त्यौहार - धर्मेन्द्र पोद्दार

(प्रस्तुत कविता भारत में अनेकता में एकता एवं भारत में  विभिन्न धर्मावलम्बियों द्वारा मनाये जाने वाले त्यौहार, पूजा, आराधना, प्रार्थना, ध्यान, साधना एवं आस्था को सम्मिलित रूप से एकजुट होकर मनाते हैं | सम्पूर्ण विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है जहाँ विभिन्न धर्मावलम्बियों स्वतंत्र रूप से बड़े उत्साह से एकजुट होकर मनाते हैं | यही भारतवासियों की विशेषता है | यह कविता उसी सन्दर्भ में है | प्रस्तुत कविता वर्ष – 2019 में आयोजित “वास्को फीस्ट “ में पुरस्कृत रही है |)

कितना सुन्दर देश हमारा,
सब देशों से न्यारा है |
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
जैन, बौद्ध, एवं अन्य भाई |
बैर कभी न वे करते हैं,
आपस में हम सब मिल जुलकर रहते हैं |
सुख हो या दुःख, खुशी हो या गम,
 हम एक साथ सब सहते हैं |
तीज-त्यौहारों में भी हम सब,
मिल जुलकर खुशियाँ मनाते हैं|
बैर-भाव न मन में हम सब का,
भारतवासी हम कहलाते हैं |
मकर संक्रांति या सरस्वती पूजा,
…या हो ईद – बकरीद… |
हम सब हैं ; इन त्यौहारों के मुरीद,
हम सब मिलकर रहना जाने |
सिर्फ़ और सिर्फ़ खुशियाँ बाँटे,
होली के रंगों में रंग…|

एकता, मानवता, प्रेम,  भाई-चारे का,
सिर्फ़ सन्देश फ़ैलाना जाने |
दीपावली, “ऑल-सोल्स-डे”, प्रकाश-पर्व, सबे-बारात,
हैं सब एक ही, भाई-चारे का त्यौहार |
भेद न कोई इनमें, है सिर्फ़ ढंग अलग, 
उद्देश्य, उत्साह-उमंग, प्रेम-शांति, भाई-चारे का |
सीख सदैव दुनियाँ को देते रहता,
विश्व में हे बन्धूओं……. |
हम सब सीखें मिल जुलकर रहना,
त्यौहारों के बहाने, आपस में मिल जुलकर रहना | 
                                             🌼🌻🌼
 धर्मेन्द्र पोद्दार 
                                                    (भाषा विभाग प्रमुख)
                                             (सेक्रेड हार्ट स्कूल, सिलीगुड़ी )

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