Showing posts with label examplary. Show all posts
Showing posts with label examplary. Show all posts

Thursday, May 31, 2018

एक हँसी जिंदगी जीने का तरीका

यूँ जमीन पर बैठकर क्यों आसमान देखता है
पंखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है
लहरों की तो फितरत ही है शोर मचाने की
मंज़िल उसी की होती है जो नजरों में तूफान देखता है ।

एक बार एक जोकर ने दर्शकों से भरी हुई सर्कस में एक बहुत ही लाजवाब जोक सुनाया, जोक इतना शानदार था कि हँसते-हँसते दर्शकों की आँखों से आँसू गिरने लगे, दर्शक जब शांत हुए तो जोकर ने फिर से वहीँ जोक  उससे भी ज्यादा जोश के साथ सुनाया, एक बार फिर दर्शकों के चेहरे पर हँसी आ गयी,  जोकर ने फिर वही  जोक तीसरी बार सुनाया, इस बार दर्शकों की हँसी केवल मुस्कान में बदल गयी, और जोकर ने जब चौथी बार इसी जोक को फिर से सुनाया तो किसी दर्शक को हँसी नहीं आई। 

भीड़ में से एक दर्शक चिल्लाया “ क्यूँ बार-बार एक ही जोक सुना कर बोर कर रहे हो। ”तब जोकर ने  वहाँ बैठे लोगों से पूछा: जब मेरे एक जोक पर आप बार-बार हँस नहीं सकते तो फिर आप अपनी  जिंदगी में की गयी एक ही गलती को बार-बार सोच कर क्यूँ परेशान होते रहते हैं, क्यूँ एक ही चीज  को लेकर एक ही जगह पर रूक जाते हैं और जिंदगी में आगे नहीं बढ़ते. याद रखो कि-हम इंसान हैं  गलतियाँ करना हमारी फितरत में है, इन्ही गलतियों से हम सीखते हैं और आगे बढ़ते हैं। 

इस दुनिया का हर आविष्कार किसी न किसी के द्वारा की गयी गलतियों से सीखने का ही परिणाम है, एक छोटे से बिजली के बल्ब से लेकर इस दुनिया का बड़े से बड़ा जहाज तक, कुछ भी पहली बार में परफेक्ट नहीं था, इन्हें बनाने में लोगों ने बार-बार गलतियाँ की फिर उन गलतियों से सीखा और आगे बढ़ते  चले गये, इस दुनिया के हर महान कहलाने वाले इंसान ने अपनी जिंदगी में बहुत बड़ी-बड़ी  गलतियाँ की हैं लेकिन वो कभी रूके नहीं।

फिर आप लोग अपनी छोटी-छोटी गलतियों को लेकर क्यूँ हमेशा खुद को कोसते रहते हो, क्यूँ अपने चारों  ओर एक अनदेखी सी दीवार खडी कर रक्खी है, याद रखिये आप इंसान हैं, और इंसान का इतिहास है कि वो जबसे वजूद मेंआया तबसे उसने गलतियाँ की और उनसे सीखते हुए आज इस मुकाम तक पहुँचा, इसलिए  अपनी की हुई गलतियों के लिए खुद को जिंदगी भर सजा मत दीजिये। अपनी गलतियों से सीखो और आगे  बढ़ जाओ – ये खुबसूरत जिंदगी आपकी तरफ बाँहें फैला कर खड़ी है आगे बढ़ो और लगा लो इसे सीने से!
उसमान गनी , The Fabindia School, Bali 
Email ugi4fab@gmail.com

Blog Archive