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Monday, April 28, 2025

आप अपनी गलती को सुधारने पर क्या कदम उठाते हैं? Arthur Foot Academy

मैं अपनी गलती सुधारने के लिए सबसे पहले उस गलती को समझने की कोशिश करती हूँ — कि कहाँ और क्यों गलत हुआ।
फिर मैं सच्चाई से उस गलती को स्वीकार करती हूँ, और उससे सीखकर अपने उत्तर को बेहतर बनाती हूँ।
मैं जीवन में सच्चाई का साथ देकर आगे बढ़ती हूँ।

"गलती करने के लिए कोई भी वक़्त सही नहीं होता,
और गलती सुधारने के लिए कोई भी वक़्त बुरा नहीं होता।"

गलतियाँ करना और कमियाँ स्वीकार करना...
इससे मैंने यह सीखा है कि जीवन में कुछ बड़ा करने की कोशिश में हम कई बार गलतियाँ कर बैठते हैं। यही गलतियाँ और कमियाँ हमें मजबूत भी बनाती हैं। पर कुछ लोग ऐसी गलतियाँ बार-बार दोहराते हैं, जो उचित नहीं है। गलतियों को छुपाने या झूठ बोलने से बेहतर है कि हम अपनी गलती को स्वीकार करें। क्योंकि जब हम अपनी गलतियों को स्वीकारते हैं, तभी हम जीवन में आगे बढ़ सकते हैं।

साक्षी खन्ना

"गलतियाँ करो, बार-बार करो, लेकिन उन्हें स्वीकार करके कुछ बेहतरीन करो।"- Arthur Foot Academy

 

गलतियाँ तो हर इंसान से होती हैं, क्योंकि जब भी हम कुछ नया करने की कोशिश करते हैं, तो यह स्वाभाविक है कि गलतियाँ होंगी। लेकिन हर इंसान अपनी गलती को स्वीकार नहीं कर पाता।

इस पाठ को पढ़ते समय मुझे अपने बचपन की एक बात याद आ गई — जब मैं कक्षा 5 में पढ़ती थी।
हमारे स्कूल में एक बहुत बड़ा बगीचा था जिसमें अनेक प्रकार के फल और सब्जियाँ उगाई जाती थीं।
उस बगीचे की देखरेख की ज़िम्मेदारी हम छात्रों को दी गई थी और हम भी उस ज़िम्मेदारी को अच्छे से निभाते थे।

लेकिन एक दिन शाम को स्कूल में खेलते समय न जाने हमारे मन में क्या आया, और हमने स्कूल के बगीचे से फल-सब्जियाँ चुराकर अपने घर ले आए।
घर पर बहुत डाँट पड़ी। उसी रात मुझे एहसास हुआ कि मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है। मुझे सारी रात नींद नहीं आई।

मैं सोचती रही कि अगर मैंने स्कूल में यह बात बता दी, तो सबके सामने कितनी बेइज्जती होगी और हमारे टीचर्स का जो हम पर विश्वास है, वह भी टूट जाएगा।
लेकिन फिर मैंने खुद से कहा:
"जब इतनी बड़ी गलती की है, तो उसे स्वीकार करने की हिम्मत भी होनी चाहिए।"

सुबह होते ही, मैंने जो कुछ सामान चुराया था, उसे स्कूल वापस ले गई।
215 बच्चों और सभी टीचर्स के सामने बहुत हिम्मत जुटाकर मैं खड़ी हुई और स्वीकार किया कि यह सब मैंने चुराया था।
मैंने कहा, “आप मुझे जो भी सजा देना चाहें, दे सकते हैं।”

एक मिनट के लिए तो पूरा माहौल शांत हो गया... लेकिन उसके बाद जो मेरे लिए तालियाँ बजीं —
वे तालियाँ इसलिए नहीं बजीं कि मैंने चोरी की थी, बल्कि इसलिए कि मैंने अपनी गलती को स्वीकार किया था।

इस अनुभव से मैंने दो बातें सीखी:

  1. जब भी हमसे गलती हो, तो उससे भागना नहीं चाहिए — बल्कि उसे दिल से स्वीकार करना चाहिए।

  2. गुरु और शिष्य का रिश्ता दुनिया में सबसे अलग, पवित्र और अनोखा होता है।

– ललिता पाल

गलती करना प्रकृति है- Arthur Foot Academy

 

"गलती करना प्रकृति है, 
गलती मानना संस्कृति है,
गलती सुधारना प्रगति है।"

इस पाठ के माध्यम से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अगर हम गलती करते हैं, तो हमें उसे दिल से स्वीकार करना चाहिए। क्योंकि इंसान गलतियों का पुतला है। लेकिन समय पर अपनी गलती को स्वीकारना, हमारे जीवन को सरल और सच्चा बनाता है। एक अच्छा व्यक्ति वही होता है जो गलती करके उसे स्वीकार करता है।

जॉन मैक्सवेल ने बहुत सुंदर बात कही है –
"व्यक्ति को इतना महान होना चाहिए कि वह अपनी गलतियों को स्वीकार कर सके और उन्हें स्वयं सुधार सके।"

जब हमारे बच्चे हमें अपनी गलतियों को स्वीकार कर सुधारते हुए देखते हैं, तो उनमें भी अपनी गलतियों को स्वीकार करने का आत्मविश्वास विकसित होता है। वे इस उम्मीद में अपनी गलतियाँ बताते हैं कि हम उनकी मदद करेंगे, उन्हें डाँटने की बजाय समझाएँगे।

गलती मानने के लिए हमारा मन साफ़ होना चाहिए। जब हमें अपनी गलती का अहसास होता है, तभी हम उसे स्वीकार करने के योग्य बनते हैं। गलती सब से होती है, परंतु हर कोई उसे स्वीकार नहीं कर पाता।

वही इंसान अपनी गलती मानता है जिसे यह अहसास होता है कि उससे गलती हुई है। और जब हम अपनी गलती स्वीकार करते हैं, तब ही हम अपने जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

जिनकी किस्मत में महान बनना और तरक्की करना लिखा होता है, वे अपनी गलतियों को स्वीकार कर उनसे सीखते हैं और आगे बढ़ते हैं।

गलती करना, उसे स्वीकार करना और उससे सीखना – यह जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह एक ऐसा कौशल है जो व्यक्ति को न केवल व्यक्तिगत रूप से, बल्कि पेशेवर रूप से भी निखारने में मदद करता है। जब हम अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन पर काम करते हैं, तो हमारा स्वभाव और हमारा आत्मबल दोनों सुधरते हैं। जब हम अपनी गलतियों से सीखते हैं और उन्हें दोहराने से बचते हैं, तो हम भविष्य के लिए बेहतर योजना बना सकते हैं और एक सशक्त इंसान बन सकते हैं।

"कमी निकालना, निंदा करना, बुराई करना आसान है,
लेकिन उन कमियों को दूर करना अत्यंत कठिन होता है।"

– रीना देवी

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