Showing posts with label मजबूत. Show all posts
Showing posts with label मजबूत. Show all posts

Saturday, July 4, 2020

एकता और देखभाल: आयशा टॉक


एकता का मतलब है मिलजुल कर साथ रहना। इसका मतलब प्रतिकूल परिस्थितियों में एक-दूसरे की मदद करना और समर्थन करना है। एकजुट रहना मजबूत सम्बन्ध बनाने और एक मजबूत समाज बनाने की कुंजी है। एकता में बड़ी ताकत होती है, जिसे आप और हम सभी जानते हैं। एकता की ताकत से हम किसी भी असम्भव लक्ष्य को भी प्राप्त कर सकते हैं। एकता हमारे जीवन में हर कदम और हर स्तर पर जरूरी है। जो लोग एकजुट रहने के महत्त्व को सीखते हैं और उनका पालन करते हैं, वे लोग खुश और संतुष्ट जीवन जीते हैं। जो लोग इसके महत्त्व को नहीं समझते हैं, वे अक्सर जीवन में विभिन्न चरणों में विभिन्न कठिनाइयों का सामना करते हैं। 

ठीक इसी तरह हम विद्यार्थियों को बचपन से ही मिल-जुलकर एकता से रहने की शिक्षा देनी चाहिए। इसके लिए हम विद्यार्थियों के कुछ समूह बनाकर, उनको कुछ कार्य समूह में करने के लिए दे सकते हैं। इससे विद्यार्थी एक-दूसरे का सहयोग करते हुए एकतापूर्वक कार्य को सफलता से पूरा करेंगे और एक-दूसरे की भावनाओं की कद्र करना व एकता का महत्त्व बहुत ही आसानी और गहराई से सीखेंगे। 

किसी की देखभाल करना न केवल सामने वाले के लिए अच्छा है, बल्कि यह एक अच्छी बात है। इससे मन को बहुत संतुष्टि एवं खुशी मिलती है। यह हमें दूसरों से जोड़ता है और एक मजबूत समुदाय बनाता है और एक खुशहाल समाज बनाने में मदद करता है। बच्चों में शुरू से ही अपनी चीजों की देखभाल करने की आदत विकसित की जानी बहुत जरूरी होती है। इसके लिए सर्वप्रथम उन्हें उन वस्तुओं का हमारे जीवन में जो भी महत्त्व है, वह उन्हें बताना बहुत जरूरी होता है। इस प्रकार हम उन्हें छोटी-छोटी चीजों का महत्त्व बताते हुए उनमें उनके प्रति देखभाल की भावना विकसित कर सकते हैं। 

उन्हें यह भी सिखाना चाहिए कि अगर घर में उनसे छोटा कोई बच्चा है, तो वह उसका भी ध्यान रख सकते हैं। घर में कोई बुजुर्ग है, तो उनकी भी सेवा एवं मदद करके उनकी देखभाल कर सकते हैं। अपनी कक्षा में अपनी बैठने की मेज-कुर्सी हैं उन्हें तोड़े नहीं, उनका ध्यान रखें। अपनी पुस्तकों को सहेज कर रखें उन्हें फाड़े नहीं। किसी बेजुबान प्राणी को सताए नहीं उनकी देखभाल करें। अध्यापक भी बच्चों का कक्षा एवं विद्यालय में पूरा ध्यान रखें एवं उन्हें प्रेमपूर्वक समझा कर अच्छे-बुरे का ज्ञान समय-समय पर कराते रहें। इस प्रकार हम विद्यार्थियों में देखभाल की भावना विकसित कर सकते हैं। 
Ayasha Tak
The Fabindia School, Bali

Wednesday, June 10, 2020

आशा और दोस्ती: सुरेश सिंह नेगी


आशा का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। हम सिर्फ एक आशा की वजह से जिंदगी जी रहे हैं। हम सुबह जल्दी जागने के लिए अलार्म लगाते हैं, इस आशा के साथ कि कल होगा और हम अगली सुबह उठेंगे। एक आदमी इसी आशा के साथ अपने परिवार की सभी जरूरतों और इच्छाओं को पूरा करने के लिए, पैसा कमाने के लिए काम करता है,  कि वह उन्हें खुश रखेगा। आशा वास्तव में हमें कुछ करने का कारण देती है। यह हमारे लिए एक प्रेरक  की तरह काम करती है। हम किसी  भी कार्य  को शुरू  करने से पहले यह आशा करते हैं कि हम इसे पूरा करेंगे और इसमें सफल होंगे।  

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने अमीर या गरीब हैं, लेकिन एक समय ऐसा आता है, जब हर किसी को जीवन में असफलताओं का सामना करना पड़ता है। केवल अंतर असफलताओं की मात्रा में होता है। हमेशा सकारात्मक रहें, चाहे कुछ भी हो जाए क्योंकि आखिरकार सब कुछ बेहतर हो जाता है। आपके पास उनका सामना करने और एक योजना के साथ आगे बढ़ने का साहस होना चाहिए। लेकिन बस उम्मीदें हैं और इसे पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करते रहना चाहिए। इसलिए, हमेशा धैर्य रखें और आशा बनाये रखें। 

दोस्ती एक बहुत मजबूत और प्यारा रिश्ता है। अपने दोस्तों के साथ हम कुछ भी साझा कर सकते हैं, जिस बात को हम अपने माता-पिता से भी साझा नहीं कर सकते हैं। वही बात हम बड़ी आसानी  से  अपने दोस्तों के साथ  साझा कर सकते  हैं। कभी - कभी हमें अपने दोस्तों की ख़ुशी के लिए त्याग  भी करना पड़ता है, अगर हम दोस्ती का रिश्ता रखते हैं तो हमें उस रिश्ते में ईमानदार रहना होगा, हम अपने दोस्तों को चोट नहीं पहुँचा सकते हैं। अगर हम उदास और अकेला महसूस करते हैं तो हम अपने दोस्तों के साथ बात करते हैं। और उनके साथ बात करने के बाद हम आराम और राहत महसूस करते हैं। इस दुनिया में बहुत कम लोगों के असली दोस्त होते हैं, इसलिए उन्हें अनदेखा न करें।
Suresh Singh Negi
The Fabindia School, Bali

Monday, May 25, 2020

भरोसा और सादगी: सुरेश सिंह नेगी


भरोसा एक मोतियों की माला की तरह होता है जिसमे धागा, मोतियों को एक सूत्र में बाँधे रखता है। यह काफी हद तक एक भावनात्मक क्रिया है, जिसे हम बाहरी रूप से नहीं दिखा सकते हैं।

बस, कुछ आन्तरिक शक्तियाँ ऐंसी भी हैं, जो हम सभी को एक साथ जोड़े रखती हैं। जिसे भरोसा के नाम से  जाता है। इसकी उपस्थिति लोगों को एक साथ रहने और काम करने, सुरक्षित महसूस करने और एक समूह से संबंधित होने की अनुमति देकर रिश्तों को मजबूत करती है। इसीलिए हमें अपने परिवार के सदस्यों, अपने मित्रों और अपने सहकर्मियों पर भरोसा करने की आवश्यकता है।

आमतौर पर कहा जाता है कि 'सादगी' एक गुण है, हम में से कई लोग यह भी मानते हैं, कि यह एक खूबसूरत चीज है। वास्तविक जीवन में सादगी का प्रतीक हमारा पहनावा, खान-पान और रहन- सहन के रूप में माना जाता है। लेकिन इस तरह की सादगी बाहरी है, इसके साथ-साथ आन्तरिक सादगी का भी हमारे जीवन में होना अति महत्वपूर्ण है।

इसके लिये हमें अपने भाषण और शिष्टाचार में सादगी का पालन करना चाहिए। हमें अपनी बात में मीठा और विनम्र होना चाहिए। हमें घमंड नहीं करना चाहिए, न ही दूसरों को धमकाने की कोशिश करनी चाहिए। हमें किसी भी परिस्थिति में अपना आपा नहीं खोना चाहिए। हमें अपने व्यवहार में ईमानदार और सीधा होना चाहिए।

जहाँ सादगी की बात की जाए तो एक छोटा बच्चा इसका सबसे अच्छा उदाहरण हो सकता है, क्योंकि जो सादगी एक बच्चे में होती है वह किसी में नहीं होती है। वहीं, दूसरी ओर एक बच्चे का अपनी माँ के प्रति जो भरोसा होता है वह भी अन्यत्र कहीं देखने को नहीं मिलता है। 
Suresh Singh Negi
The Fabindia School, Bali

Blog Archive