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Monday, May 25, 2020

सादगी और विश्वास: उषा पंवार


सादगी एक मानवीय गुण है जिसे मानव जीवन में पालन करना चाहिए । हमें बड़े लोगों (ज्ञानी) के सरल जीवन, उच्च विचारों पर मनन कर अपनाना चाहिए। -''सादा जीवन उच्च विचार''

जीवन में सादगी का होना बहुत आवश्यक है क्योंकि यदि हम हमेशा बनावटी रहेंगे तो कभी भी सही फैसला नहीं ले पाएँगे । सादगी में ही जीवन की सुंदरता होती है। सादगी के द्वारा अपना बहुत सा समय, धन और खर्च होने वाली शक्तियाँ बचा सकते हैं और उनका अपने उत्कर्ष के लिए सदुपयोग कर सकते हैं । हमें भोजन से लेकर रहन-सहन तक साधारण तरीके से जीना चाहिए। आजकल रहन-सहन, रीति-रिवाज, त्योहारों के नाम पर दिखावे के लिए अपने नाम या बड़प्पन के लिए अनाप-शनाप खर्च करते हैं, कमाई का अंश इसी में खर्च हो जाता है अतः इन सब से बचने के लिए साधारण तरीके से जीना चाहिए । साधारण एवं पौष्टिक भोजन करना चाहिए।

विश्वास एक मन की भावना का गुण है जिस प्रकार परिवार में परिजनों में परस्पर प्यार होता है। माता-पिता का बच्चों के प्रति, भाई बहनों में, भाई-भाई में, पति-पत्नी में प्यार होता है क्योंकि वह एक दूसरे पर विश्वास करते हैं सभी के अंदर विश्वास होता है अगर हम डॉक्टर के पास जाते हैं, तो हमें विश्वास होता है कि डॉक्टर हमें स्वस्थ कर सकता है या किसी बस में बैठते हैं तो हमें ड्राइवर पर विश्वास होता है कि वह हमें मंजिल तक पहुँचाएगा । किसी भी रिश्ते की सबसे बड़ी नींव होती है- विश्वास। ऐसा रिश्ता शिक्षक व छात्र के बीच भी होता है जैसे- छोटी कक्षा से ही बच्चों में अध्यापक के प्रति एक प्यार जो उन्हें माँ रुपी मिलता है यही प्यार एक विश्वास का रूप लेकर आगे बढ़ता है, इसी प्रकार प्रत्येक रिश्ते की बुनियाद विश्वास पर टिकी है। शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन के वास्तविक कुम्हार होते हैं, जो ना सिर्फ छात्रों के जीवन को आकार देते हैं बल्कि छात्रों में यह विश्वास जगाते हैं कि छात्र शिक्षक के द्वारा समझाई गई बातें अपने आप को काबिल बना सकते हैं अतः शिक्षक की सबसे बहुमूल्य संपत्ति छात्रों का विश्वास और छात्रों में आत्मविश्वास जगाना है ।

छात्रों को सबसे ज्यादा विश्वास अपने गुरुजनों पर होता है। क्योंकि गुरुजनों को सागर की अथाह गहराई से नापा है। गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु, गुरु को भगवान से भी ऊपर का दर्जा दिया है। शिक्षक और छात्र का रिश्ता एक विश्वास का होता है, जिसे हम जिंदगी भर नहीं भूल पाते जैसे हम भी अपने शिक्षकों को नहीं भूल पाते हैं।  बचपन से बड़े होने तक शिक्षक बहुत सारी अच्छी शिक्षाएँ देते हैं । जीवन में आगे बढ़ने और सफलता पाने का रास्ता भी दिखाते हैं। कुछ शिक्षक ऐसे होते हैं, जिनसे हम बहुत ज्यादा प्रेरित होते हैं उन्हें और उनके द्वारा दी गई सीख को नहीं भूल पाते हैं। अधिकतर छात्र अपने शिक्षक को ही अपना रोल मॉडल मानते हैं । शिक्षक को भी छात्रों की भावनाओं को जानना चाहिए। शिक्षक को हमेशा छात्र से बड़ी अपेक्षाएँ होती है और रखनी भी चाहिए । एक शिक्षक को हमेशा इस बात का एहसास छात्रों को दिलाना चाहिए कि उन्हें उससे बहुत अपेक्षाएँ है। ऐसे में छात्र को प्रेरणा भी मिलती है और शिक्षक व छात्र के बीच रिश्ता भी गहरा होता है यानी दोनों में गहरा विश्वास भी होता है।
Usha Panwar
The Fabindia School, Bali

Wednesday, May 6, 2020

ईमानदारी और सम्मान: कृष्ण गोपाल


जीवन में मूल्यों की अधिक आवश्यकता रहती है।  यदि हम विद्यार्थियों की बात करें तो उनके लिए मूल्यों का होना अत्यावश्यक है। इस पर भी उपर्युक्त मूल्यों से विद्यार्थी जीवन लक्ष्य को प्राप्त करेगा ही।  ईमानदारी और सम्मान दोनों ऐसे मूल्य है जो हर स्थान पर चाहिए ही। 

परन्तु खेल के मैदान में इसकी अधिक आवश्यकता जान पड़ती है। एक खिलाडी को खेल और दूसरे खिलाड़ियों के प्रति ईमानदारी रखनी पड़ती है साथ ही दोनों के प्रति सम्मान का भाव भी हो। एक खिलाडी इन मूल्यों को दूसरों में जाग्रत कर सकता है।  मैदान में खेलते हुए कई लोग उसे देखते है, वह ईमानदारी और सम्मान का परिचय दर्शकों को देता है, दर्शकों में से कई उसका अनुकरण करते है। वैसे भी बेईमानी से कभी-कभी लाभ मिल सकता है परन्तु लंबे समय तक नहीं।

परीक्षा में या कहीं और स्थान पर हमें नैतिक मूल्यों को सजीव रखने की आवश्यकता है। ये दौर प्रतियोगिता का है अतः सर्वप्रथम स्वयं के प्रति ईमानदार बने। एक शिक्षक के रूप में भी अपनी गलतियाँ स्वीकार करें और बच्चों को भी प्रेरित करें।  बच्चों के समक्ष सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करें।  काम में कभी बेईमानी करें, सम्मान दें। जिस बात की हम अपेक्षा रखते है, वह पहले देनी भी तो पड़ेगी।

ये मूल्य व्यक्ति में आत्मविश्वास जगाते है और मानसिक तनाव को कम करने में सहायक है। ऐसे लोग अपने समाज में प्रतिष्ठा पाते हैं। यदि ह्रदय से सम्मान पाने की लालसा मन में है तो ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कीजिए। 
Krishan Gopal
The Fabindia School, Bali

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