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Thursday, September 23, 2021

दूसरों को खुश रखना : आयशा टॉक

हम दूसरों को खुश रखने की कोशिश करते हैं। क्योंकि इससे हमें आत्म संतुष्टि मिलती हैं। यह हमें अपने बारे में अच्छा महसूस कराता है या हमारे जीवन को अर्थ देता है। अगर आप दूसरों को खुश रखना चाहते है तो सर्वप्रथम आपकी खुद की खुशी बहुत जरुरी है। कहने का मतलब यह है कि यदि आप दुखी  है तो आप किसी को खुश नहीं कर सकते है। प्यार किसी भी रूप में हमारे जीवन में खुशियाँ लाता है।

दोस्तों, परिवार और अन्य लोगों के साथ आपके स्वस्थ संबंध आपके जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर सकते है और जीवन में खुशियाँ ला सकते हैं। जैसे कि हमारी जिंदगी में एक ऐसा पल जरूर आता है कि हमारी वजह से किसी को खुशी जरूर मिलती है। मेरे जीवन का एक ऐसा ही पल मैं आपके साथ में साझा कर रही हूँ।

हमारे मोहल्ले में एक बहुत ही गरीब परिवार रहता था। उनके पास में कमाई का कोई भी जरिया नहीं था। सभी लोग उन्हें घृणा की दृष्टि से देखते थे। कोई भी उनकी मदद नहीं करना चाहता था। परन्तु मुझे उस गरीब परिवार पर बहुत दया आती थी।

एक दिन मैंने उनकी सहायता करने की सोची और उनके लिए कुछ कपड़े और कुछ खाने का सामान खरीद कर उनके घर गई। जब मैंने उनको वो सामान दिया तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा और वो लोग बस मुझे दुआएँ देते नहीं थक रहे थे। उस दिन उन लोगों को इतना खुश देखकर मुझे उनसे भी ज्यादा खुशी का अनुभव हो रहा था। सच में दूसरों को खुशी देने से एक अलग ही प्रकार के सुख की अनुभूति होती है।

Ayasha Tak
The Fabindia School, Bali
atk@fabindiaschools.in

Tuesday, June 29, 2021

एकता और देखभाल - रेनू खंडूरी

एकता और देखभाल एकता में शक्ति होती है, ये हम बचपन से आज तक सुनते आयें हैं ।अच्छी सोच की एकजुटता से किया गया कार्य हमेशा सफल होता है और गलत सोच की एकता आपको नुकसान पहुंँचा सकती है ।जब हम किसी कार्य को अकेले करते हैं तो वह कार्य उतना अच्छा नहीं होता जितना हम उसे किसी के साथ मिलकर करते हैं । हमारे हाथ की पाँचों उँगलियाँ अलग-अलग हैं और अलग -अलग वह इतनी शक्तिशाली नहीं हैं परन्तु जब पाँचों उँगलियाँ मिलकर मुठ्ठी बनाती हैं तो यह बहुत शक्तिशाली हो जाती है, फिर ये किसी भी कार्य को कर लेती हैं। एकता के साथ देखभाल का गुण स्वयं ही आता है।हम एक दूसरे की मदद करते हैं ,एक दूसरे की चिन्ता करते हैं अपने हाथ को ही देख लो ,अगर किसी एक ऊँगली को चोट लगती है तो बाकी चार उँगलियाँ उसका ध्यान रखती हैं उसके कार्य को आपस में मिल कर पूरा कर देती हैं । हमें भी मिलजुल कर रहना चाहिए और एक दूसरे की मदद करनी चाहिए । तभी एक अच्छे समाज का निर्माण हो सकता है । एक दूसरे की मदद करने उसकी देखभाल करने में जो आत्म संतुष्टि मिलती है वो शायद ही किसी और चीज से मिले । 

ऋग्वेद के अनुसार : संगच्छध्वं संवदध्वं , सं वो मनांसि जानताम् । देवा भागं यथा पूर्वे ,सञ्जानाना उपासते ।। 

हम सब एक साथ चलें ,एक साथ बोलें हमारे मन्न एक हों, प्राचीन समय मे देवताओं का ऐसा आचरण रहा है इसी कारण वो वंदनीय हैं ।                                                                                                                                                 

रेनू खंडूरी
The Doon Girls' School, Dehradun


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