उम्मीद रखते हैं कि वे उनको जो भी कार्य दे छात्र उसे समय पर पूरा जरूर करें एवं प्रत्येक परीक्षा में खरा उतरने का प्रयास करें । यहाँ तक कि एक जानवर भी इंसान से उम्मीद रखता है कि इंसान खुद खाने के बाद में ही सही मुझे भी कुछ खाने को जरूर देगा। इसी तरह माता-पिता भी अपने बच्चों से उम्मीद रखते है कि हमारे बच्चे जीवन में सफल हो और हमारा कहना माने और जिस तरह से हमने उनका ख्याल रखा वे भी हमारा रखें एवं नेकदिल व जिम्मेदार इंसान बनें। तो  सभी बच्चों से यहीं कहना है कि अपने अध्यापकों एवं अभिभावकों की उम्मीदों पर खरा उतरने का और सफलता प्राप्त करने का भरपूर प्रयास करें और सभी क्षेत्र में सफलता पाएँ। अभी जो कोरोना वायरस का कहर और लॉकडाउन का माहौल है, ऐसे में हम लोग भी अपने ईश्वर / खुदा से उम्मीद करते है कि यह वायरस बहुत जल्दी नष्ट हो जाए और हम हमारी पहले वाली रोजमर्रा की जिंदगी में फिर से लौट सकें। 
घर में रहे, सुरक्षित रहे, अपना ख्याल रखें।
Ayasha Tak
Atk4fab@gmail.com
The Fabindia School , Bali

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