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Monday, May 25, 2020

भरोसा और सादगी: सुरेश सिंह नेगी


भरोसा एक मोतियों की माला की तरह होता है जिसमे धागा, मोतियों को एक सूत्र में बाँधे रखता है। यह काफी हद तक एक भावनात्मक क्रिया है, जिसे हम बाहरी रूप से नहीं दिखा सकते हैं।

बस, कुछ आन्तरिक शक्तियाँ ऐंसी भी हैं, जो हम सभी को एक साथ जोड़े रखती हैं। जिसे भरोसा के नाम से  जाता है। इसकी उपस्थिति लोगों को एक साथ रहने और काम करने, सुरक्षित महसूस करने और एक समूह से संबंधित होने की अनुमति देकर रिश्तों को मजबूत करती है। इसीलिए हमें अपने परिवार के सदस्यों, अपने मित्रों और अपने सहकर्मियों पर भरोसा करने की आवश्यकता है।

आमतौर पर कहा जाता है कि 'सादगी' एक गुण है, हम में से कई लोग यह भी मानते हैं, कि यह एक खूबसूरत चीज है। वास्तविक जीवन में सादगी का प्रतीक हमारा पहनावा, खान-पान और रहन- सहन के रूप में माना जाता है। लेकिन इस तरह की सादगी बाहरी है, इसके साथ-साथ आन्तरिक सादगी का भी हमारे जीवन में होना अति महत्वपूर्ण है।

इसके लिये हमें अपने भाषण और शिष्टाचार में सादगी का पालन करना चाहिए। हमें अपनी बात में मीठा और विनम्र होना चाहिए। हमें घमंड नहीं करना चाहिए, न ही दूसरों को धमकाने की कोशिश करनी चाहिए। हमें किसी भी परिस्थिति में अपना आपा नहीं खोना चाहिए। हमें अपने व्यवहार में ईमानदार और सीधा होना चाहिए।

जहाँ सादगी की बात की जाए तो एक छोटा बच्चा इसका सबसे अच्छा उदाहरण हो सकता है, क्योंकि जो सादगी एक बच्चे में होती है वह किसी में नहीं होती है। वहीं, दूसरी ओर एक बच्चे का अपनी माँ के प्रति जो भरोसा होता है वह भी अन्यत्र कहीं देखने को नहीं मिलता है। 
Suresh Singh Negi
The Fabindia School, Bali

Sunday, November 3, 2019

उषा पंवार: लिखने का महत्व


लिखना एक खूबसूरत कला है क्योंकि लिखते हैं तब हम खुद के करीब होते हैं। लिखना एक तरह की भाषा भी है। व्यक्ति अपने विचारों को दो प्रकार से प्रकट करता हैंबोलकर और लिखकर। जब दूसरा व्यक्ति पास में हो तो अपने विचारों को बोलकर प्रकट करता है। दूर या साक्षर हो तो लिखकर वह अपने भाव प्रकट करते हैं। बच्चे पहले सुनकर, सोचकर, बोलकर फिर लिखना शुरू करते हैं। एक शिक्षक को लेखन कौशल का विकास करने के लिए लेखन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, बार बार लिखने का सुझाव देना चाहिए बच्चे जितना अधिक पुस्तकें पढ़ेंगे उतना अधिक भाषा लेखन में कौशल समृद्ध होंगे। पढने- लिखने की प्रक्रिया साथ साथ चलती हैं और एक दूसरे को समृद्ध करती हैं।

लेख लिखते समय आसान शब्दों का प्रयोग करना चाहिए जिससे अधिक से अधिक लोग समझ पाए। एक ही बात या शब्दो को बार-बार प्रयोग में नहीं लाना चाहिए। जो कुछ सोचते है पढते है उसे अच्छे सुंदर विचारों में लिखकर प्रकट करते है। पढ़ी हुई सामग्री बच्चों को लिखने का आधार देती हैं लिखने की प्रक्रिया में वे पढ़ी हुई संरचना को ध्यान में रखते हुए सोचकर लिखने का प्रयास करते हैं।

लेखन पर बच्चों से बातचीत करना चाहिए और उसे बेहतर करने के लिए सुझाव और प्रतिदिन डायरी में लिखने की आदत रखना चाहिए। इस प्रकिया में शिक्षक अच्छे लेखन के नमूने बच्चों को दिखाकर उन पर बातचीत कर सकते हैं। बच्चों को ज्यादा से ज्यादा पढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। बच्चों को गतिविधियों के द्वारा अलग-अलग विषय या किसी के बारे में लेख या कुछ वाक्य, कहानियाँ लिखने के लिए देना चाहिए।

बच्चों को पढ़ना-लिखना केवल पाठ्य-पुस्तकों में ही नहीं बल्कि बाल साहित्य, अन्य रूचिकर सामग्री, पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। लिखना एक तरह की भाषा है अपने अनुभव को डायरी में लिखना यानी किसी और दिन पढ़ने की सामग्री सुरक्षित रखना है।
Usha Panwar
The Fabindia School, upr4fab@gmail.com

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