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Saturday, July 11, 2026

मन सही सोच देता है और हृदय सही दिशा - मंजुला सागर

Reflection – Lesson 9: Mind Versus Heart

"मन सही सोच देता है और हृदय सही दिशा। जब दोनों साथ चलते हैं, तभी सही निर्णय जन्म लेते हैं।"

इस अध्याय ने हमें यह समझाया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बच्चों का बौद्धिक विकास करना नहीं, बल्कि उन्हें संवेदनशील, जिम्मेदार और अच्छे संस्कारों वाला इंसान बनाना भी है। कई बार बच्चे ऐसी परिस्थितियों में होते हैं जहाँ उनका मन कुछ और कहता है और दिल कुछ और। ऐसे समय में उन्हें सही निर्णय लेने की कला सिखाना एक शिक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

एक शिक्षक के रूप में हमें प्रत्येक बच्चे की भावनाओं, परिस्थितियों और क्षमताओं को समझना चाहिए। केवल नियमों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय, संवेदनशीलता और न्याय का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। जब शिक्षक बच्चों की बात सुनते हैं, उन्हें सम्मान देते हैं और विश्वास का वातावरण बनाते हैं, तब बच्चे न केवल पढ़ाई में बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में बेहतर निर्णय लेना सीखते हैं।जैसा कि मुझे समझ में आता है कि हम बच्चों को ऐसा वातावरण दें जहाँ वे अपने मन और हृदय दोनों की आवाज़ को समझते हुए सही मार्ग चुन सकें। यही शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य है और यही एक सच्चे शिक्षक की पहचान भी है। जीवन और शिक्षा में सफलता का मार्ग दोनों के संतुलन में ही है। जब मन और हृदय दोनों मिलकर साथ कार्य करते हैं तभी सही निर्णय अच्छा चरित्र और सफल जीवन की नींव तैयार होती है।

मंजुला सागर
सनबीम ग्रामीण स्कूल

Friday, March 14, 2025

साहस: प्रतिबिंब आर्थर फुट अकादमी

सिखने का जुनून पैदा करो। अगर आप ऐसा करते हैं, तो आपकी सफलता निश्चित है।

मैंने साहस-पाठ से यही सिखा कि अगर जिंदगी में एक बार कामयाबी नहीं मिली तो बार-बार उसी कार्य को करना चाहिए।वह कार्य कितना भी कठिन क्यों ना हो अगर हमारे अंदर साहस और हिम्मत है। तो हम उसे जरूर कर सकते हैं।और जैसे मैं अंग्रेजी बोलने व पढने में कामजोर हूं तो मैं अंग्रेजी बोलना पढना जरूर सीखूंगी।अगर मैं  सीखने का साहस करूंगी। तो जरूर सीख जाऊंगी और बच्चों को भी सीख दूँगी। जिंदगी में कैसी भी परिस्थियां क्यों ना आ जाए मैं उसका सामना करने का साहस और हिम्मत जरूर रखूंगी
सिमरन कौर

जीत और हार यह आपकी सोच पर निर्भर है, मान लो तो हार हैं, ठान लो तो जीत है।

पाठ साहस में मैंने सिखा है कि जीवन में हर मुस्किल का सामना करने का साहस हमारे अंदर होना चाहिए। किसी कार्य से डर कर हमें जीवन में पीछे नहीं हटना चाहिए। अगर हम डर कर किसी कार्य को छोड़ना नहीं चाहिए, बल्कि साहस करके उस कार्य को पूरा करने का प्रयत्न करना चाहिए। साहस करने से हम कभी भी पीछे नहीं रहेंगे। किसी भी कार्य में उन्नति हासिल कर सकते हैं। इंसान कभी भी परेशानियों से नहीं हारता। बल्कि इंसान अपनी खुद की कमजोरी से हार जाता है।
ललिता पाल

जो व्यक्ति जोखिम उठाने का साहस नहीं रखता, वह अपने जीवन में कुछ हासिल नहीं कर सकता।
जिस व्यक्ति के अन्दर साहस होता है। वह बिल्कुल निडर और बेखौफ़ होता है। पाठ साहस से मैंने समझा है कि हमें अपने जीवन में इस बात की चिंता नहीं करनी चाहिए कि तमाशा देखने वाले लोग हमारे बारे में क्या सोचते और क्या बोलते हैं। अगर हम दुनिया की इन सब बातों पर ध्यान देंगे, तो हम कभी भी अपने जीवन में आगे नहीं बढ़ सकते। इसलिए हमें अपने जीवन में हर कार्य को पूरा करने का साहस रखना चाहिए।
साहस वह गुण हैं, जिसकी मदद से हम वह कार्य कर सकते हैं, जो हम अपने जीवन में करना चाहते हैं। इसलिए हमें अपने जीवन में साहस बनाए रखना चाहिए।
स्वाति

साहस इस पाठ से मुझे यह सीखने को मिला है कि जीवन में कितनी भी मुश्किलें हों, पर हमें साहसी होना चाहिए। हम वह काम कर सकते हैं, हमें हार नहीं माननी चाहिए। जिंदगी में मुश्किलें आती हैं और चुनौतियाँ भी, पर हमें उनका सामना करने का साहस होना चाहिए। वह साहस जो मुश्किलों से लड़े, मुश्किलों को हराने का साहस हम सब में होना चाहिए। साहस कठिनाइयों का सामना करने की इच्छा मन में जागृत करता है। हमें चुनौतियों को देखकर पीछे नहीं हटना चाहिए, बल्कि उनका सामना करना चाहिए। हम सब में चुनौतियों का सामना करने का साहस होना चाहिए।
साक्षी खन्ना

Thursday, January 26, 2023

विचारशीलता और आपसी समझ - ज्योति तड़ियाल

Thoughtfullness अर्थात विचारशीलता, चिंताशीलता, सोच विचार या सोच समझ।

अनेक अर्थ स्वयं में समाहित किए यह शब्द पूर्णता प्रदर्शित करता है। किसी भी विषय पर कार्य करने से पूर्व विचारशीलता अति आवश्यक है। कार्य को सही दिशा में कार्यान्वित करने के लिए विचारशीलता अत्यंत आवश्यक है। कक्षा कक्ष में भी सोच विचार के द्वारा ही सभी कार्य सुगमता से पूरे होते हैं। कक्षा कक्ष में कार्य की सफलता हेतु तीन प्रकार के उपाय अपनाए जा सकते हैं –

पहला किसी भी कार्य को करने से पूर्व विद्यार्थियों के मध्य उसकी सोच समझ विकसित करना। जब कार्य को भली प्रकार से सोच समझकर किया जाता है तो उसका परिणाम सुखद ही होता है।

दूसरा आपसी समझ । किसी भी कार्य को दो दिमाग अधिक अच्छे से कर सकते हैं परंतु यह तभी संभव है जब दोनो दिमाग एक दिशा में सही तालमेल के साथ सोचें। विद्यार्थियों को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया जाए कि उनके मध्य सही तालमेल बना रहे, तभी प्रयास सार्थक होंगे।

तीसरा है सावधानी। किसी भी कार्य को करने से पूर्व क्या क्या सावधानियां आवश्यक हैं यह भी कक्षा कक्ष में चर्चा का विषय है हर कार्य में सावधानी से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है।

अपने विद्यार्थियों के मध्य विचारशीलता को सही प्रकार से परिभाषित करना आवश्यक है। कक्षा कक्ष में इसे सही रूप से कार्यान्वित भी करना आवश्यक है। किसी भी कार्य की सफलता उस पर किए गए सोच विचार व सोच समझ पर ही निर्भर है।

Understanding के हिंदी पर्याय हैं – सहमति, समझदारी, सामंजस्य, तालमेल व आपसी समझ।

सहमति व सामंजस्य के द्वारा ही हमारे भीतर समानुभूति की भावना उत्पन्न होती है। विद्यार्थियों के मध्य इस भाव को विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।जब हम दूसरे के कष्ट व परेशानी को दया की दृष्टि से न देखे अपितु उस पर समानुभूति व संवेदना का भाव रखें तो इसे ही empathy व समानुभूति कहते हैं।

कक्षा कक्ष में ऐसी परिस्थिति उत्पन्न करी जाए जहां कुछ विद्यार्थी स्वयं को किसी कार्य में असमर्थ पा रहे हैं, उन्हें सहायता की आवश्यकता है । उसी समय कुछ विद्यार्थियों  को उनका सहायक बनाया जाए। वे उन विद्यार्थियों की सहायता इस भाव से करें मानो वे स्वयं ही इस परिस्थिति का। सामना कर रहे हों। धीरे धीरे यह भावना सभी विद्यार्थियों में विकसित हो जायेगी। सारे विद्यार्थी इस प्रकार समानुभुति की भावना से पूर्ण होंगे और सबकी सहायता करना सीख जाएंगे। इस प्रकार निश्चित रूप से वे उत्कृष्ट नागरिक बनेंगे। 

यह एक शाश्वत सत्य ही है कि समानुभूति व सामंजस्य की यह भावना जीवन में भी विद्यार्थियों के लिए अत्यंत फलदायी रहेगी व कुशल नागरिकों का निर्माण करेगी।

ज्योति तड़ियाल
द दून गर्ल्स स्कूल

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