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Wednesday, May 6, 2020

ईमानदारी और सम्मान: कृष्ण गोपाल


जीवन में मूल्यों की अधिक आवश्यकता रहती है।  यदि हम विद्यार्थियों की बात करें तो उनके लिए मूल्यों का होना अत्यावश्यक है। इस पर भी उपर्युक्त मूल्यों से विद्यार्थी जीवन लक्ष्य को प्राप्त करेगा ही।  ईमानदारी और सम्मान दोनों ऐसे मूल्य है जो हर स्थान पर चाहिए ही। 

परन्तु खेल के मैदान में इसकी अधिक आवश्यकता जान पड़ती है। एक खिलाडी को खेल और दूसरे खिलाड़ियों के प्रति ईमानदारी रखनी पड़ती है साथ ही दोनों के प्रति सम्मान का भाव भी हो। एक खिलाडी इन मूल्यों को दूसरों में जाग्रत कर सकता है।  मैदान में खेलते हुए कई लोग उसे देखते है, वह ईमानदारी और सम्मान का परिचय दर्शकों को देता है, दर्शकों में से कई उसका अनुकरण करते है। वैसे भी बेईमानी से कभी-कभी लाभ मिल सकता है परन्तु लंबे समय तक नहीं।

परीक्षा में या कहीं और स्थान पर हमें नैतिक मूल्यों को सजीव रखने की आवश्यकता है। ये दौर प्रतियोगिता का है अतः सर्वप्रथम स्वयं के प्रति ईमानदार बने। एक शिक्षक के रूप में भी अपनी गलतियाँ स्वीकार करें और बच्चों को भी प्रेरित करें।  बच्चों के समक्ष सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करें।  काम में कभी बेईमानी करें, सम्मान दें। जिस बात की हम अपेक्षा रखते है, वह पहले देनी भी तो पड़ेगी।

ये मूल्य व्यक्ति में आत्मविश्वास जगाते है और मानसिक तनाव को कम करने में सहायक है। ऐसे लोग अपने समाज में प्रतिष्ठा पाते हैं। यदि ह्रदय से सम्मान पाने की लालसा मन में है तो ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कीजिए। 
Krishan Gopal
The Fabindia School, Bali

Sunday, September 29, 2019

सुरेश नेगी:पढ़ना एक कौशल है


पढ़ना भाषा अधिग्रहण,संचार ,सूचना और विचारों को साझा करने का एक साधन है।

पढ़ना एक सबसे बुनियादी कौशल है जिसे एक बच्चे को अपने जीवन में सफल होने के लिए सीखने की जरूरत है। पढ़ने की अच्छी आदतें विकसित करना आप और आपके बच्चे के भविष्य के लिए न केवल शैक्षणिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी महत्वपूर्ण है। पढ़ने से शब्दावली का विकास होता है। कम उम्र से पढ़ने की आदतों की वजह से ही एक बच्चे के दिमाग में शब्दावली का विकास होता है पढ़ने के कारण ही बच्चे का ध्यान किसी भी विषय में लम्बे समय तक लगा रहता है, साथ ही साथ उसमें दूसरी चीजों को समझने का विकास भी होता है।

इस बात से कोई भी इनकार नहीं कर सकता है कि हमने जो कुछ भी अभी तक सीखा है वो सब पुस्तकें पढ़ने के कारण ही हुआ है। पुस्तकें पढ़ने से हमें आए दिन कुछ न कुछ नया सीखने को मिलता है जो हमारे ज्ञान में बढ़ोतरी करता है। पुस्तकें हमें बाहरी दुनिया से अवगत कराती है साथ ही साथ हमें सांसारिक विषयों के बारे में संवेदना हासिल करने में भी मदद करती है।

पुस्तकें पढ़ने से एक अच्छे चरित्र का निर्माण होता है। यह आपके आत्मविश्वास और विश्वास को बढ़ाने में मदद करता है। पढ़ने से आपका, जीवन को देखने का नजरिया भी बदल जाएगा साथ ही यह आपके सामाजिक कौशल को भी बढ़ाएगा। पढ़ने की आदत सबसे अच्छे गुणों में से एक है जो इंसान लगातार पढ़ता रहता है वो पुस्तक को अपना दोस्त समझने लगता है और अपने व्यस्त जीवन में से अपने दोस्त के लिए समय निकाल ही लेता है। अगर आप एक बार पुस्तकें पढ़ना शुरू कर देते हो तो इसे अपनी आदत बना लें क्योंकि पुस्तकें पढ़ने से मानसिक तनाव कम होता है और आप एक अच्छे मूड में रहते हैं सोने से पहले पुस्तक पढ़ने से नींद भी अच्छी आती है। लम्बी यात्रा के समय पुस्तक पढ़ने से आपको बोरियत महसूस नहीं होगी।

इसलिए आप जीवन में जितना भी व्यस्त हो अपने लिए और पुस्तकें पढ़ने क लिए समय निकालना कभी भी न भूलें।
Suresh Negi, The Fabindia School
sni4fab@gmail.com

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