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Tuesday, July 27, 2021

Thoughtfulness and Understanding - Asha Bhandari

विचारशीलता और समझदारी
कक्षा में पढ़ाने से पहले हमें यह खुद भी समझ लेना है कि हम जो बच्चों को सिखाने जा रहे हैं वह बच्चों की समझ में आ रहा है या नहीं ।हमें खुद भी बच्चों की समझ के हिसाब से काम देना चाहिए हमें हमें काम बच्चों की समझ के हिसाब से ही कराना चाहिए जिस प्रकार हम कक्षा में पहले दिन केवल परिचय ही से शुरु करते हैं ।जब कोई बच्चा किसी आसान कार्य को कर देता है तो उसका उत्साह बढ़ जाता है और धीरे-धीरे हम बच्चे की क्षमता को देखते हुए अभ्यास कराते हुए आगे बढ़ते हैं ।जब धीरे सीखने वाला बच्चा थोड़ा अच्छा सीखता है तो हमें उसे उत्साहित करना चाहिए इससे बच्चों के अंदर सीखने की इच्छा जागृत हो जाती है ।और  उनके अंदर की डर  समाप्त हो जाती है ।बच्चा किसी टीचर के सामने अपने मन की बात कहने मे सहज नहीं होता है लेकिन अपने साथी से वह अपनी समस्या को आसानी से कह देता है ।बच्चे आपस में एक दूसरे की समस्या को सुनते हैं और उसका समाधान ढूंढने की कोशिश करते हैंI

परवाह
अगर कोई बच्चा किसी कारण से रोज स्कूल देर से आता है या ग्रह का है पूरा नहीं करता है तो टीचर को पता करना चाहिए कि बच्चे की क्या समस्या हो सकती है। कभी किसी के घर का माहौल पढ़ाई के अनुकूल नहीं है या घर में कोई सदस्य बीमार है तो भी बच्चे की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है इसके लिए बच्चे के साथ प्यार या दोस्ती का रिश्ता बनाना चाहिए। बच्चे को सहारा देकर कहानी या किसी महापुरुष की जीवन गाथा सुना कर बच्चे को प्रोत्साहित करना चाहिए। जैसे लगातार कोशिश करने पर एक चींटी भी दीवार के ऊपर चढ़ जाती हैं उसी प्रकार धीरे सीखने वाला बच्चा भी अच्छा कर जाता है।  बच्चे का विश्वास अपने अभिभावक से ज्यादा टीचर पर होता है वह अपने मन की बात टीचर से बेझिझक करता है और आशा करता है की टीचर उसका सही मार्गदर्शन करेंगे। हम बच्चों को खेल के माध्यम से भी प्रोत्साहित कर सकती हैं। खेल में बच्चों को हार जीत पर ध्यान न देकर अपना बेहतर प्रयास देना चाहिए। कक्षा में भी जो बच्चे होशियार हैं उन्हें दूसरे बच्चों का भी ध्यान रखना चाहिए। इससे बच्चों के मन में दूसरों की परवाह करने की भावना पैदा हो जाती है।। कक्षा में बच्चों को दो टीम में बांट कर अंताक्षरी या कोई खेल खिला कर भी प्रोत्साहित किया जा सकता है हमें समय-समय पर बच्चों को क्लास रूम से बाहर लाकर कोई खेल या कंपटीशन अवश्य कराना चाहिए।इससे बच्चों का रुझान भी पता लग जाता है।। कभी-कभी कोई बच्चा पढ़ाई में ज्यादा अच्छा नहीं होता लेकिन दूसरी एक्टिविटी में वह बेहतर करता है और अपने जीवन में आगे बढ़ जाता है।

- Asha Bhandari@JMMS, John Martyn Memorial School, Salangaon, Dehradun 

Friday, November 13, 2020

मेरा प्रिय त्योहार दीपावली - राजेश्वरी राठौड़

सभी त्त्योहार  हर्षोल्लास के साथ मनाया जाते हैं पर मेरा पसंदीदा त्योहार दीपावली है। दीपावली का त्योहार सभी के जीवन को खुशी प्रदान करता है नया जीवन जीने का उत्साह प्रदान करता है। यह त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। अमावस्या के दिन अंधेरी रात जगमग असंख्य दीपों से जगमग ने लगती है। यह त्योहार पांच दिनों तक मनाया जाता है। धनतेरस से भाई दूज तक यह  त्योहार चलता है। अमावस्या यानी कि दिवाली  का मुख्य दिन इस दिन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है खील बताशे का प्रसाद चढ़ाया जाता है। 

इस त्योहार  के कई दिनों पहले से ही घरों की सफाई लिपाई- पुताई सजावट प्रारंभ हो जाती हैं मिठाइयां तरह तरह की बनाई जाती है। इस दिन देवी लक्ष्मी जी की पूजा की जाती हैं इसलिए उनके आगमन और स्वागत के लिए घरों की सजावट की जाती है इस दिन भगवान श्री राम माता सीता और लक्ष्मण चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके अपने घर अयोध्या लौटे इस खुशी में अयोध्या वासियों ने अपने घरों में दिए जलाकर खुशियां मनाई जब से दीपावली का पर्व बड़े हर्ष उल्लास से मनाया जाता है।

 इस दिन सभी नए कपड़े पहनते हैं दुकानों बाजारों और घरों की सजावट दर्शनीय रहती है। अगले दिन परस्पर भेंट का दिन होता है एक दूसरे को दीपावली की शुभकामना दी जाती है लॉग छोटे-बड़े  अमीर गरीब का भेद भूलकर आपस में मिलजुल कर त्योहार मनाते हैं त्योहार जीवन में खुशियां प्रदान करता है और नया जीवन जीने का उत्साह प्रदान करता है।

राजेश्वरी राठौड़
The Fabindia School
rre@fabindiaschools.in

Sunday, June 14, 2020

आशा और मित्रता: जफ्फर खान


आशा जीवन रूपी फूल की सुगंध हैं, किसी कार्य या बात को पूर्ण हो जाने की उम्मीद को आशा कहते हैं। जहाँ आशा हैं, उत्साह हैं, वहीं सफलता है कार्य कैसा भी हो यदि मनुष्य आशा और उत्साह के साथ काम करता है तो निश्चय ही सफलता आनंद दोनों प्राप्त होते हैं | मनुष्य को अपना सुखी जीवन जीने के लिए सकारात्मक सोच रखनी चाहिए जीवन में 'रात दिन' की तरह आशा और निराशा के क्षण आते-जाते रहते हैं मनुष्य जिस तरह की भावना रखता है वैसी ही  प्रेरणाएँ मिलती हैं

आशा वह दीपक हैं जो कठिनाइयों में भी बुझता नहीं है, आत्मा से शक्ति पाकर निरंतर जलता रहता है सच्ची मित्रता रंग रूप नहीं देखती हैं मित्रता जीवन को रोमांच से भर देती हैं मित्र के होने पर हम खुद को अकेला महसूस नहीं करते हैं व्यक्ति अपने जन्म से ही अपनों के साथ रहता है, खेलता है, उनसे सीखता है पर हर बात व्यक्ति हर किसी को नहीं बताता है। वह केवल अपने सच्चे मित्र को ही अपने मन की बात बताता है मित्र हमें समय-समय पर जीवन की कठिनाइयों से लड़ने में सहायता प्रदान करता है

हमारे व्यक्तित्व के निर्माण में दोस्तों की मुख्य भूमिका होती हैं हम अपना सुख दु: तथा हर तरह की बातें उसी के साथ बाँट सकते हैं, जो हमारे मित्र होते है। मित्रता जीवन के किसी भी पड़ाव में हो सकती हैं सच्ची दोस्ती हमको सदैव सही मार्ग दिखाती हैं - जैसे मोती की माला के टूट कर बिखर जाने पर हम उन्हें बार-बार पिरोते हैं क्योंकि वह मूल्यवान हैं, ठीक उसी प्रकार सच्चे मित्र भी मूल्यवान होते हैंउनकी मित्रता हमें बनाए रखनी चाहिए संसार में कई दोस्त होते हैं जो हमेशा अपने मित्रों की समृद्धि के समय ही साथ रहते हैं, लेकिन केवल सच्चे, ईमानदार और वफादार दोस्त ही होते हैं, जो हमें कभी भी हमारे जीवन में कठिनाई और मुश्किल के समय में अकेला नहीं होने देते हैं और हमारा साथ देते हैं तथा मनोबल बढाते है। सच्चे मित्र ही बिना विचार किए  हमको संकट में देखकर मदद के लिए आगे जाते हैं
Jaffar Khan
The Fabindia School, Bali

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