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Sunday, October 11, 2026

अपनी क्षमता को पहचानने की सीख - सरोज पटेल

Educated के अध्याय 4 को पढ़ते हुए मुझे यह महसूस हुआ कि व्यक्ति की पहचान केवल उसकी परिस्थितियों से नहीं होती, बल्कि वह उन परिस्थितियों से क्या सीखता है, यह अधिक महत्वपूर्ण है। अध्याय में तारा अपनी माँ के जीवन में आए बदलावों और उनके बढ़ते आत्मविश्वास को देखती है। इससे मुझे अपने शिक्षक जीवन के कई अनुभव याद आए।

एक शिक्षक के रूप में मैंने भी महसूस किया है कि शुरुआत में कई बार हमें अपनी क्षमताओं पर पूरी तरह विश्वास नहीं होता। नई कक्षा, नए बच्चे या कोई नई जिम्मेदारी सामने आती है, तो मन में थोड़ी झिझक होती है। लेकिन जब हम उस जिम्मेदारी को स्वीकार करके लगातार प्रयास करते हैं, तो धीरे-धीरे हमारा आत्मविश्वास बढ़ता जाता है।

बच्चों के साथ काम करते हुए मैंने यह भी सीखा है कि जिस तरह एक व्यक्ति को अपनी क्षमता पहचानने के लिए अवसर चाहिए, उसी तरह बच्चों को भी अवसर और प्रोत्साहन चाहिए। जब मैं किसी बच्चे को छोटी-सी जिम्मेदारी देती हूँ और वह उसे पूरा करता है, तो उसके चेहरे पर दिखाई देने वाला आत्मविश्वास मुझे भी प्रेरित करता है।

इस अध्याय ने मुझे अपने बारे में यह सोचने का अवसर दिया कि मैं भी अपने अनुभवों से लगातार सीख रही हूँ और हर नई चुनौती मुझे एक बेहतर शिक्षिका बनने का अवसर देती है। मेरे लिए शिक्षा का अर्थ दूसरों को सिखाना ही नहीं, बल्कि स्वयं भी हर दिन कुछ नया सीखते रहना है।

इस अध्याय से हमें यह सीख मिलती है कि हम अपनी क्षमता पर विश्वास रखें, अवसरों को स्वीकार करें और अनुभवों को अपनी सीख में बदलते रहें।

सरोज पटेल
सनबीम ग्रामीण स्कूल

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