लिखना - जफ्फर खां

लिखने की कला हर किसी में नहीं होती हैं और जिसमें लिखने का हुनर है दिमाग में उत्पन्न  विचारों कल्पनाओं को कागज पर  लिखने की कला है जब हम लिखने बैठते हैं तो हर पहलू के बारे में सोच कर उसे पूर्ण करना पड़ता हैं |.लेखन शतरंज के खेल की तरह है, फर्क सिर्फ इतना है कि यहां आखिरी चाल सबसे पहले सूची जाती हैं |  हमारे पास विचार हैं नहीं तो हम उन्हें लिखना चाहते हैं अगर हमने लिख रहे हैं तो उसके बारे में जानकारी पता करना पड़ती ही अच्छा लिखने के लिए हमारी जानकारी बिल्कुल सही होनी चाहिए बिना जानकारी या गलत लिखना हमें हंसी के पात्र बना देता है अत्यधिक विचारणीय लोग अकेले रहना पसंद करते हैं  अक्षर वो खुद से ही बातचीत करते रहते हैं ,सोचते रहते हैं | हमें बेहतर कार्य करने में मदद मिलती हैं जिससे हमारी सोचने,समझने और लिखने  का नजरिया बढ़ता है | 

लिखना एक माध्यम है जिसके द्वारा हमें अपने विचारों को उस व्यक्ति के पास पहुंच जाते हैं जो हमारे समक्ष नहीं होता है हमें अपने अनुभव को संजो कर रखना चाहिए हमें दूसरे लोगों से जुड़ने की कोशिश करनी चाहिए जिससे हमारे लिखने की क्षमता का विकास होता है हमें परिस्थितियों से निकलने के लिए यह समझना होगा कि बातचीत भी लेखन हैं | शुरुआती लिखने की कला का विकसित करने के क्रम में बहुत सारे बहुत सारे तरीके ऐसे हैं | जिससे वर्णमाला को जोड़ सकते हैं उससे संबंधित शब्दों को खोजने के लिए प्रेरित करता है उसे लिखने की बुनियादी कला में पारंगत हो जाते हैं | हमें व्यक्तियों  को लिखने के  बारे में प्रोत्साहित करना चाहिए हमें धीरे-धीरे अलग-अलग श्रोताओं के लिए अपने पसंद के शब्दों का चयन और उसका प्रयोग करना सीखना चाहिए |
जफ्फर खां 
द फैबइंडिया स्कूल 
zkn@fabindiaschools.in

Good Schools of India Journal @ www.GSI.IN

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