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Sunday, September 28, 2025

उत्पादक विफलता का तीन-स्तरीय ढांचा - रवि प्रकाश

 उत्पादक विफलता के लिए तीन-स्तरीय ढांचा (कार्य, भागीदारी, सामाजिक परिवेश)

स्तर 1

  • सीखने वालों को विफलता के लिए तैयार करना: छात्रों को जोखिम लेने और विफलताओं को सीखने के अवसर के रूप में देखने के लिए प्रोत्साहित करना।

  • विकासशील मानसिकता का निर्माण: ऐसी मानसिकता को बढ़ावा देना जो मानती है कि क्षमताएँ प्रयास और सीखने के माध्यम से विकसित की जा सकती हैं।

स्तर 2

  • प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करना: सीखने वालों को केवल परिणाम पर नहीं, बल्कि समस्या-समाधान की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करना।

  • प्रयोग और अन्वेषण: सीखने वालों को विभिन्न समाधानों का प्रयोग और अन्वेषण करने के अवसर प्रदान करना।

स्तर 3

  • सीखने को संकलित करना: सीखने वालों को अपने अनुभवों पर चिंतन करने और प्रमुख निष्कर्षों की पहचान करने में मदद करना।

  • ज्ञान का पुनर्निर्माण: सीखने वालों को अपने अनुभवों के आधार पर अपने ज्ञान और समझ का पुनर्निर्माण करने के लिए प्रोत्साहित करना।

इस ढाँचे का उद्देश्य छात्रों के भीतर सहयोग की भावना विकसित करना, विभिन्न परिस्थितियों में सोचने की क्षमता बढ़ाना और समस्या-समाधान कौशल को सशक्त बनाना है।

सनबीम ग्रामीण स्कूल
रवि प्रकाश

Wednesday, July 29, 2020

विचारशीलता और समझ: राजेश्वरी राठौड़


विचार का अर्थ है किसी बात पर चिंतन के लिए अपने दिमाग का उपयोग करने की प्रक्रिया है। मनुष्य जब भी कोई कार्य करता है तो वह पहले सोच विचार करता हैअच्छे बुरे कार्य के बारे में सोचता हैइस कार्य से क्या परिणाम मिलेगा सोच विचार करके ही कार्य करेगाइस तरह शिक्षा के स्तर में भी एक शिक्षक जब अपने विषय का पाठ्यक्रम और पाठ योजना पर पूर्ण रूप से सोच विचार करके विद्यार्थियों को शिक्षा देता है।

विद्यार्थी का जब मूल्यांकन किया जाता है विद्यार्थी विषय ज्ञान को समझ कर विचार करके परीक्षा देता हैइसी तरह मानव सामाजिक प्राणी है, वह कोई भी कार्य करता है तो उस पर विचार अवश्य करता हैबाद में कार्य की रूपरेखा तैयार करता हैवह कार्य की पूर्ण योजना बनाकर करता हैचाहे कोई भी हो इन विचारों को समझकर ही कार्य करता है। तब ही एक मनुष्य अपने कार्य में सफलता पाता है।

समझ के अनेक नाम है बुद्धि, विचार, खयाल, हमति, जानना, तालमेल, इत्यादि। समझ का अर्थ स्पष्टीकरण या कारण जानने के लिए कोई कार्य करनामनुष्य द्वारा किसी के स्वभाव और संवेदना को समझना किसी के व्यवहार को जानना और विचार करके कार्य करना होता हैएक छात्र की शिक्षा को सुचारू रूप से चलाने के लिए छात्र की भावनाओं को अध्यापक व अभिभावक को समझ कर चलना चाहिएजब शिक्षक व अभिभावक छात्र के स्वभाव या व्यवहार को जानेगा व उसे हँसी खुशी व भरोसा देगे। तब ही छात्र आगे बढ़ेंगे। परिवार हो या समाज, घर या कार्यालय मे हो, सभी में व्यक्ति को एक दूसरे को समझना चाहिए। तभी कार्य सही तरीके से व सुचारू रूप से चलेगाव्यक्ति के किसी भी कार्य में विचाशीलता और संयम उसके आधार स्तंभ होते है।
Rajeshwari Rathore
The Fabindia School, Bali

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